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सोनिया ने बदलवा दिया केंद्र का खाद्य सुरक्षा बिल!

सोनिया ने बदलवा दिया केंद्र का खाद्य सुरक्षा बिल!

यूपीए ने 2014 के आम चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल में अहम बदलाव किए हैं।

यूपीए ने 2014 के आम चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल में अहम बदलाव किए हैं।

यूपीए ने 2014 के आम चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल में अहम बदलाव किए हैं।

    नई दिल्ली। यूपीए ने 2014 के आम चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल में अहम बदलाव किए हैं। सूत्रों के मुताबिक अब तक सोनिया की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सुझावों को व्यावहारिक न मानने वाली सरकार अब अगले साल से ही खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम लागू करने जा रही है।

    भ्रष्टाचार, महंगाई और सरकार के भीतर छिड़ी मंत्रियों की जंग से जाहिर है कि 2014 में यूपीए की नैया पार लगाने के लिए सरकार को कुछ खास करने की जरूरत है। ये कमान अब खुद सोनिया गांधी ने संभाली है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया ने साफ कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा बिल को जल्द से जल्द लागू करना होगा। वो भी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सुझावों के अनुसार। आदेश मिलते ही ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बिल पर काम भी शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक खाद्य सुरक्षा बिल के नए ड्राफ्ट में दो बड़े बदलाव किए गए हैं।

    पहला, खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मिड डे मील और समग्र बाल विकास कार्यक्रम को लाया जाएगा। पहले सरकार इतने बड़े कार्यक्रमों को खाद्य सुरक्षा बिल के तहत लाने को तैयार नहीं थी। दूसरा, गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए एनएसी ने हर परिवार के लिए 35 किलो अनाज देने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन सरकार 20 किलो से ज्यादा के लिए तैयार नहीं थी। अब नए ड्राफ्ट में कहा गया है कि उत्पाद और खरीद को देखते हुए 20 किलो से ऊपर अनाज दिया जा सकता है।

    इन बदलावों के बाद कहीं ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के दायरे में आ जाएंगे। जाहिर है, इस पहल ने कांग्रेस में नई उम्मीद जगा दी है। खाद्य सुरक्षा बिल यूपीए की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। कहा जा रहा है कि जैसे पिछले आम चुनाव में किसानों की कर्ज माफी और मनरेगा से कांग्रेस को फायदा पहुंचा था, उसी तरह खाद्य सुरक्षा कानून रामबाण साबित होगा।

    सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे अगले साल से लागू करने की कोशिश करेगी ताकि 2014 आते आते इसका असर जनता में दिखने लगे। हालांकि सरकार के भीतर अब भी ये चिंता बनी हुई है कि इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम लागू करने के लिए अनाज आएगा कहां से। बड़ा सवाल ये है कि कहीं भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर बैकफुट पर खड़ी यूपीए सरकार राजनीतिक मजबूरी के सामने अर्थशास्त्र की बलि तो नहीं चढ़ा रही।

    दरअसल खाद्य सुरक्षा योजना लागू करने में सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत गरीबों की पहचान को लेकर है। गरीबी रेखा पर बवाल मचने के बाद सरकार ऐलान कर चुकी है कि योजना आयोग के फॉर्मूले पर सरकारी स्कीम नहीं चलेगी। ऐसे में ग्रामीण विकास मंत्रालय के जातिगणना का इंतज़ार किया जा रहा है, जिससे गरीबों की सही संख्या का पता चल पाए।

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