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ZyCoV-D ने बढ़ाई उम्मीद, अब डेंगू के खिलाफ भी हो रही DNA वैक्सीन बनाने की तैयारी

डेंगू के खिलाफ वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं वैज्ञानिक. (सांकेतिक तस्वीर)

डेंगू के खिलाफ वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं वैज्ञानिक. (सांकेतिक तस्वीर)

Vaccine Against Dengue: भारत में डेंगू के खिलाफ यह दूसरा वैक्सीन उम्मीदवार है. एक अन्य वैक्सीन को इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी (ICGEB) की तरफ से तैयार किया जा रहा है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) के खिलाफ मंजूरी हासिल करने वाली पहली DNA वैक्सीन जायडस कैडिला की ZyCoV-D ने वैज्ञानिकों को नई उम्मीद दी है. कोरोना के बाद अब डेंगू के खिलाफ जंग में भी DNA वैक्सीन का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल डेंगू जैसी अन्य बीमारियों के लिए भी किया जा सकता है. माना जाता है कि DNA वैक्सीन को बनाना और स्टोर करना आसान है. साथ ही इसमें बड़े स्तर पर जानकारी मौजूद होती है. विश्व स्तर पर देखें, तो डेंगू के खिलाफ पांच वैक्सीन पर काम जारी है. भारत में एक बार वैक्सीन तैयार होने के बाद यह अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी मददगार होगी.

    हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, तिरुवनंतपुरम स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर ईश्वरन श्रीकुमार ने बताया, ‘हम जानते हैं कि वायरस के चार सीरोटाइप्स होते हैं, लेकिन हमने पाया कि सीरोटाइप्स में जैनेटिक वेरिएशन्स थे. किसी भी सीक्वेंस में 6 फीसदी से ज्यादा अंतर होने पर उसे अलग जीनोटाइप माना जाता है. ऐसे में टीम ने एक कॉन्सेन्सुअस सीक्वेंस तैयार किया, जो सभी जीनोटाइप्स में समान था.’

    डीएनए वैक्सीन प्लेटफॉर्म के जरिए जैनेटिक मटेरियल के टुकड़े हासिल किए गए, जिनका इस्तेमाल वैक्सीन तैयार करने में किया जा सकता था. साथ ही शोधकर्ताओं ने डेंगू के मामलों का सामना कर रहे देश के चार हिस्सो से वायरस सीक्वेंसिंग की मदद ली. डेंगू फैलाने वाला वायरस चार प्रकार का होता है, जिसके चार अलग-अलग वायरल एंटीजन्स होते हैं. शोधकर्ताओं ने वायरस के सभी सीरोटाइप्स में से EDIII नाम का एक हिस्सा चुना, जिसे सबसे जरूरी वायरल प्रोटीन माना जाता है.

    इसके साथ ही जानकारों ने DENV2 सीरोटाइप से NS1 प्रोटीन चुना. यह प्रोटीन डेंगू के गंभीर मामलों के कारण के तौर पर जाना जाता है, जिसमें आंतरिक रूप से खून बहना और ब्लड प्रेशर में कमी आना शामिल है. बेंगलुरु स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में प्रोजेक्ट लीड और साइंटिस्ट डॉक्टर अंकुर शंकरदास ने कहा, ‘पारंपरिक टीकों में पूरे एन्वलप प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है, जो एंटीबॉडी डिपेंडेंट एन्हेंसमेंट का कारण बन सकता है.’

    उन्होंने कहा, ‘हमने ADE बचने के लिए सभी सीरोटाइप्स के एनवलप प्रोटीन के केवल डोमेन 3 का इस्तेमाल किया. और हमने DENV2 से NS1 शामिल किया, जिसे दोनो टी सेल और बी सेल प्रतिक्रिया के लिए जाना जाता है.’ उनका कहना है कि संभावना है कि यह वायरस के सभी चारों सीरोटाइप्स के खिलाफ बगैर ADE के प्रभावकारी इम्यून प्रतिक्रिया दे सकता है.

    भारत में डेंगू के खिलाफ यह दूसरा वैक्सीन उम्मीदवार है. एक अन्य वैक्सीन को इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी (ICGEB) की तरफ से तैयार किया जा रहा है. शंकरदास ने कहा, ‘अब तक DNA वैक्सीन अच्छी इम्यून प्रतिक्रिया तैयार करने में सफल नहीं हुई थी, लेकिन ZyCoV-D के साथ हमारे पास असरदार DNA वैक्सीन है.’ उन्होंने कहा, ‘यह निर्माण में आने वाले खर्च को कम करती है. एक साल तक रूम टेम्प्रेचर और 4 डिग्री पर हमेशा बनी रहती है.’

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