अस्पताल ने नहीं दिया शव वाहन, पिता के शव को कंधे पर ले गए परिजन

13 ब्लॉक्स में लगभग 16.5 लाख की आबादी वाले कालाहांडी जिले में केवल आठ एम्बुलेंस और चार शव वाहन हैं.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 4:52 AM IST
अस्पताल ने नहीं दिया शव वाहन, पिता के शव को कंधे पर ले गए परिजन
ओडिशा के आदिवासी को पिता के अंतिम संस्कार के लिए शव को 5 किमी तक ले कर जाना पड़ा.
News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 4:52 AM IST
(अंशुमान पात्रा के साथ आनंद एसटी दास)

प्रशासनिक लापरवाही की वजह से ओडिशा में एक और शव को ढोने का मामला सामने आया है. यहां एक आदिवासी व्यक्ति को अपने पिता के शव को एक गोफन में ले जाने और अंतिम संस्कार के लिए पांच किलोमीटर तक चलने के लिए मजबूर होना पड़ा. व्यक्ति को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कथित तौर पर एकशव वाहन देने से इनकार कर दिया.

थुआमुल रामपुर ब्लॉक के मेलघर गाँव के निवासी पुल्लू माझी को 55 वर्षीय निगाड़ी माँझी का शव पैदल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा. वह बुखार से पीड़ित थे. सोमवार को कनिगुमा के एक
अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया.

पुलु माझी, उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के अधिकारियों और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शव को अंतिम संस्कार के लिए घर वापस ले जाने के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया लेकिन अधिकारियों ने कथित तौर पर मदद करने से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़ें:  ओडिशा: लड़की को जंगल ले गए 5 क्लासमेट और किया गैंगरेप

निजी वाहन के लिए नहीं थे पैसै
Loading...

एक किसान और दैनिक-मजदूरी का काम करने वाले पुलू माझी ने कहा, 'मेरे पास निजी वाहन के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे. जब मेरे सभी अनुरोध बहरे कानों पर गिर गए, तो एक रिश्तेदार और मैंने अपने पिता के शरीर को कपड़े के लंबे टुकड़े में डाल दिया और उसमें से एक गोफन बना दिया. कोई और विकल्प नहीं बचा था.'

कुछ रिश्तेदारों ने अपने मोबाइल फोन पर एक गोफन में शव को ले जाने का वीडियो जदिाा

आदिवासी ग्रामीणों अधिकारियों के इस व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की जिन्होंने मांझी की मदद करने से इनकार कर दिया. बता दें कि राज्य सरकार ने ’महाप्रयाण योजना’ लागू की है जो अस्पतालों से शवों को मुफ्त लेकर जाता है.

यह भी पढ़ें:   भुवनेश्वर : कोबरा का ऑपरेशन, डॉक्टरों को ऐसे पता चली दिक्कत

दिए गए जांच के आदेश

कालाहांडी के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) डॉ. बनलता देवी ने घटना की जांच के आदेश दिए.उन्होंने कबहा कि “मैं जांच के बाद ही पता लगा सकती हूं कि अस्पताल को गोफन में अस्पताल से किन परिस्थितियों में ले जाना पड़ा. जांच में लापरवाही बरतने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

13 ब्लॉक्स  में लगभग 16.5 लाख की आबादी वाले कालाहांडी जिले में केवल आठ एम्बुलेंस और चार शव वाहन हैं.

एक स्थानीय आदिवासी नेता परमानंद माझी ने दावा किया कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में 10 में से नौ मामलों में होती हैं. परमानंद माझी ने कहा 'कालाहांडी जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं जर्जर हैं. एक आदिवासी बहुल और दूरदराज का इलाका होने के नाते, थुआमुल रामपुर को सरकार से विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.'

यह भी पढ़ें:  बेटे ने पिता को मारने के बाद मां पर तेल छिड़ककर लगाई आग
First published: July 18, 2019, 4:52 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...