युवा आबादी या रिकॉर्ड? आखिरकार क्या है भारत में कोरोना डेथ रेट में कमी का कारण

अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्यु काफी कम है.
अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्यु काफी कम है.

INDIA CORONAVIRUS DEATH TOLL: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी टैली के अनुसार, दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देशों में प्रति 100 कंफर्म मामलों में सबसे कम मौतों की संख्या, 1.5 प्रतिशत पर सबसे खराब 20 से प्रभावित देशों में सबसे कम है. इसकी तुलना में, सबसे संक्रमित देश संयुक्त राज्य अमेरिका में मृत्यु दर 2.8 प्रतिशत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 1:54 PM IST
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नई दिल्ली. भारत कोरोना वायरस (Coronavirus) से प्रभावित दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. 1.3 बिलियन आबादी वाले देश में कोरोना के 7 मिलियन से ज्यादा मामले दर्ज किए जा हैं. दुनिया में अमेरिका (Coronavirus in US) के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा टेस्ट करने वाला देश है, हालांकि भारत की आबादी को देखते हुए प्रति 10 लाख टेस्ट के हिसाब से टेस्ट की संख्या अभी भी बहुत कम है. इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि बाकि देशों की तुलना में भारत में कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा (INDIA CORONAVIRUS DEATH TOLL) काफी कम है.

आंकड़ों ने विशेषज्ञों को चकित कर दिया है, जिसमें युवा आबादी से लेकर अन्य एंडीमिक वायरल बीमारियों और अंडर-रिपोर्टिंग तक की प्रतिरक्षा के स्पष्टीकरण हैं.

क्या कहता हैं आंकड़ें?
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कोरोना वायरस से 1,08,334 लोगों की जान गई है. भारत में डेथ रेट 1.53 प्रतिशत है.
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी टैली के अनुसार, दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देशों में प्रति 100 कंफर्म मामलों में सबसे कम मौतों की संख्या, 1.5 प्रतिशत पर सबसे खराब 20 से प्रभावित देशों में सबसे कम है. इसकी तुलना में, सबसे संक्रमित देश अमेरिका में मृत्यु दर 2.8 प्रतिशत है. संयुक्त राज्य अमेरिका में 64.74 की तुलना में प्रति 100,000 जनसंख्या पर भारत की मृत्यु की संख्या 7.73 है.





भारत की युवा आबादी
संयुक्त राष्ट्र की विश्व जनसंख्या संभावना रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम जैसी स्थितियों का सामना कर रहे लोग महामारी की चपेट में जल्दी आ रहे हैं, लेकिन भारत में युवा आबादी 28.4 औसत आयु है इसलिए यहां पर मरीजों की संख्या कम है. इसकी तुलना में फ्रांस जहां 700,000 कोरोना के केस दर्ज किए गए हैं वहां पर मृत्यु दर 4.7 प्रतिशत है. फ्रांस की औसत आयु 42.3 है. ऐसा माना जा रहा है कि वृद्धों की संख्या ज्यादा होने के कारण फ्रांस में मौतों का आंकड़ा ज्यादा है.

भारत में देरी से फैली बीमारी
भारत सरकार के मुताबिक यहां पहला कोरोना वायरस का केस 30 जनवरी को आया था. देश में मध्य मार्च तक कोरोना के महज 100 मामले थे. हालांकि उसी समय ये महामारी पूरे यूरोप में फैल चुकी थी. मध्य मार्च तक इटली में 24,000 से अधिक संक्रमण और लगभग 2,000 मौतें हुईं, जबकि फ्रांस में लगभग 5,500 मामले और लगभग 150 मौतें दर्ज की गई.

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन का आदेश जारी कर दिया. इसने भारत को महामारी की तैयारी के लिए समय दिया, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉकडाउन ने डॉक्टरों को अन्य देशों के अनुभवों से सीखने में मदद मिली है. नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सामुदायिक चिकित्सा प्रोफेसर आनंद कृष्णन ने एएफपी को बताया, "कई उपचार प्रोटोकॉल बेहतर थे (उस समय तक), चाहे वह ऑक्सीजन का उपयोग हो या आईसीयू का इस महामारी के दौरान कैसे उपयोग होना है इसकी जानकारी हो."

एंटीबॉडी संरक्षण
वायरोलॉजिस्ट टी. जैकब जॉन और अन्य विशेषज्ञों ने एएफपी को बताया कि यह संभव है कि डेंगू बुखार जैसे अन्य वायरल रोग जो भारत में आम हैं उनके जरिए लोगों को कोरोना वायरस के खिलाफ कुछ एंटीबॉडी संरक्षण दिया हो. वहीं, कुछ का कहना है कि यह भी प्रशंसनीय है कि अन्य माइल्ड कोरोना वायरस के संपर्क में कुछ क्रॉस-इम्युनिटी हो सकती है.

पर्याप्त आंकड़ें दर्ज न होना
भारत में पहले भी रोजाना कितने लोगों की मौत हो रही है इसका पर्याप्त आंकड़ा नहीं है. यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा है, जहां पर 70 प्रतिशत आबादी आज भी रहती है. ग्रामीण इलाकों में जब तक मरीज को अस्पताल नहीं लाया जाता है तब तक उसकी मृत्यु का आंकड़ा दर्ज नहीं किया जाता है. कोरोना वायरस के दौरान यह देखा गया है कि कई शहरों में कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों के आंकड़ें, सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं.
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