'नोटबंदी पर आदर्श गांव की पड़ताल' पार्ट-2: रेडियो से मिली खबर, अब तक नहीं देखी नयी करेंसी

नोटबंदी के बाद सांसदों के गोद लिए गांवों के रियलिटी चैक की दूसरी कड़ी में प्रदेश18 की टीम केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में पहुंची. जहां ये हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि यहां संरक्षित बैगा आदिवासियों ने अभी तक नये नोटों का दीदार तक नहीं किया है.

नोटबंदी के बाद सांसदों के गोद लिए गांवों के रियलिटी चैक की दूसरी कड़ी में प्रदेश18 की टीम केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में पहुंची. जहां ये हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि यहां संरक्षित बैगा आदिवासियों ने अभी तक नये नोटों का दीदार तक नहीं किया है.

नोटबंदी के बाद सांसदों के गोद लिए गांवों के रियलिटी चैक की दूसरी कड़ी में प्रदेश18 की टीम केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में पहुंची. जहां ये हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि यहां संरक्षित बैगा आदिवासियों ने अभी तक नये नोटों का दीदार तक नहीं किया है.

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नोटबंदी के बाद सांसदों के गोद लिए गांवों के रियलिटी चैक की दूसरी कड़ी में प्रदेश18 की टीम केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में पहुंची. जहां ये हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि यहां संरक्षित बैगा आदिवासियों ने अभी तक नये नोटों का दीदार तक नहीं किया है.

मध्य प्रदेश के मंडला संसदीय क्षेत्र से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आदिवासी बाहुल्य कापा गांव गोद लिया है. यहां के आदिवासियों को पुराने नोट बंद होने की खबर रेडियो के जरिए मिली थी.

500-1000 के नोट बेकार होने और रोजमर्रा के खर्चे के लिए रुपए की जरूरत होने की वजह से वो भी अपने पुराने नोटों को बदलवाने बैंक गए थे. आरोप है कि बैंक के अधिकारियों ने नोट बदलने की बजाय राशि को उनके खातों में जमा कर दिया.



हालांकि, बैंक तक जाने का सफर भी आसान नहीं रहा. सांसद के गोद लिए इस गांव में बैंक तो दूर मोबाइल नेटवर्क और अस्पताल की सुविधा भी नहीं है.
गांव में बैंक नहीं होने की वजह से कापा सहित दर्जनों ग्रामों के लोगों को 25 किलोमीटर दूर बबलिया या 45 किलोमीटर दूर नारायणगंज जाना पड़ता है. बेहद पिछड़े इलाके में बसे बैगा आदिवासी 500 और 1000 के नोट को बदलने कोसों दूर का सफर तय करके बैंक पहुंचे थे.

स्थानीय ग्रामीण रम्मू लाल बताती हैं कि ग्रामीणों से पुराने नोट बदलकर नए नोट देने के बजाए बैंक प्रबंधन ने सारी राशि उनके खाते में जमा करा दी. इस वजह से कापा सहित आसपास के ग्रामीणों ने अब तक नए नोट देखना नसीब नहीं हुआ है.

अनाज के जरिए लेन-देन

फिलहाल गांव के लोग औने-पौने दामों में अनाज बेचकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं. गांव की महिला सरपंच हलकी बाई की मानें तो नोटबंदी के बाद से पंचायत के सभी कामकाज ठप्प पड़े हुए हैं.

Mandla Aadarsh Gram Yojana

सांसद आदर्श ग्राम कापा से 25 किलोमीटर दूर स्थित बबलिया सेंट्रल बैंक के मैनेजर ओपी सोनी की मानें तो करीब 18 ग्राम पंचायतों के बीच सिर्फ एक बैंक है. हजारों की तादाद में बैंक खाते होने एवं समय पर कैश उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है.

मंत्री का गैर-जिम्मेदाराना बयान

प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत कापा गांव को गोद लेने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री व मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने इस मामले में बड़ा ही गैर जिम्मेदाराना बयान दिया है.

Mandla Sansad

कुलस्ते का कहना हैं कि हर गांव में बैंक नहीं खोले जा सकते हैं और कापा में पोस्ट ऑफिस होने का दावा भी मंत्री कर रहे हैं. हालांकि, गांव में पोस्ट आफिस कहां है इसकी जानकारी किसी भी ग्रामीण को नहीं है.

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