छत्तीसगढ़ में विकास के दावों की पोल खोलती पानी की ये कहानी

छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लोग नदी व नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.

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छत्तीसगढ़ में 14 साल से सत्ता पर काबिज़ भाजपा सरकार विकास के तमाम दावे कर रही है. शहरी क्षेत्रों में चमचमाती सड़क और बहुमंजिला इमारतों को विकास का चेहरा बनाया जा रहा है, लेकिन प्रदेश के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में इंसान नदी या नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. न्यूज़ 18 हिंदी के पानी की कहानी सीरिज के इस अंक में हम एक ऐसी कहाानी बताने जा रहे हैं, जो सरकार के विकास के दावों की पोल खोल कर रख देगी.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित मेटापाल में आदिवासी नाले का गंदा पानी पीने का मजबूर हैं. पानी की हर जरूरत के लिए ग्रामीण नाले के पानी पर ही निर्भर हैं. क्योंकि इस गांव में पानी का दूसरा कोई स्रोत व संसाधन नहीं है.

घोर माओवाद प्रभावित मेटापाल की आदिवासी महिलाएं व बच्चे गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर एक नाले से पानी भरने जाते हैं. पीने का पानी हो या खाना पकाने के लिए पानी की जरूरत इसी नाले के पानी पर निर्भर होना पड़ता है. गांव के लोग नहाने और बर्तन धोने का काम नाले में ही कर लेते हैं.



ग्रामीणों ने बताया कि सालों पहले इस गांव में कुछ हैंडपंप जरूर लगाए गए थे, लेकिन वे खराब हो चुके हैं.
ग्रामीणों का आरोप है कि कभी कोई सरकारी अमला गांव नहीं आता है. इसलिए हैंडपंप सुधरने का तो सवाल ही नहीं है. ऐसे में ग्रामिणों को नदी या नाले का गंदा पानी पीने के अलावा दूसरा कोई विकल्‍प नहीं है.
दूसरे गांवों का भी यही हाल

बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में सिर्फ मेटापाल ही नहीं बल्कि चोकनपाल, गोंगला, मर्रेवाड़ा, हिरोली, कोंग्पल्ली सहित 25 से अधिक ऐसे गांव व कस्बे हैं, जहां पानी के लिए नाले व नदी पर ही ग्रामीण निर्भर रहते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से इसी पानी का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार व प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया.

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इस तरह झरिया से पानी भरते हैं ग्रामीण.

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नाले का पानी ज्यादा ही गंदा होता है. ऐसे में उस पानी को पीने में उपयोग करना संभव नहीं होता है. इसके लिए ग्रामीण नाले के किनारे के कुछ में रेत पर गड्ढानुमा झरिया बनाते हैं. रेत व छोटे छोट कंकड़ों की वजह से कुछ देर में पानी छनकर थोड़ा साफ हो जता है. आदिवासी इलाके के ये ग्रामीण उसी पानी का प्रयोग पीने व भोजन पकाने में करते हैं.

मर चुके हैं कई लोग

ग्रामीण विज्जा कुंजाम व पैकर ने बताया कि गंदा पानी पीने के कारण आए दिन गांव में कोई न कोई बीमार पड़ता है. बारिश के दिनों में पानी ज्यादा गंदा हो जाता है. इस दौरान बीमारी और भी गंभीर हो जाती है. बारिश के दिनों में इन गांव में शहरी इलाकों से संपर्क टूट जाता है. ऐसे में कई लोगों की मौत हो जाती है.

दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप लगाने की व्यवस्था की जा रही है. जल्द ही लोगों को समस्या से निजात मिलेगी.

-डॉ. आयाज तंबोली, कलेक्टर बीजापुर

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