'नोटबंदी पर आदर्श गांव की पड़ताल' पार्ट-1: भाजपा सांसद के गांव का हाल, 12 किमी पैदल चल बैंक जाते हैं ग्रामीण

नोटबंदी के बाद से पूरे देश में लोग रोजाना अपने नजदीकी बैंकों के सामने लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. लेकिन कल्पना करें कि अगर आपके इलाके में कोई बैंक ही ना हो तो क्या हालात होंगे.

नोटबंदी के बाद से पूरे देश में लोग रोजाना अपने नजदीकी बैंकों के सामने लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. लेकिन कल्पना करें कि अगर आपके इलाके में कोई बैंक ही ना हो तो क्या हालात होंगे.

नोटबंदी के बाद से पूरे देश में लोग रोजाना अपने नजदीकी बैंकों के सामने लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. लेकिन कल्पना करें कि अगर आपके इलाके में कोई बैंक ही ना हो तो क्या हालात होंगे.

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नोटबंदी के बाद से पूरे देश में लोग रोजाना अपने नजदीकी बैंकों के सामने लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. लेकिन कल्पना करें कि अगर आपके इलाके में कोई बैंक ही ना हो तो क्या हालात होंगे.

ये कोरी कल्पना नहीं बल्कि बैतूल में उस चिखली गांव की हकीकत है जिसे यहां की सांसद ज्योति धुर्वे ने गोद लिया है. 5000 की आबादी वाले इस गांव में ना बैंक है ,ना मोबाइल टावर,ना सांसद निधि से कोई विकास.

चिखली गांव के लोगों को बैंकिंग के लिये दूसरे गांवों तक 10 से 12 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है. वहीं नोटबंदी के बाद से तो सांसद महोदया के गांव में हालात बेहद खराब हैं.



ग्रामीणों की मदद करने वाला कोई नहीं है. ना मोबाइल बैंकिंग की सुविधा और ना ग्रामीणों के लिये बैंक तक जाने के लिये कोई साधन. इतना ही नहीं गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से इंटरनेट बैंकिंग भी संभव नहीं है.
केवल दो बार गांव आईं सांसद

इस गांव को गोद लेने के बाद सांसद ज्योति धुर्वे केवल दो बार ही गांव पहुंची थी. लेकिन ना तो लोगों की समस्याओं का अंत हुआ और ना सांसद निधि से कोई विकास हुआ.

 

ग्रामीणों की मांग है कि सांसद का गोद ग्राम होने के नाते ही यहां एक बैंक शाखा खुल जाए तो 5000 की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत का भला होगा .

कई बार तय करना पड़ता है 20 किलोमीटर का सफर

नोटबंदी के पहले और आज भी ग्रामीणों को बैंकिंग के लिये पैदल 12 किलोमीटर दूर धनोरा गांव या फिर 20 किलोमीटर दूर ब्लॉक मुख्यालय भीमापुर जाना पड़ता है.

Sansad Adarsh Gram Yojana

ग्रामीण सुरेश यादव बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से हाल बुरे है. गांव में कोई भी बैंक नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को बड़ी दिक्कतें आ रही हैं.

सांसद तक बात पहुंचाना मुश्किल

आदर्श गांव के निवासी राजकुमार बताते हैं कि चिखली गांव को गोद लेने के बाद सांसद महोदया केवल दो बार गांव आई हैं.

नोटबंदी के बाद से लोग गांव में बैंक ना होने की समस्या कई बार सांसद को बताने का प्रयास कर चुके हैं लेकिन सांसद तक पहुंचना उनके लिये सबसे मुश्किल काम है.

नोटबंदी के बाद से चिखली गांव में सांसद या उनका कोई भी नुमाइंदा लोगों को हो रही असुविधा का जायजा लेने नहीं आया है. ना ही कोई इस मुद्दे पर बात करना चाहता है.

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