Yes Bank के राणा कपूर को नहीं थी 'No' कहने की आदत, सी-फेसिंग घर में होती थी पार्टियां- रिपोर्ट

Yes Bank के राणा कपूर को नहीं थी 'No' कहने की आदत, सी-फेसिंग घर में होती थी पार्टियां- रिपोर्ट
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर. (फाइल फोटो)

सीबीआई (CBI) ने यस बैंक (Yes Bank) के सह-संस्थापक राणा कपूर (Rana Kapoor) और दीवान हाउसिंग (DHFL) के निदेशक कपिल वाधवां के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है.

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नई दिल्ली. मुश्किल में फंसे यस बैंक (Yes Bank) के संस्थापक राणा कपूर (Rana Kapoor) मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पुलिस कस्टडी में हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. बिजनेस अखबार 'मिन्ट' के अनुसार, कपूर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अपने बैंक के कर्मचारियों को 'गोल्डेन पिन अवार्ड' से नवाजते थे. वह इन लोगों के लिए अपने सी-फेसिंग घर में शानदार पार्टियों का आयोजन भी करते थे. मिन्ट के अनुसार बैंक में काम करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, 'वह अक्सर कहते थे कि 'अगर आप बड़ा निवेश नहीं करेंगे तो आप आगे नहीं बढ़ेंगे.'

रिपोर्ट के अनुसार, जब सब कुछ सही चल रहा था तब कपूर ऐसे बैंकर थे जो कभी 'न' नहीं कहते थे. सूत्र ने बताया कि कपूर के मातहत यस बैंक ने उन कॉरपोरेट्स को भी लोन दिया, जिन्हें दूसरे बैंक मना कर चुके होते थे. इन्हीं कारणों से बैंक का लोन पोर्टफोलियो 26 गुणा बढ़ गया, लेकिन इसके साथ ही बैंलेंस सीट में भी बड़ा अंतर हुआ. रिपोर्ट के अनुसार यह अंतर 54,000 करोड़ रुपये का था.

कंपनियों के मार्फत अनुचित लाभ लेने की कोशिश
सीबीआई ने यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर, दीवान हाउसिंग (डीएचएफएल), डीओआईटी अर्बन वेंचर्स कंपनी और डीएचएफएल के प्रवर्तक निदेशक कपिल वाधवां के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. एजेंसी ने आरोप लगाया कि 62 वर्षीय कपूर ने यस बैंक के जरिए डीएचएफएल को वित्तीय सहायता देने के लिए वाधवां के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची. इसके बदले में अपने लिए और अपने परिवार के सदस्यों के लिए उनकी कंपनियों के मार्फत अनुचित लाभ लेने की कोशिश की.
अधिकारियों ने कहा कि कपूर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया, जिसने शनिवार को सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार घोटाला अप्रैल से जून 2018 के बीच शुरू हुआ था जब यस ने घोटालाग्रस्त दीवान हाउसिंग वित्त निगम लिमिटेड के अल्पावधि ऋणपत्र में 3700 करोड़ रुपये का निवेश किया था.



इसके बदले में वाधवां ने डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ऋण के रूप में कपूर और परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर ‘600 करोड़ रुपये की रिश्वत’ का भुगतान किया था. सूत्रों ने बताया कि यह आरोप है कि बैंक ने धन की वसूली के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए और ऐसा संदेह है कि बैंक के उस उदार रख का डीओआईटी वेंचर्स को मिले धन से संबंध है. इससे पहले सूत्रों ने बताया था कि सीबीआई ने यस बैंक के मामलों की जांच शुरू कर दी है और अधिकारी इस मामले में दस्तावेज इकट्ठा कर रहे हैं.

SBI करेगा बैंक में 49% हिस्सेदारी का अधिग्रहण
कहा जा रहा है कि डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लि कपूर परिवार की कंपनी है और उसे घोटाले से प्रभावित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल को 3000 करोड़ रुपये का कर्ज देने के बाद 600 रुपये की राशि मिली जो कथित तौर पर रिश्वत थी. दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि पर उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के भविष्य निधि कोष से 2200 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में सीबीआई पहले ही मुकदमा कायम कर चुकी है.

RBI ने Yes बैंक के स्वामित्व का पुनर्गठन करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है ताकि बैंक को बचाया जा सके और इसमें धन जमा करने वाले इसके ग्राहकों का हित सुरक्षित किया जाएगा. आरबीआई की योजना के मसौदे के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक यस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगा.

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