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एक ऐसा कोरोना टीका जिसके लगने पर नहीं निकलेगा खून... जल्द ही आएगी पहली डीएनए वैक्सीन

एक ऐसा कोरोना टीका जिसके लगने पर नहीं निकलेगा खून... जल्द ही आएगी पहली डीएनए वैक्सीन

ZyCoV-D के असर की दर दूसरी न्यक्लिक एसिड वैक्सीन की तुलना में काफी कम है.

ZyCoV-D के असर की दर दूसरी न्यक्लिक एसिड वैक्सीन की तुलना में काफी कम है.

Zydus Cadila ZyCoV D DNA Vaccine: इस तरह की वैक्सीन में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता है क्योंकि इसमें वायरस का कोई जीवित हिस्सा इस्तेमाल नहीं होता है.

    नई दिल्ली. कोविड-19 के खिलाफ लगने वाली पहली डीएनए वैक्सीन जल्दी ही भारत में लॉन्च होने वाली है. तीन डोज वाली ZyCoV-D वैक्सीन को अहमदाबाद की जायडस कैडिला में विकसित किया गया है. इस वैक्सीन में एक खूबी और है, इसे लगाने के लिए सुई का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा बल्कि इसे एक उच्च दबाव वाले जेट के ज़रिए त्वचा में डाला जाएगा. यही नहीं ये भारत में बनने वाली पहली वैक्सीन है जिसे 12-17 उम्र के समूह को लगाया जाएगा.

    ऐसा क्या है जो ZyCoV-D को अलग बनाता है
    ZyCoV-D को इस साल 20 अगस्त को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया की तरफ से आपातकालीन इस्तेमाल की सहमति मिल गई थी. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के बाद यह दूसरी वैक्सीन है जो पूरी तरह से देश में तैयार हुई है. वैक्सीन के लिए इस्तेमाल हुई तकनीक के बारे में कंपनी का कहना है कि, यह पहली बार है जब इंसानी इस्तेमाल के लिए प्लासमिड डीएनए प्लेटफॉर्म जैसी आधुनिक तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित किया गया है. यह भारत की पहली वैक्सीन है जिसे 12-17 उम्र समूह के बच्चों पर ट्रायल करने के बाद उन्हें लगाया जा सकेगा. जायडस कैडिला का ये भी कहना है कि ZyCoV-D की रैपिड प्लग एंड प्ले तकनीक की बदौलत वैक्सीन आसानी से वायरस में होने वाले म्यूटेशन का सामना कर लेती है.

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    नेचर जरनल की रिपोर्ट बताती है कि डीएनए प्लेटफॉर्म पर आधारित वैक्सीन को वैज्ञानिक लंबे समय से बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बस इसके साथ दिक्कत इम्यून रिस्पांस की है जो हर बार सामने आती थी. इसके अलावा दूसरी डीएनए वैक्सीन से ज्यादा शक्तिशाली होने के बावजूद ZyCoV-D तीन डोज वाली वैक्सीन है. हालांकि देखा जाए तो ज्यादातर बड़ी दवा कंपनी अब बूस्टर डोज की तैयारी मे हैं. बेहतर इम्यून रिस्पांस पाने के लिए ZyCoV-D में डिलीवरी तंत्र अपनाया गया है जो किसी भी दूसरी कोविड-19 के खिलाफ लगाई जाने वाली वैक्सीन से अलग है. इसे मांसपेशियों में लगाने के बजाए, एक बिना सुई वाली डिवाइस के जरिए लगाया जाएगा, यह डिवाइस तरल पदार्थ को उच्च दबाव के साथ, त्वचा को पंक्चर करके अंदर डालती है, इस वजह से इसे लगाते वक्त इन्जेक्शन जैसा दर्द नहीं होता है.

    बगैर इन्जेक्शन के वैक्सीन लगेगी कैसे
    कंपनी का कहना है कि ZyCoV-D एक इंट्राडर्मल वैक्सीन यानी त्वचा के अंदर लगने वाली वैक्सीन है जिसके लिए बिना सुई के सिस्टम का उपयोग होता है, इसका एक फायदा ये भी है कि इससे साइड इफेक्ट कम होते हैं. अमेरिका की कंपनी फार्माजेट जो बिन सुई वाले इन्जेक्टर तैयार करती है उसका इस्तेमाल ZyCoV-D लगाने में किया जाएगा, यह डिवाइस एक संकरी, सटीक तरल (दवा या वैक्सीन) धारा को त्वचा में पहुंचाती है. वैसे तो बिना सुई वाली तकनीक 1940 से मौजूद है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इसकी तकनीक में लगातार सुधार होता रहा है. इस डिवाइस की एक बड़ी खूबी यह भी है कि यह पर्यावरण के लिए बेहतर है क्योंकि इसकी वजह से डिस्पोजल सिरीज के इस्तेमाल में कमी आएगी.

