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ZyCoV-D वैक्सीन के उत्पादन के लिए कैडिला हेल्थकेयर का शिल्पा मेडिकेयर के साथ समझौता

कैडिला हेल्थकेयर ने वैक्‍सीन को लेकर समझौता किया है.  (प्रतीकात्‍मक फोटो)

कैडिला हेल्थकेयर ने वैक्‍सीन को लेकर समझौता किया है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

दवा कंपनी कैडिला हेल्थकेयर (Cadila Healthcare) ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपनी कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 vaccine) जायकोव-डी (ZyCoV-D) के उत्पादन के लिए शिल्पा मेडिकेयर (Shilpa Medicare) के साथ एक समझौता कर लिया है. खबरों के मुताबिक अक्‍टूबर अंत तक यह वैक्‍सीन बाजार में उपलब्‍ध हो सकेगा और 12 साल आयु के बच्‍चों को दिया जाएगा.

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    नई दिल्ली. दवा कंपनी कैडिला हेल्थकेयर (Cadila Healthcare) ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपनी कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 vaccine) जायकोव-डी ( ZyCoV-D) के उत्पादन के लिए शिल्पा मेडिकेयर (Shilpa Medicare) के साथ एक समझौता कर लिया है. खबरों के मुताबिक अक्‍टूबर अंत तक यह वैक्‍सीन बाजार में उपलब्‍ध हो सकेगा और 12 साल आयु के बच्‍चों को दिया जाएगा. यह एक पैच होगा, जिसे बांह पर चिपका दिया जाएगा. कैडिला हेल्थकेयर ने शेयर बाजार को बताया है कि कंपनी ने जायकोव-डी वैक्सीन के उत्पादन एवं आपूर्ति के लिए शिल्पा मेडिकेयर के साथ, उसकी पूर्व स्वामित्व वाली इकाई शिल्पा बायोलॉजिकल्स के जरिए एक बाध्यकारी समझौता किया है.

    कैडिला हेल्थकेयर ने कहा कि वह जायकोव-डी की तकनीक शिल्पा बायोलॉजिकल प्राइवेट लिमिटेड (एसबीपीएल) को हस्तांतरित करेगी. जानकारी में बताया गया है कि समझौते के तहत एसबीपीएल वैक्सीन के लिए दवा तत्व के निर्माण के लिए जिम्मेदार होगी, जबकि कंपनी पैकेजिंग, वितरण और विपणन के लिए जिम्मेदार होगी. देश में कोरोना (Corona) महामारी अभी भी पूरी तरह से समाप्‍त नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि इस वायरस को पूरी तरह से समाप्‍त करना है तो इसका एकमात्र उपाय वैक्‍सीन ही है. वैक्‍सीन (Vaccine) ही एकमात्र विकल्‍प है जो हमें इस जानलेवा बीमारी से बचा सकती है.

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    जायकोव-डी मानव उपयोग के लिए दुनिया की पहली डीएनए प्लास्मिड वैक्सीन है, जिसे भारतीय फार्मास्‍युटिकल कंपनी जायडस कैडिला ने कोविड-19 वायरस के खिलाफ देश में विकसित किया है. भारतीय दवा नियामक ने 20 अगस्त को इस वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी थी. एनडीटीवी की खबर के अनुसार, भारतीय फार्मा प्रमुख जायडस कैडिला द्वारा विकसित डीएनए कोविड वैक्सीन जायकोव -डी दुनिया की पहली ऐसी वैक्सीन है. आमतौर पर टीका लेने वालों में इम्‍यूनिटी बूस्‍ट करने के लिए कोविड-19 वायरस के आनुवंशिक कोड का इस्तेमाल किया जाता है.

    फाइजर और मॉडर्ना जैसे अन्य टीके mRNA तकनीक पर आधारित हैं, जबकि कोविशील्ड वायरल वेक्टर तकनीक से तैयार वैक्सीन है. बता दें कि यह देश में उपलब्‍ध होने वाली चौथी और अप्रूवल पाने वाली छठी वैक्‍सीन है. बताया जा रहा है कि अक्‍टूबर में जायकोव-डी वैक्‍सीन 12 साल और उससे ज्‍यादा उम्र के बच्‍चों के लिए उपलब्‍ध हो जाएगी.

    1.निडिल फ्री वैक्‍सीन
    आपको बता दें कि जायकोव-डी वैक्‍सीन नीडिल फ्री वैक्‍सीन है यानी कि इसे लगाने के लिए इंजेक्‍शन का प्रयोग नहीं किया जाएगा. जेट इंजेक्‍टर तरीके से इसे लगाया जाएगा जो अमेरिका में पॉपुलर है.

    2. पैच की तरह किया जाएगा प्रयोग
    एनडीटीवी के मुताबिक, इसे एक पैच के रूप में बांह पर मशीन की मदद से चिपकाया जाएगा और यह कुछ घंटों तक हैंडीप्‍लास्‍ट तक हमारी स्किन पर चिपकी रहेगी. यह वैक्‍सीन कंप्रेस्‍ड गैस और स्प्रिंग जैसी मशीन के प्रयोग से किया जाएगा. जिस वजह से यह दर्द रहित रहेगा.

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