राहुल ने साधा निशाना तो उमा ने कहा-मां का बैकग्राउंड देखें!

बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती के महोबा से चुनाव लड़ने की घोषणा होते ही कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने उनके बाहरी होने का मुद्दा उछाल दिया है।

  • News18India
  • Last Updated: January 19, 2012, 10:10 AM IST
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नई दिल्ली। लखनऊ। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की तेजतर्रार नेता उमा भारती के चरखारी सीट से विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी होने पर बुंदेलखंड में कांग्रेस के राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा गए हैं और पार्टी में खलबली मच गई है।

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह तथा प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने एक सुर में उमा भारती की आलोचना की और उन्हें उत्तर प्रदेश के लिये बाहरी बताया। उमा भारती ने भी कांग्रेस के नेताओं के बयान का जवाब उन्हीं की भाषा में दिया है। गांधी ने बुंदेलखंड में महोबा के कुलपहाड में जनसभा में कहा कि उमा भारती को जब मध्यप्रदेश से निकाला गया तो वह उत्तर प्रदेश में आ गईं।

उन्होंने सवाल उठाया कि बुंदेलखंड में जब कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे थे तब उमा भारती वहां नहीं आईं। अब जब चुनाव आया है तो वह प्रत्याशी बन गई हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बरेली में कहा कि उमा भारती ने मध्यप्रदेश में अपना और पार्टी का भट्टा बैठा दिया। वह आयातित नेता हैं।



प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि लगता है कि भाजपा के पास राज्य में नेताओं की कमी हो गई है इसलिए दूसरे राज्य से नेताओं को बुलाया जा रहा है। उमा भारती विवादित रही हैं और अब उत्तर प्रदेश में भी अपनी पार्टी में कुछ न कुछ विवाद पैदा करेंगी।
उमा भारती ने कांग्रेस नेताओं को उनकी बातों का करारा जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बयान के जवाब में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जब इटली से भारत आ सकती हैं तो वह मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश क्यों नहीं आ सकतीं। उन्होंने कहा कि दिवंगत राजीव गांधी उन्हें अपनी बहन मानते थे लिहाजा उस रिश्ते में राहुल को उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। वे पहले अपनी मां का बैकग्राउंड देखें तब बुआ पर टिप्पणी करें।

उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को वह मध्यप्रदेश में हरा चुकी हैं। अब उनकी हार की बारी उत्तर प्रदेश में है। सिंह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रभारी हैं। गांधी बुंदेलखंड में पार्टी की जमीन तैयार करने के लिए पिछले दो साल से मेहनत कर रहे हैं। बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने में सहमति के अलावा वह इस इलाके को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का विशेष पैकेज भी मंजूर करा चुके हैं। गांधी ने पिछले तीन साल में कई बार इस इलाके का दौरा किया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुंदेलखंड इलाके से कांग्रेस के दो विधायक हैं जबकि भाजपा के पास एक भी सीट नहीं है। गांधी के सघन दौरे के कारण पार्टी यह मान कर चल रही थी कि बुंदेलखंड में उसके लिए जमीन आसान हो गई है।

भाजपा नेतृत्व ने बुंदेलखंड के चरखारी से उमा भारती को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस को असहज कर दिया है। चरखारी से उमा भारती का पुराना नाता रहा है। चरखारी के अस्थौन गांव में 1994 में भानुमति नामक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। यह कांड पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया जब उमा भारती उसे लेकर दिल्ली पहुंच गईं।

मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में पली-बढ़ी उमा भारती पूरे इलाके में अच्छी खासी पकड़ रखती हैं। भाजपा उनके सहारे अपनी सीट बढ़ाना चाहती है तो लोध मतदाताओं पर भी छूट गई पकड़ को वापस पाना चाहती है।

भाजपा ने उमा भारती के लिए एटा की एक और बुंदेलखंड की दो सीटें छोड़ी थीं लेकिन एटा की सीट से लोध नेता कल्याण सिंह के कारण उन्होंने लड़ने से मना कर दिया। बुंदेलखंड से उमा भारती का पुराना आत्मीय लगाव है। जब वह छह साल की थीं तब इस इलाके में धार्मिक प्रवचन दिया करती थीं।

भाजपा नेतृत्व यह मान रहा है कि उमा भारती के चुनावी राजनीति में आने से बुंदेलखंड का लोध वोट उसकी झोली में आएगा। विधानसभा की बबीना में 35 हजार, गरौठा में 50 हजार, महरौनी में 65 हजार, ललितपुर में तीस हजार, चारखारी और राठ में साठ-साठ हजार लोध मतदाता हैं।
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