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राजा के तेवर कड़े, चिदंबरम को कोर्ट में बुलाने पर अड़े

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में राजा के वकील सुशील कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े हर फैसले में पी चिदंबरम शामिल थे।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में राजा के वकील सुशील कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े हर फैसले में पी चिदंबरम शामिल थे।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में राजा के वकील सुशील कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े हर फैसले में पी चिदंबरम शामिल थे।

  • News18India
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    नई दिल्ली। टेलीकॉम घोटाले के राजा को जेल में चैन नहीं है। उसने तय कर लिया है कि अगर मैं भीतर तो बाकी बाहर क्यों? राजा के निशाने पर हैं गृहमंत्री पी चिदंबरम, जो वित्त मंत्रालय की चिट्ठी लीक होने से कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं। अदालत में राजा के वकील का आक्रामक अंदाज ये बताने के लिए काफी था कि वो चिदंबरम को अदालत में खड़ा करने के लिए किस कदर बेताब हैं।

    दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में राजा के वकील सुशील कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े हर फैसले में पी चिदंबरम शामिल थे। वित्त मंत्रालय और टेलीकॉम मंत्रालय में किसी बात पर मतभेद नहीं रहा और फैसले पूरी कैबिनेट की सहमति से लिए गए। ऐसे में चलाना है तो सब पर मुकदमा चलाओ केवल मेरे मुवक्किल पर क्यों। आप चिदंबरम को कोर्ट में बुलाकर पूछिए और जरूरत पड़े तो पीएम को भी बुलाइए।

    सुब्रमण्यम स्वामी पहले ही प्रधानमंत्री के संसद में दिए बयान का हवाला देते घूम रहे हैं। इस बयान में पीएम ने माना था कि कीमतें तय करने की जिम्मेदारी तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम और टेलीकॉम मंत्री राजा की थी। हवा का रुख देखकर अब राजा और उनके वकील भी मामले को नया मोड़ देने में जुट गए हैं। जेल से बाहर आने के लिए राजा खुद को बेचारा साबित करने में लगे हैं। लेकिन उनकी इस कोशिश का शिकार चिदंबरम हो रहे हैं। और तो और वो पीएम को भी तलब करने की मांग कर रहे हैं। सुशील कुमार कहते हैं कि 2008 की बैठक में चिदंबरम और प्रधानमंत्री भी थे। मैं कह रहा हूं कि सीबीआई दोनों के बयान दर्ज कराए ताकि सच का सच और झूठ का झूठ निकल आए।

    राजा के वकील ने चिदंबरम को धारा 311 के तहत तलब करने की मांग की है। उन्होंने अदालत से कहा कि चिदंबरम कोर्ट में आकर साफ करें कि वित्त मंत्री की हैसियत से उन्होंने कैबिनेट की बैठक में क्या राय रखी। वकील ने अदालत में उस 2008 की एक बैठक का लिखित ब्योरा मंगवाने की भी अपील की है। जाहिर है प्रणब मुखर्जी की चिट्ठी के बाद राजा का ये दांव चिदंबरम के लिए भारी पड़ सकता है।

    प्रणब-चिदंबरम विवाद से पहले ही हलकान सरकार राजा और उनके वकील की दलीलों से बैकफुट पर आ गई है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि किसी भी कोर्ट में बहस होती है तो बहुत सी बातें कही जाती हैं। जब जज उसे स्वीकार करे, कोई फैसला दे तब हम प्रतिक्रिया दे सकते हैं। सवाल ये है कि जज किसे बुलाते हैं।

    उधर अदालत में भी चिदंबरम को घिरा देख विपक्ष और लामबंद हो गया है। बीजेपी ने तत्काल मांग उठाई कि चिदंबरम के खिलाफ आपराधिक जांच होनी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता जे पी नड्डा ने कहा कि चिदंबरम को हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक जांच होनी चाहिए। पीएम के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए। जब प्रधानमंत्री और चिदंबरम का नाम आ रहा है तो इस केस की ईमानदारी से जांच कैसे होगी। शिवसेवा नेता संजय राउत ने कहा कि घोटाले में जो भी शामिल हैं उसे जेल भेजा जाना चाहिए। अगर सीबीआई के पास ताकत है तो वो चिदंबरम को पकड़े। हमें यकीन नहीं है कि पीएम भी बेदाग हैं।

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