कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाला जोजिला पास खुला, सेना के लिए है महत्‍वपूर्ण

जोजिला पास को खोल दिया गया है. (Pic- News18)

जोजिला पास को खोल दिया गया है. (Pic- News18)

Zoji La Pass: इस बार ये मार्ग समय से 40 दिन पहले ही खोल दिया गया यानी इस सीजन में ये सडक 110 दिन ही बंद रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 3:49 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के प्रकोप ने कामकाज को बाधित किया है. लेकिन सेना के काम को बाधित कर पाने की हिम्‍मत कोरोना के पास भी नहीं है. सेना लगातार अपने काम में जुटी हुई है. इसी के तहत सामरिक तौर पर सबसे महत्वपूर्ण जोजिला पास (Zoji la pass) को बुधवार को सीमा सड़क संगठन (BRO) ने यातायात के लिए खोल दिया है. 21 अप्रैल को जोजिला पास से होकर जाने वाले श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग को शुरू कर दिया है.

समुद्र तल से 11650 फीट की उंचाई पर मौजूद ये जोजिला पास भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. हालांकि भारत और चीन के बीच जारी तनाव के चलते इस पास को हमेशा खुले रखने की कोशिशें पूरी सर्दियां जारी रहीं. हर साल ज़बरदस्त बर्फबारी और तापमान शून्य से नीचे चले जाने के चलते इस पास को नवंबर के दूसरे हफ्ते से अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक बंद कर दिया जाता है. कुल मिलाकर साल के 365 दिन में से 150 दिन ये पास बंद रहता है और ऐसे में श्रीनगर से लद्दाख संपर्क सडक मार्ग से पूरी तरह से कट जाता है. लेकिन इस बार ये मार्ग समय से 40 दिन पहले ही खोल दिया गया यानी इस सीजन में ये सडक 110 दिन ही बंद रहा.

इसे बार्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के प्रोजेक्ट बिकन और विजयक के तहत इस बार 31 दिसंबर 2020 तक खुला रखा गया और 7 फरवरी 2021 में बर्फ हटाकर सड़क खोलने काम शुरू किया गया था. 15 फरवरी को बर्फ को हटाकर इस रूट पर कनेक्टिविटी को बना दिया गया था. सेना और आम लोगों के यातायात के लिए इसे फरवरी के अंत या मार्च महीने की शुरुआत में ही खोला जाना था लेकिन अचानक ख़राब मौसम और हिमस्‍खलन के खतरे को देखते हुए 21 अप्रैल बुधवार को इसे आधिकारिक तौर पर यातायात के लिए खोल दिया गया.

पहले दिन 10 सिविल ट्रक जरूरत का सामान लेकर श्रीनगर से कारगिल के लिए इस रूट से भेजे गए. इस मौके पर बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने कहा कि रामनवमी के मौके और पवित्र रमजान के महीने में ये पास खोलना लद्दाख के निवासियों के लिए एक तोहफा है. इसके जरिए जरूरी सामान को अब आसानी से पहुंचाया जा सकेगा. साथ ही इस पास के बंद होने के चलते जिन यात्रियों या सेना के मूवमेंट, जिन्हें पहले सडक मार्ग के बजाय हवाई जहाज का इस्तेमाल करना पड़ता था, वो भी सुचारू रूप से बहाल हो जाएगा.


बहरहाल बीआरओ लगातार कोरोना के बीच भी देश के सभी सामावर्ती इलाकों में सडकों के जाल को बिछाने में साल भर जुटा रहता है. सेना के ऑपरेशन और सीमावर्ती गांवों के लोगों के जीवन दोनों को बेहतर बनाया जा सके, इस लक्ष्य के साथ बीआरओ लगातार जुटा हुआ है.
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