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'लव जिहाद' अध्‍यादेश पर मोहसिन रज़ा का बड़ा बयान, बोले- यह जनहित का कानून, बेटियों को मिलेगी सुरक्षा

'लव जिहाद' कानून से हमारी बच्चियों की जिंदगी सुरक्षित होगी:  मोहसिन रज़ा
'लव जिहाद' कानून से हमारी बच्चियों की जिंदगी सुरक्षित होगी: मोहसिन रज़ा

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रज़ा (Mohsin Raza) ने योगी सरकार (Yogi Government) के लव जिहाद (Love Jihad) की घटनाओं को रोकने के लिए लाए गए अध्यादेश को जनहित का कानून करार दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 10:21 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में तथाकथित 'लव जिहाद' की घटनाओं को रोकने के लिए एक अध्यादेश (Love Jihad Ordinance) को मंजूरी दे दी. इसके तहत विवाह के लिए छल, कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है. इस अध्यादेश को उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रज़ा (Mohsin Raza) ने जनहित का कानून करार दिया है.

मोहसिन रज़ा ने कही ये बात
न्‍यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रज़ा ने लव जिहाद पर अध्यादेश पर पर कहा,' योगी सरकार ने पहले ही कहा था कि अगर जरूरत होगी तो अध्यादेश लाया जाएगा और हमें जरूरत लगी. जिस तरह से धर्म परिवर्तन को लेकर घटनाएं बढ़ रही थी. बच्चियों को धर्मांतरण कराया जा रहा था.' इसके साथ उन्‍होंने कहा कि कोई अपना नाम सुरेश, कोई दिनेश, कोई रमेश बताकर बच्चियों को जबरदस्ती बहलाते फुसलाते थे. जब पकड़े जा रहे थे तो कोई मुख्तार, कोई अंसार, कोई रईस निकल रहा था...यह जनहित का कानून है, इससे हमारी बच्चियों की जिंदगी सुरक्षित होंगी.

लव जिहाद पर मिलेगी ये सजा
राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020' को मंजूरी दे दी गई. उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा जो छल, कपट, प्रलोभन, बलपूर्वक या गलत तरीके से प्रभाव डालकर विवाह या किसी कपट रीति से एक धर्म से दूसरे धर्म में लाने के लिए किया जा रहा हो. उन्होंने बताया कि इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है. उन्होंने बताया के अध्यादेश का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल कैद तथा 15,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है.



जबकि नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के मामले में यह सजा तीन साल से 10 वर्ष तक की कैद और 25,000 रुपये जुर्माने की होगी. इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में अधिकतम 10 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है. वहीं, अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के इच्छुक लोगों को जिला अधिकारी के सामने एक निर्धारित प्रोफार्मा पर दो महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी और इजाजत मिलने पर वे धर्म परिवर्तन कर सकेंगे. इसका उल्लंघन करने पर छह महीने से तीन साल तक की कैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा तय की गई है.
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