Home /News /nation /

'आप' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से योगेंद्र, प्रशांत की छुट्टी

'आप' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से योगेंद्र, प्रशांत की छुट्टी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) के दो संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव सहित चार वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है. ये चारों इधर कई हफ्तों से पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) के दो संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव सहित चार वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है. ये चारों इधर कई हफ्तों से पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) के दो संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव सहित चार वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है. ये चारों इधर कई हफ्तों से पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.

अधिक पढ़ें ...
  • Agencies
  • Last Updated :
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) के दो संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव सहित चार वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है. ये चारों इधर कई हफ्तों से पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.

    शनिवार को पश्चिमी दिल्ली के कापसहेड़ा में हुई पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में करीब 311 सदस्य मौजूद थे. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने योगेंद्र और प्रशांत को हटाने का प्रस्ताव पेश किया.

    बैठक में शामिल रहे एक सदस्य ने बताया कि केजरीवाल ने सदस्यों से कहा गया कि वे या तो उनका साथ दें या फिर योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के साथ रहें.

    'आप' के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता ने बताया कि 247 सदस्यों ने चारों सदस्यों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाने के पक्ष में वोट किया. सिर्फ आठ सदस्यों ने विरोध किया, जबकि 54 सदस्यों ने कोई राय जाहिर नहीं की. बैठक के दौरान विरोध में बोलने वाले एक सदस्य के साथ हाथापाई की बात भी सामने आई है.

    पार्टी के संस्थापक सदस्य प्रशांत व यादव ने अरविंद केजरीवाल को तानाशाह करार दिया और कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में फैसला अवैध तरीके से लिया गया. इसके खिलाफ वह अदालत जाएंगे.

    उधर, दोनों को बाहर निकालने के फैसले के बाद पार्टी की वरिष्ठ नेता मेधा पाटकर ने पार्टी की प्रतिक्रिया पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'आप की बैठक में जो कुछ हुआ, वह अनुचित है और मैं उसकी निंदा करती हूं.'

    मेधा ने कहा, 'बैठक के दौरान हिंसा और जो कुछ भी वहां हुआ, वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रति अशिष्टता दर्शाता है. इस कारण मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है.'

    बैठक के दौरान केजरीवाल मौजूद थे, लेकिन मतदान होने के पहले वह वहां से चले गए. पार्टी ने योगेंद्र के समर्थकों आनंद कुमार और अजीत झा को भी 21 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया है.

    बैठक के दौरान बाहर दोनों गुटों के समर्थक नारा लगा रहे थे और एक दूसरे के खिलाफ बैनर लिए हुए थे. योगेंद्र यादव ने बैठक स्थल के बाहर प्रदर्शन भी किया.

    राष्ट्रीय परिषद के एक सदस्य ने कहा कि कई लोगों ने बैठक के दौरान यादव व प्रशांत के पक्ष में नारे लगाए, जिन्हें बल प्रयोग कर बाहर निकाल दिया गया.

    उदास दिख रहे प्रशांत ने बाद में कहा, 'यह बात सही है कि हम अदालत या निर्वाचन आयोग का रुख कर सकते हैं या राष्ट्रीय परिषद की एक दूसरी बैठक बुलाने की मांग कर सकते हैं.'

    योगेंद्र ने बैठक से बाहर आने के बाद कहा, 'राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लोकतंत्र की हत्या हुई है. जो लोग केजरीवाल से असमत थे, उन्हें पीटा गया और उन्हें बैठक से निकाल दिया गया.'

    आप के एक नेता संजय सिंह ने बैठक के दौरान मारपीट होने की बात से इनकार किया. उन्होंने बैठक के बाद मीडिया से कहा, 'कोई हिंसा नहीं हुई. किसी को कोई चोट नहीं आई. सारी झूठी बातें हैं.'

    सर्वोच्च न्यायालय के वकील प्रशांत ने दावा किया, 'बैठक की पटकथा पहले से तैयार कर ली गई थी. जो कुछ हुआ, वह पूर्व नियोजित था. ऐसा लगता है कि सबकुछ पहले से लिखा गया था.'

    योगेंद्र और प्रशांत ने पांच मांगों- पार्टी के अंदर पारदर्शिता, पार्टी की स्थानीय इकाइयों को स्वायत्तता, भ्रष्टाचार की जांच के लिए लोकपाल, आप के अंदर आरटीआई के इस्तेमाल और मुख्य मामलों में गुप्त मतदान पर जोर दिया.

    दिल्ली में सरकार बनने के लगभग 15 दिनों बाद से ही योगेंद्र व प्रशांत मीडिया के सामने पार्टी के कामकाज में पारदर्शिता न होने और आंतरिक लोकतंत्र के अभाव की बात दोहराते रहे थे. हालांकि दोनों इस बात से इनकार करते रहे वे केजरीवाल को राष्ट्रीय संयोजक के पद पर नहीं देखना चाहते. कई हफ्तों बाद उन्होंने खुले तौर पर केजरीवाल की कार्यशैली पर उंगली उठानी शुरू कर दी.

    जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा, 'हम पार्टी नहीं छोड़ेंगे. हम पार्टी से बाहर नहीं हैं. हम न पार्टी छोड़ेंगे न तोड़ेंगे. यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है.'

    आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर