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...बन गए मंत्री!


Updated: March 5, 2015, 5:35 PM IST
...बन गए मंत्री!
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अजित सिंह जितने अपने राजनीतिक कद के लिए जाने जाते हैं उतने ही वो अपना पाला बदलने के लिए भी मशहूर हैं। साभारः राष्ट्रीय लोकदल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अजित सिंह जितने अपने राजनीतिक कद के लिए जाने जाते हैं उतने ही वो अपना पाला बदलने के लिए भी मशहूर हैं।

साभारः राष्ट्रीय लोकदल

  • Last Updated: March 5, 2015, 5:35 PM IST
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[caption id="attachment_309434"]पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अजित सिंह जितने अपने राजनीतिक कद के लिए जाने जाते हैं उतने ही वो अपना पाला बदलने के लिए भी मशहूर हैं। <br />
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साभारः राष्ट्रीय लोकदल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अजित सिंह जितने अपने राजनीतिक कद के लिए जाने जाते हैं उतने ही वो अपना पाला बदलने के लिए भी मशहूर हैं।



साभारः राष्ट्रीय लोकदल[/caption]
यूपी चुनावों से ठीक पहले अजित ने यूपीए सरकार का दामन थाम लिया है। अजित ने चौथी बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
यूपी चुनावों से ठीक पहले अजित ने यूपीए सरकार का दामन थाम लिया है। अजित ने चौथी बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
आरएलडी खेमे के यूपीए सरकार में शामिल होने से लोकसभा में यूपीए कुनबे वाले सांसदों की संख्या 272 से बढ़कर 277 हो गई है।
आरएलडी खेमे के यूपीए सरकार में शामिल होने से लोकसभा में यूपीए कुनबे वाले सांसदों की संख्या 272 से बढ़कर 277 हो गई है।
अजित सिंह इससे पहले समाजवादी पार्टी और बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन आरएलडी के मुखिया का इन दलों के साथ रिश्ता जल्द ही टूट गया।
अजित सिंह इससे पहले समाजवादी पार्टी और बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन आरएलडी के मुखिया का इन दलों के साथ रिश्ता जल्द ही टूट गया।
यही नहीं, किसी भी तरह के गठबंधन में बाजी हमेशा अजित के ही हाथ लगी है क्योंकि वो हमेशा ही अपने समर्थन देने की कीमत पहले ही ले लेते हैं।
यही नहीं, किसी भी तरह के गठबंधन में बाजी हमेशा अजित के ही हाथ लगी है क्योंकि वो हमेशा ही अपने समर्थन देने की कीमत पहले ही ले लेते हैं।
इस बार भी यूपीए के साथ दोस्ती में उन्हें केंद्र में नागरिक विमानन मंत्रालय मिला है।
इस बार भी यूपीए के साथ दोस्ती में उन्हें केंद्र में नागरिक विमानन मंत्रालय मिला है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरएलडी के पास इस वक्त 10 विधायक हैं। कांग्रेस से गठबंधन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आरएलडी को प्रदेश में करीब 50 सीटें मिल सकती हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरएलडी के पास इस वक्त 10 विधायक हैं। कांग्रेस से गठबंधन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आरएलडी को प्रदेश में करीब 50 सीटें मिल सकती हैं।
पार्टी ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिए हैं। लेकिन सवाल सिर्फ एक ही है क्या अजित का साथ कांग्रेस को यूपी में जीत दिला पाएगा।
पार्टी ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिए हैं। लेकिन सवाल सिर्फ एक ही है क्या अजित का साथ कांग्रेस को यूपी में जीत दिला पाएगा।
अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल का प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल क्षेत्रों पर माना जाता है लेकिन इस बार लड़ाई इतनी आसान भी नहीं होगी। बीएसपी, बीजेपी और एसपी सरीखे दल अजित के घर में उनके लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल का प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल क्षेत्रों पर माना जाता है लेकिन इस बार लड़ाई इतनी आसान भी नहीं होगी। बीएसपी, बीजेपी और एसपी सरीखे दल अजित के घर में उनके लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं।

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First published: December 21, 2011, 11:10 AM IST
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