योगी की कट्टरता से ज्‍यादा उनकी इन खूबियों के कायल हैं दलित

आदित्य नाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने पटना के महावीर मंदिर में दलित संत सूर्यवंशी दास का अभिषेक कर पुजारी नियुक्त किया. इस पर विवाद भी हुआ लेकिन वे अड़े रहे. बनारस के डोम राजा के घर पर जाकर संतों के साथ खाना खाया. इसीलिए योगी आदित्‍यनाथ का भी दलितों के प्रति लगाव है.

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 20, 2017, 12:39 PM IST
योगी की कट्टरता से ज्‍यादा उनकी इन खूबियों के कायल हैं दलित
फोटो: गोरखनाथ मंदिर से
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 20, 2017, 12:39 PM IST
गोरखनाथ पीठ की परम्परा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक जनजागरण का अभियान चलाया. सहभोज के माध्यम से छुआछूत (अस्पृश्यता) की भेदभावकारी रूढ़ियों पर जमकर प्रहार किया.

इसलिए उनके साथ बड़ी संख्‍या में दलित भी जुड़े हुए हैं. गांव-गांव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएं’ मंत्र का उन्होंने उद्घोष किया.

योगी को बहुत नजदीक से जानने वाले गोरखपुर के पत्रकार टीपी शाही बताते हैं कि योगी आदित्‍यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने दक्षिण भारत के मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर संघर्ष किया.

ज‍ब योगी के गुरु ने नियुक्‍त कर दिया था एक दलित को पुजारी

जून 1993 में पटना के महावीर मंदिर में उन्‍होंने दलित संत सूर्यवंशी दास का अभिषेक कर पुजारी नियुक्‍त किया. इस पर विवाद भी हुआ लेकिन वे अड़े रहे. यही नहीं इसके बाद बनारस के डोम राजा ने उन्‍हें अपने घर खाने का चैलेंज दिया तो उन्‍होंने उनके घर पर जाकर संतों के साथ खाना खाया.

इसीलिए योगी आदित्‍यनाथ का भी दलितों के प्रति लगाव रहा है और वे उनके लिए काम करते रहे हैं.


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उग्र हिंदुत्‍व चेहरे के तौर पर पहचाने जाने वाले योगी आदित्‍यनाथ के बारे में इस बात को शायद आप नहीं जानते होंगे? न्‍यूज18इंडिया.कॉम ने उनकी कई खूबियों को खोज निकाला.

सन् 1994 की फरवरी में नाथपंथ के विश्व प्रसिद्धमठ गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर में महंत अवेद्यनाथ ने अपने उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ का दीक्षाभिषेक किया.

उनका जन्म उत्तराखण्ड में 5 जून सन् 1972 को हुआ. करीब 22 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन त्यागकर उन्‍होंने संन्यास ग्रहण कर लिया. विज्ञान वर्ग से स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की हुई है.



शाही कहते हैं कि योगी पूर्वांचल के सबसे बड़े हितैषी नेता और धर्मगुरु हैं.

वह जहां एक तरफ हिंदू धर्म-संस्कृति के रक्षक के रूप में दिखते हैं तो दूसरी तरफ वे जनसमस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करते रहते है.

पूर्वांचल में सड़क, बिजली, पानी, खेती आवास, दवाई और पढ़ाई आदि की समस्याओं से प्रतिदिन जूझती जनता के दर्द को योगी सड़क से संसद तक संघर्ष का स्वर प्रदान करते रहे हैं.

इसलिए लगातार पांच बार से हैं सांसद

योगी ने वर्ष 1998 में लोकसभा चुनाव लड़ा और मात्र 26 वर्ष की आयु में भारतीय संसद के सबसे युवा सांसद बने. जनता के बीच उनकी उपस्थिति अन्‍य सांसदों से अधिक रहती है. हिन्दुत्व और विकास के कार्यक्रमों के कारण गोरखपुर संसदीय क्षेत्र की जनता ने उन्‍हें वर्ष 1999, 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में लोकसभा का सदस्य बनाया.



योगी आदित्‍यनाथ ने ये किताबें लिखीं

‘यौगिक षटकर्म’, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना’, ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ नामक पुस्तकें लिखीं हैं. गोरखनाथ मन्दिर से प्रकाशित होने वाली वार्षिक पुस्तक ‘योगवाणी’ के वे प्रधान संपादक हैं.

योगी ने गोरखपुर की छवि बदलने की कोशिश की

अस्सी के दशक में गोरखपुर गुटीय संघर्ष एवं अपराधियों की शरणगाह बन गया था. अपराधियों के विरुद्ध आम जनता एवं व्यापारियों के साथ खड़ा होने के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मनोबल टूटे हैं.



इन शैक्षणिक संस्‍थाओं से दे रहे योगदान

योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा इस समय तीन दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएं गोरखपुर एवं महाराजगंज जिले में चल रही हैं. कुष्ठरोगियों एवं वनटांगियों के बच्चों की निशुल्क शिक्षा से लेकर बीएड एवं पालिटेक्निक जैसे रोजगारपरक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी दी जा रही है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय भी काम कर रहा है. इस तरह कुल 42 शैक्षणिक संस्थाएं हैं जो योगी के देखरेख में हैं.
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