पानी की कहानी: खाकी वर्दी ने ठाना तो रेगिस्तान में बना डाला पानी का तालाब

चूरू की बंजर जमीन आज 'पुलिस वाला जोहड़' बन गया है. ड्रोन से ली गई तस्वीर.

चूरू की बंजर जमीन आज 'पुलिस वाला जोहड़' बन गया है. ड्रोन से ली गई तस्वीर.

जहां दूर-दूर तक पानी की एक बूंद के लिए परिंदे तक तरस जाते हैं, वहां पुलिस की खाकी वर्दी की जिद और मेहनत से तालाब पानी से लबालब भरा है.

  • Last Updated: May 29, 2018, 10:12 AM IST
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न्यूज़18 हिंदी पर हम आपको देश में पानी के मौजूदा हालात, इसकी कमी के सामाजिक परिणामों और स्थिति को सुधारने के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दे रहे हैं. हमारी खास मुहिम 'पानी की कहानी' की इस रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे चूरू जिले में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने अथक मेहनत कर जल संरक्षण की मिसाल पेश की हैः

यह महज खबर भर नहीं है, बल्कि एक मिसाल है. डार्क जोन की श्रेणी में शामिल प्रदेश के चूरू जिले के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए यह एक राहत है, सुकून है, जो पानी की चिंता करता है, जो उसे बचाने का प्रयास करता है. जो गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए अपनी तरफ से कुछ न कुछ योगदान देता है. पानी को बचाने और सहेजने की दृष्टि से यह मिसाल भी बेमिसाल है, जिसे राजस्थान पुलिस के सैंकड़ों जवानों ने अपनी मेहनत से बेमिसाल बनाया है .

शून्य सरकारी बजट से निर्मित चूरू में पुराने समय में कनाणा जोहड़ के नाम से पड़ी बंजर जमीन आज 'पुलिस वाला जोहड़' बन गया है. यहां आकर खाकी रौब नहीं झाड़ती, बल्कि पानी और पर्यावरण को बचाने के लिए श्रमदान करती है. लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करती है.



यह कहानी है चूरू जिला पुलिस की. देश के लिए मॉडल बन चुके मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान से प्रेरित होकर जिले के पुलिस कप्तान राहुल बारहट और उप कप्तान केसरसिंह शेखावत ने करीब दो साल पहले जब इस सपने को संजोया तो पुलिसकर्मी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए. सपना था चूरू के समीपवर्ती गांव गाजसर में पक्का जोहड़ बनाने का.
बताया जाता है बिना सरकार का मुंह ताके इस जिले के पुलिसकर्मियों ने अपना एक दिन का वेतन 20 लाख रुपए इस जोहड़ के निर्माण में दिया और फिर शुरू हुआ श्रमदान का सिलसिला. चार महीने तक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने अथक श्रमदान कर तैयार डाला कानाणा जोहड़.

​चूरू पुलिस ने पेश की मिसाल

​एक दिन का वेतन देकर की शुरूआत

बंजर जमीन को खोदकर तैयार किया जोहड़

​आज यहां करीब दो हजार पौधे भी लहलहाते हैं

​जल संरक्षण की अनूठी मुहिम

​शून्य सरकारी बजट से निर्मित है पुलिस वाला जोहड़

Churu Police, water reservoir
चूरू की बंजर जमीन आज 'पुलिस वाला जोहड़' बन गया है.

यहां लहलहाते हैं​ करीब दो हजार पौधे

उप कप्तान केसरसिंह शेखावत ने इस काम को और आगे बढ़ाते हुए जोहड़ के चारों तरफ सघन वृक्षारोपण करवाया. इस पुलिस वाला जोहड़ के चारों तरफ आज शीशम, गुलमोहर, बरगद सहित विभिन्न प्रजातियों के तकरीबन दो हजार मुस्कुराते पौधे पुलिसकर्मियों के पर्यावरण प्रेम को दर्शाते हैं. अब यह पुलिस जोहड़ चिंकारा जैसे वन्य जीवों और पक्षियों का कलरव स्थल बन चुका है. चूरू शहर में आने वाले सैलानियों के लिए भी यह जोहड़ आर्कषण का केंद्र बन चुका है, जो चूरू पुलिस के लिए गौरव की बात है. आज भी सप्ताह में एकबार सभी पुलिसकर्मी स्वेच्छा से जोहड़ पर आते हैं और इसकी साफ सफाई सहित पेड़- पौधों को पानी देने का काम करते हैं.

Churu Police, water reservoir
तालाब के आसपास अब पुलिसकर्मी हराभरा बनाने में जुटे हैं.

यह आने वाले भविष्य को तय करेगा

बकौल एसपी राहुल बारहट चूरू एक शुष्क इलाका है. केवल जोहड़ तैयार करना और उसे छोड़ देना हमारा लक्ष्य नहीं है. इस अभियान में सभी को जुड़ना चाहिए, क्योंकि यह आने वाले भविष्य को तय करेगा. पानी की समस्या जो विकराल रूप ले रही है उससे इसी तरह के अभियान से निपटा जा सकता है. एएसपी केसरसिंह शेखावत बताते हैं पहले यह जमीन जमीन वीरान थी. आज शाम के समय यहां हिरणों के झुंड पानी पीने आते हैं और सुबह-सुबह पक्षियों का कलरव सुना जा सकता है. अब यहां आकर सुकूंन मिलता है.

Churu Police, water reservoir
तालाब के पानी से ही पुलिसकर्मी आसपास लगाए पौधे सींचते हैं.

उल्लेखनीय है पानी के मामले में चूरू जिला डार्क जोन श्रेणी में है. इसके चलते जिले को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आमजन से लेकर पशु-पक्षियों तक को पेयजल के संकट का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस तरह की पहल न केवल जल संरक्षण के लिए एक नजीर है, बल्कि रेत के तपते धोरों की बीच इस तरह के जोहड़ पशु-पक्षियों के लिए जीवन रेखा से कम नहीं है.

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