    कितनी असरदार है यह वैक्सीन?
    फेज 3 के प्राथमिक परिणामों से पता चलता है कि कोरोना वायरस पर ये वैक्सीन 66.6 फीसद असरदार है. न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक कंपनी का दावा है कि वैक्सीन लगाने वाले स्वंयसेवियों में से किसी को भी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई और किसी की भी मौत नहीं हुई, जो ये बताती है कि पहली डीएनए पर आधारित वैक्सीन ZyCoV-D कोविड-19 पर बेहतर परिणाम देती है. फेज 3 के ट्रायल के लिए देश भर की 50 जगह से 28,000 स्वंयसेवियों को लिया गया था. खास बात ये है कि यह ट्रायल दूसरी लहर के दौरान किया गया जिसके बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वैक्सीन डेल्टा वेरियंट पर भी कारगर साबित हो सकती है.

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    ZyCoV-D के असर की दर दूसरी न्यक्लिक एसिड वैक्सीन की तुलना में काफी कम है, हालांकि इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी वैक्सीन का ट्रायल उस वक्त हुआ जब देश में वायरस की कम संक्रमण फैलाने वाली स्ट्रेन का असर था, जबकि ZyCoV-D का ट्रायल उस दौरान हुआ जब देश में डेल्टा वेरियंट ने आतंक फैलाया हुआ था. हालांकि ZyCoV-D के फेज 3 ट्रायल के परिणामों की समीक्षा होना और इसका प्रकाशित होना अभी बाकी है, उस पर कंपनी के प्रबंध निदेशक डॉ. शार्विल पटेल का कहना है कि फेज 3 ट्रायल के अंतरिम विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्दी है उसे किसी प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा.

    ZyCoV-D किस तरह की वैक्सीन है
    जायडस कैडिला की वैक्सीन जेनेटिक या न्यूक्लिक एसिड वैक्सीन की श्रेणी में आती है. इस वैक्सीन में वायरस की अनुवांशिक यानी जेनेटिक जानकारी मानव शरीर में भेजी जाती है, इसमें वायरस के अहम घटक यानी स्पाइक प्रोटीन होता है जो मानव कोशिका में पहुंच कर हमला करता है. इम्यून सिस्टम इस हमले की पहचान करता है और एंटीबॉडी तैयार करता है जो इस स्पाइक प्रोटीन के हमले को नाकाम करती है. अनुवांशिक वैक्सीन आरएनए और डीएनए दोनों ही तरीकों से बनाई जा सकती है. अमेरिका की एक संस्था मिल्केन इन्स्टिट्यूट का कहना है कि डीएनए आधारित वैक्सीन लोगों में छोटे डीएनए अणु जिसे प्लाजमिड कहा जाता है, उसमें अनुवांशिक इंजीनियरिंग के जरिए वायरल जीन के ब्लू प्रिंट को पहुंचा कर काम करता है. शरीर में पहुंचते ही कोशिका डीएनए प्लाजमिड को लेती है उसके निर्देशों का अनुसरण करती और वायरल प्रोटीन तैयार करती है. जिसे इम्यून सिस्टम बाहरी समझ कर अपने तंत्र को सक्रिय कर देता है और इस तरह से बीमारी से रक्षा हो पाती है. कई देशों में यह वैक्सीन अब प्रमुख वैक्सीन के तौर पर इस्तेमाल हो रही है.

    डोज क्या होंगे और मिलेगी कैसे
    जहां एक तरफ दुनियाभर में कोविड-19 की वैक्सीन के दो डोज लगाए जा रहे हैं, और जॉनसन एंड जॉनसन और स्पूतनिक लाइट का तो एक ही डोज लगता है, वहीं ZyCoV-D के तीन डोज लगना काफी दिलचस्प है, ये डोज 4 हफ्तों के अंतर में लगाए जाएंगे. हालांकि कंपनी का कहना है कि 3एमजी के दो डोज भी वैसा ही असर करेंगे, जैसा वर्तमान की तीन डोज से होगा. वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस में रखा जा सकता है. वहीं कंपनी का ये कहना है कि 3 महीने तक इसे 25 डिग्री तापमान पर रखने से भी कुछ नुकसान नहीं होता है. यह इस वैक्सीन की खास बात है जो mRNA वैक्सीन की तुलना में इसे लाने ले जाने के मामले में ज्यादा सहज बनाती है. कंपनी का कहना है उनकी हर साल 10 से 12 करोड़ वैक्सीन बनाने की योजना है.

    कितनी सुरक्षित होती है अनुवांशिक वैक्सीन
    इस तरह की वैक्सीन में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता है क्योंकि इसमें वायरस का कोई जीवित हिस्सा इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि उसकी जगह उसकी अनुवांशिक जानकारी को एक कोड करके इस्तेमाल किया जाता है. जहां तक इसके निर्माण की बात है तो सारी मेहनत जीनोम के सीक्वेंस होने तक ही है, उसके बाद तो इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है.

    Tags: Coronavirus, Coronavirus vaccine, Zycov-D

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