कोरोना वायरस महामारी के बाद एक और वैश्विक स्वास्थ्य संकट कर रहा है दुनिया का इंतजार

पोस्ट-कोविड सिंड्रोम स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है (सांकेतिक फोटो, AP)

पोस्ट-कोविड सिंड्रोम स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है (सांकेतिक फोटो, AP)

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव (union health secretary) राजेश भूषण कहते हैं, भारत अब पोस्ट-कोविड सिंड्रोम (Post-Covid Syndrome) की समस्याओं का पता नहीं लगा रहा है लेकिन अन्य देश पहले से ही एक उभरते स्वास्थ्य संकट (emerging health crisis) के लिए तैयारी कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 8:07 PM IST
  • Share this:

संतोष चौबे

नई दिल्ली. अभी तक कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) का कोई अंत नहीं नजर आ रहा है और दुनिया पहले से ही एक और स्वास्थ्य संकट (Health Crisis) की ओर बढ़ रही है: कोविड-19 के बाद के संकट. इसे "पोस्ट-कोविड सिंड्रोम" (Post-Covid Syndrome) कहा जाता हैं. शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक निकायों नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) और रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों (CDC) की ओर से पोस्ट-कोविड-19 (Covid-19) विश्लेषण में पाया है कि कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने वाले कई रोगियों को जीवन को संकट में डालने वाले लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है. दुनिया भर के अस्पतालों (Hospitals) में बच्चों में हृदय को होने वाले नुकसान, स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, फेफड़ों को नुकसान या फुफ्फुसीय फाइब्रोसिस (pulmonary fibrosis), लगातार रहने वाली थकान का सिंड्रोम और मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (multi-system inflammatory syndrome) जैसी घातक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव (union health secretary) राजेश भूषण कहते हैं, भारत अब पोस्ट-कोविड सिंड्रोम (Post-Covid Syndrome) की समस्याओं का पता नहीं लगा रहा है लेकिन अन्य देश पहले से ही एक उभरते स्वास्थ्य संकट के लिए तैयारी कर रहे हैं. वे वैज्ञानिक रूप से SARS-CoV-2 (जो आठ महीने पहले तक पूरी तरह से एक अज्ञात वायरस था) के बारे में और जानकारियां जुटाने के लिए पोस्ट-कोविड सिंड्रोम के मामलों (cases) की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं.

कोविड-19 से रिकवरी के बाद भी जीवन को संकट में डालने वाली स्वास्थ्य समस्याएं-
दिल से जुड़े- नमूनों के अध्ययन में पाया गया है कि 80% स्वस्थ हो जाने वाले लोग दिल की बीमारियों का सामना कर रहे हैं. कई को जीवन भर के लिए यह बीमारी हो जा रही, परिणामस्वरूप कई अंग विकलांगता भी हो सकती है.

स्थायी थकान से जुड़ा सिंड्रोम- शोध के अध्ययन में कहा गया है, 10% स्वस्थ हो चुके कोविड-19 मामलों में यह विकसित हो सकता है.

सांस लेने में की तकलीफ- रोगी को जीवन भर ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है.



बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम- कई बच्चों में इस गंभीर बीमारी के लक्षण देखे जा सकते हैं, कई अंगों में एक साथ जलन की शिकायत आती हैं.

यह भी पढ़ें: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

पैदा होने वाली समस्या ME हमारी ताकत को कम और शरीर को खराब करती है

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा पोस्ट किए गए एक शोध पत्र और अन्य स्वास्थ्य-विज्ञान संस्थाओं द्वारा प्रकाशित इसी तरह के पत्रों के अनुसार, कोविड सिंड्रोम के कारण रोगियों को तंत्रिका, प्रतिरक्षा और खाने को पचाने की प्रणाली की असामान्यताएं भी हो सकती हैं, जो सभी शरीर की लय को प्रभावित करते हैं. जैसे एक बीमारी जिसे क्रोनिक थकान सिंड्रोम (CFS)/ मायलजिक इंसेफेलाइटिस (ME) के रूप में जाना जाता है, वह ऐसा करती है, जिसे 70 साल पहले पहचाना गया था. एमई (ME) एक दीर्घकालिक प्रभाव वाली स्वास्थ्य समस्या है जो हमारी ताकत को कम और शरीर को खराब करती है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज