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राजशेखर रेड्डी की बेटी शर्मिला तेलंगाना की राजनीति में आजमाएंगी हाथ, क्‍या CM चंद्रशेखर को दे पाएंगी टक्‍कर?

जगन मोहन की बहन शर्मिला तेलंगाना की राजनीति में आजमाएंगी हाथ

जगन मोहन की बहन शर्मिला तेलंगाना की राजनीति में आजमाएंगी हाथ

Telangana Politics: शर्मिला ने पार्टी के नाम की घोषणा भले ही न की हो, लेकिन लोगों से मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है. खासतौर पर वह विद्यार्थियों और युवाओं से मुलाकात को तरजीह दे रही हैं.

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तेलंगाना राज्य में इन दिनों वाईएस शर्मिला की चर्चा काफी हो रही है. शर्मिला का नाम देश के तमाम राज्यों के लोग भले ही न जानते हों, लेकिन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की जनता उन्हें बखूबी जानती है. शर्मिला संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वाईएस राजशेखर रेड्डी की पुत्री और आंध्र प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की बहन हैं. शर्मिला के चर्चा में आने का प्रमुख कारण उनका सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा है. इससे भी बड़ी बात यह है कि शर्मिला ने अपने कार्यक्षेत्र को आंध्र प्रदेश न चुनकर तेलंगाना को चुना है. इसी के चलते इन दिनों वह स्थानीय मीडिया की सुर्खियों में छायी हुई हैं. हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी के नाम की घोषणा अभी नहीं की है. माना जा रहा है कि वह 9 अप्रैल को अपनी पार्टी के नाम की घोषणा कर सकती हैं. शर्मिला का कहना है, 'आंध्र प्रदेश में मेरे भाई वाईएस जगन मोहन रेड्डी अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिए मैं तेलंगाना की जनता की सेवा करने के लिए हैदराबाद में ही रहकर राजनीति करूंगी.' उन्होंने आगामी चुनावों में हाथ आजमाने की घोषणा भी कर दी है.

शर्मिला ने पार्टी के नाम की घोषणा भले ही न की हो, लेकिन लोगों से मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है. खासतौर पर वह विद्यार्थियों और युवाओं से मुलाकात को तरजीह दे रही हैं. इनके अलावा वह अपने पिता स्वर्गीय वाईएस राजशेखर रेड्डी के शुभचिन्तकों और उनके साथ काम कर चुके नेताओं से भी मुलाकात कर रही हैं. वह जिलेवार लोगों से मुलाकात कर अपनी आगामी रणनीति तय कर रही हैं.

मूलत: आंध्र प्रदेश का है वाईएस परिवार, तेलंगाना में है शर्मिला की ससुराल
वहीं दूसरी ओर अभी से ही इनका विरोध शुरू हो चुका है. इनका विरोध करने वाले नेता इन्हें बाहरी कह रहे हैं. इसका प्रमुख कारण यह है कि वाईएस परिवार मूलत: आंध्र प्रदेश के कडपा जिले का रहने वाला है. आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद शर्मिला के भाई वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश को ही अपना कार्यक्षेत्र बनाया. विभाजन के बाद जगन मोहन रेड्डी ने कभी तेलंगाना में राजनीति नहीं की.
हालांकि जगन मोहन रेड्डी के संबंध तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ काफी अच्छे हैं. यही कारण है कि शर्मिला का तेलंगाना की राजनीति में उतरने की बात लोगों के समझ नहीं आ रही है. वहीं शर्मिला का कहना है कि मेरा जन्म तेलंगाना की धरती पर हुआ और शुरू से यहीं रह रही हूं. इसके अलावा उनका कहना है कि मेरे सास-ससुर भी तेलंगाना के ही रहने वाले हैं, इस हिसाब से मैं बाहरी व्यक्ति कहां से हो गयी. विरोधी तो विरोध करने के लिए कुछ न कुछ कहेंगे ही, लेकिन हकीकत यह है कि शर्मिला एक अच्छी वक्ता हैं और उन्होंने राजनीति और प्रशासनिक कार्यों को काफी नजदीक से देखा है. उनके पिता की मौत के बाद उन्होंने पद यात्रा भी की थी. कहने का तात्पर्य यह है कि शर्मिला के लिए राजनीति नई नहीं है. भाई की ही तरह शर्मिला भी राजनीति में अपने पिता के पद चिह्नों पर चलने की बात कह रही हैं.



शुरू हो गई वाईएस शर्मिला की मुखालफत
वाईएस राजशेखर रेड्डी की गिनती उस समय के बड़े कांग्रेसी नेताओं में हुआ करती थी. दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भी उनकी पकड़ अच्छी थी. नेताओं के बयानों से अलग राजनीतिक विश्‍लेषकों का मानना है कि शर्मिला की नई पार्टी तेलंगाना में वोट कटुआ पार्टी ही साबित होगी. हालांकि उनकी दलील यह भी है कि शर्मिला युवाओं और रेड्डी समुदाय को अपनी पार्टी में समुचित स्थान देकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सकती हैं. विश्‍लेषकों की दलील सही भी लगती है क्योंकि शर्मिला से मुलाकात करने वालों में युवाओं की ही संख्या अधिक है. वहीं तेलंगाना में रेड्डी समुदाय का काफी वर्चस्व है. इनके अलावा तेलंगाना में वाईएस राजशेखर रेड्डी के चाहने वाले अभी भी कुछ लोग हैं, जो कि शर्मिला के संपर्क में हैं.

तेलंगाना की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले विश्‍लेषकों का यह भी कहना है कि कुछ नेतागण शर्मिला की पार्टी को लेकर अभी कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसे नेताओं को लगता है कि शर्मिला यहां शायद ही सफल हो पाएं. इसका कारण यह है कि आज के दौर में यहां सत्ताधारी पार्टी टीआरएस का ही बोलबाला है. हालांकि कुछ महीनों से भारतीय जनता पार्टी ने यहां मजबूती के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवायी है. ग्रेटर हैदराबाद मुनिस्पल कार्पोरेशन चुनाव परिणाम इसका उदाहरण है.

राजनीति की समझ रखने वाले लोग शर्मिला की तेलंगाना में सक्रियता को अपने-अपने तरीके से परिभाषित कर रहे हैं. तेलंगाना में सक्रिय राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से आने वाली नई पार्टी का आकलन कर रही है. वहीं जनता खासतौर से युवा हमेशा की ही तरह नई पार्टी को आशा भरी निगाहों से देख रहा है. उसे लगता है कि नई पार्टी और उसके नेता ही उनकी समस्याओं का हल निकालेंगे.

इसलिए अभी यह कहना मुश्किल होगा कि शर्मिला की नई पार्टी क्या वास्तव में जनता की सेवा करेगी अथवा किसी राजनीतिक चाल के तहत यहां अपनी भूमिका निभाएगी.
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