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कभी ना हारे अन्ना हजारे

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि जेल से निकलने के बाद वह दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन जारी रखेंगे। तिहाड़ जेल के बाहर केजरीवाल ने कहा कि अन्ना के चिकित्सक उनके साथ हैं। वे 24 घंटे उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि जेल से निकलने के बाद वह दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन जारी रखेंगे। तिहाड़ जेल के बाहर केजरीवाल ने कहा कि अन्ना के चिकित्सक उनके साथ हैं। वे 24 घंटे उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।

प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि जेल से निकलने के बाद वह दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन जारी रखेंगे। तिहाड़ जेल के बाहर केजरीवाल ने कहा कि अन्ना के चिकित्सक उनके साथ हैं। वे 24 घंटे उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।

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    अन्ना का मूल नाम किशन बाबूराव हजारे है। अन्ना का जन्म 15 जून, 1938 को महाराष्ट्र के भिंगारी गांव में हुआ।
    अन्ना का मूल नाम किशन बाबूराव हजारे है। अन्ना का जन्म 15 जून, 1938 को महाराष्ट्र के भिंगारी गांव में हुआ।
    अन्ना ने 1962 में चीन से युद्ध के बाद भारत सरकार की युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील के बाद सेना में बतौर ड्राइवर भर्ती हुए थे।
    अन्ना ने 1962 में चीन से युद्ध के बाद भारत सरकार की युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील के बाद सेना में बतौर ड्राइवर भर्ती हुए थे।
    1965 की पाकिस्तान के साथ लड़ाई में उनकी तैनाती खेमकरण सेक्टर में थी। चौकी पर पाकिस्तान के हमले में वहां तैनात सारे सैनिक शहीद हो गए।
    1965 की पाकिस्तान के साथ लड़ाई में उनकी तैनाती खेमकरण सेक्टर में थी। चौकी पर पाकिस्तान के हमले में वहां तैनात सारे सैनिक शहीद हो गए।
    बमबारी और सैनिकों की शहादत ने अन्ना की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।
    बमबारी और सैनिकों की शहादत ने अन्ना की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।
    [caption id="attachment_305783"]1975 में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अन्ना ने अपने जीवन को दिशा दी। <br />
1975 में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अन्ना ने अपने जीवन को दिशा दी।
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    अन्ना की राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के धुर विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर पहचान 1995 में बनी थी।
    अन्ना की राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के धुर विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर पहचान 1995 में बनी थी।
    तब उन्होंने शिवसेना-बीजेपी की सरकार के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को हटाए जाने को लेकर भूख हड़ताल की।
    तब उन्होंने शिवसेना-बीजेपी की सरकार के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को हटाए जाने को लेकर भूख हड़ताल की।
    अन्ना 2003 में कांग्रेस और एनसीपी सरकार के चार भ्रष्ट मंत्रियों-सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटिल के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठ गए. हजारे का विरोध काम आया और सरकार को झुकना पड़ा।
    अन्ना 2003 में कांग्रेस और एनसीपी सरकार के चार भ्रष्ट मंत्रियों-सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटिल के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठ गए. हजारे का विरोध काम आया और सरकार को झुकना पड़ा।
    तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने इसके बाद एक जांच आयोग का गठन किया.मलिक ने इस्तीफे दे दिया।
    तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने इसके बाद एक जांच आयोग का गठन किया.मलिक ने इस्तीफे दे दिया।
    आयोग ने जैन के खिलाफ आरोप तय किए तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
    आयोग ने जैन के खिलाफ आरोप तय किए तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

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