Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में आप भी हो सकते हैं शामिल, पूरी करनी होंगी ये शर्तें

Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में आप भी हो सकते हैं शामिल, पूरी करनी होंगी ये शर्तें
भारत बायोटेक और जायडस कैडिला के पहले और फेज के लिए ट्रायल देश के अलग-अलग एम्स में चल रहे हैं. (फोटो-AP)

Corona Vaccine: दुनिया के कई देशों में इस वक्त 160 से ज्यादा वैक्सीन पर काम चल रहा है. इसमें से करीब 30 वैक्सीन ऐसे हैं, जिनके क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) चल रहे है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 8:04 AM IST
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नई दिल्ली. इन दिनों दुनिया भर में हर किसी की निगाहें कोरोना की वैक्सीन (Corona Vaccine) पर टिकी है. वैक्सीन कब आएगी, कितने लोगों की मिलेगी और सरकार सबसे पहले किन लोगों को वैक्सीन का डोज देगी? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब हर कोई इन दिनों तलाश रहा है. दुनिया के कई देशों में इस वक्त 160 से ज्यादा वैक्सीन पर काम चल रहा है. इसमें से करीब 30 वैक्सीन ऐसे हैं जिनके क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) चल रहे हैं. यानी इंसानों पर इन वैक्सीन का टेस्ट किया जा रहा है कि आखिर ये कितने कारगर हैं. जाहिर है आपके मन में भी सवाल उठ रहे होंगे कि क्या आप भी इन ट्रायल का हिस्सा बन सकते हैं. यानी क्या आप पर भी वैक्सीन का टेस्ट किया जा सकता है. इसका सीधा सा जवाब है हां- लेकिन आखिर कैसे? आईए हम आपको समझाते हैं...

भारत में 3 वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल
पीएम मोदी ने पिछले दिनों 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से ऐलान किया था कि देश में इन दिनों तीन वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं और जल्दी ही इसमें कामयाबी मिलेगी. बता दें कि देश में इन दिनों जिन वैक्सीन के क्लीनकल ट्रायल किए जा रहे हैं वो हैं- भारत बायोटेक, जायडस कैडिला और ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एस्‍ट्राजेनेका. भारत बायोटेक और जायडस कैडिला के पहले और फेज के लिए ट्रायल देश के अलग-अलग एम्स में चल रहे हैं. जबकि ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल चल रहा है. पहले और दूसरे फेज का ट्रायल करीब एक हजार लोगों पर किया जाता है. जबकि तीसरे फेज में ट्रायल के लिए 2500-3000 लोगों को शामिल किया जाता है.

ट्रायल में शामिल होने के लिए नियम और शर्तें
1. विज्ञापन: क्लीनकल ट्रायल में लोगों को शामिल करने के लिए आमतौर पर अखबारों और टीवी चैनल पर विज्ञापन दिए जाते हैं. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए दिल्ली एम्स के प्रोफेसर डॉक्टर संजय राय ने बताया कि जैसे ही हमने 100 वॉलंटियर्स के लिए विज्ञापन दिया, व्हाट्स एप मैसेज और मेल्स की बाढ़ आ गई. हर कोई इसमें शामिल होना चाहता था, लेकिन पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर लोगों को शामिल किया जाता है.



2.फिट होना जरूरी: कोरोना वैक्सीन के क्लीनकल ट्रायल के लिए किसी भी इंसान का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है. इसको लेकर कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं.

3.उम्र: 18 से 55 साल की उम्र के लोगों को ही ट्रायल में शामिल किया जाता है.

4. ये बीमारियां तो नहीं: हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज़ इस ट्रायल में शामिल नहीं हो सकते हैं.

5.कोरोना टेस्ट: ट्रायल में शामिल होने वाले लोगों का कोरोना टेस्ट किया जाता है. एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए RT-PCR दोनों तरह के टेस्ट किए जाते हैं. टेस्ट निगेटिव आने पर ही उसे दूसरे टेस्ट के लिए कहा जाता है.

6. और भी कई टेस्ट: ब्लड शुगर टेस्ट, लीवर और किडनी टेस्ट, इसके अलावा हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी और एचआईवी के टेस्ट किए जाते हैं. सारे टेस्ट ठीक आने पर ही आगे मौका मिलता है.

7.वैक्सीन देने के बाद: ट्रायल के दौरान वॉलंटियर्स को वैक्सीन की डोज देने के बाद हर हफ्ते या 10-15 दिनों पर चेक करने के लिए बुलाया जाता है. ये पता लगाता जाता है कि क्या उसे कोई परेशानी तो नहीं हो रही है. इस दौरान लगातार टेस्ट किए जाते हैं.

8. क्या इसके लिए कोई पैसा भी मिलता है: बता दें कि क्लीनिकल ट्रायल के दौरान किसी भी वॉलंटियर को कोई पैसा नहीं दिया जाता है. लेकिन अगर किसी को कोई दिक्कत हुई तो ऐसे हालत में उन्हें सिर्फ मुआवजा या फिर इलाज का खर्चा दिया जाता है.
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