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वंशवृक्ष के सहारे दिल्ली कूच करना चाहते हैं मुलायम!

वंशवृक्ष के सहारे दिल्ली कूच करना चाहते हैं मुलायम!

लोकसभा चुनाव के लिए मोर्चेबंदी तेज करते हुए समाजवादी पार्टी ने आज लोकसभा चुनाव के लिए 55 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया। इनमें पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, उनकी बहू और उनके दो भतीजे भी शामिल हैं।

    लखनऊ। लोकसभा चुनाव के लिए मोर्चेबंदी तेज करते हुए समाजवादी पार्टी ने आज लोकसभा चुनाव के लिए 55 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया। इनमें पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, उनकी बहू और उनके दो भतीजे भी शामिल हैं। मुलायम मैनपुरी से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। जबकि फिरोजाबाद से प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। जाहिर है, मुलायम एक बार फिर परिवारवाद के आरोपों से घिर गए हैं।

    दरअसल खुद को डॉ. लोहिया का शिष्य बताने वाले मुलायम सिंह यादव अब लोकसभा को घर की बैठक बनाना चाहते हैं। शुक्रवार को पार्टी के उम्मीदवारों का ऐलान करते हुए पार्टी महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने 55 उम्मीदवारों की जो फेहरिस्त जारी की। उसके मुताबिक मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से, उनके बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से चुनाव लड़ेंगी। वहीं मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव को एक बार फिर बदायूं से उम्मीदवार बनाया गया है। जबकि रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को फिरोजाबाद से पहली बार चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है।

    वैसे, परिवारवाद के आरोप के चलते ही डिंपल यादव को फिरोजाबाद में कांग्रेस के राजबब्बर के हाथों मात खानी पड़ी थी। बाद में वे कन्नौज उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं जो अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी। जिस अक्षय यादव को पार्टी ने फिरोजाबाद से इस बार अपना उम्मीदवार बनाया है उनका अभी तक सक्रिय राजनीति से कोई नाता नहीं रहा है। लेकिन पार्टी का कहना है कि परिवारवाद के चलते नहीं, जीतने की क्षमता को देखते हुए टिकट दिए गए हैं।

    मुलायम ने जवानी में कदम रखने के साथ ही समाजवादी आंदोलन का झंडा उठाया था। तब कांग्रेस का वंशवाद उनके निशाने पर था। लेकिन सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के साथ-साथ मुलायम तमाम दूसरे समाजवादी सिद्धांतों के साथ, परिवारवाद के खतरे को भी भुला बैठे। समाजवादी आंदोलन के तमाम पुरोधा अगर पार्टी से दूर हैं तो उसकी बड़ी वजह उनका परिवारवाद भी है। मुलायम के कुनबे और सत्ता की कुर्सियों के रिश्ते पर नजर डालने से समर्पित कार्यकर्ताओं का ये दर्द साफतौर पर समझा जा सकता है।

    मुलायम सिंह यादव (पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के नेता)
    मुलायम के बेटे अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
    मुलायम की बहू डिंपल यादव कन्नौज से सांसद
    मुलायम के भाई शिवपाल सिंह यादव, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री
    मुलायम के भाई रामगोपाल यादव पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद
    मुलायम के भतीजे धर्मेद्र बदायूं से सांसद।
    और अब मुलायम के भतीजे और रामगोपाल के बेटे अक्षय को फिरोजाबाद से टिकट।

    लेकिन कांग्रेस को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता। वो खुश है कि वंशवाद के घेरे में गांधी परिवार ही नहीं, सियासी रसूख रखने वाला देश का हर कुनबा शामिल हो गया है। ऐसा लगता है कि मुलायम अपने कुनबे के हर शख्स को कुर्सी दिलाकर समाज में न सही, परिवार में तो समाजवाद ले ही जाएंगे। बहरहाल रायबरेली और अमेठी के लिए फिलहाल पार्टी ने किसी नाम का एलान नहीं किया है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पहले की तरह वाकओवर देना भविष्य के समीकरणों से तय होगा। वैसे, समाजवादी पार्टी ने तय समय से लगभग डेढ़ साल पहले उम्मीदवारो की घोषणा करके भविष्य का कुछ संकेत तो दिया है। वो सूबे में जल्द से जल्द चुनावी माहौल बनाना चाहती है ताकि अखिलेश सरकार के कामकाज की जगह मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने का नारा बीच बहस रहे। ऐसे में कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी अब तीसरे मोर्चे की राह पकड़कर कांग्रेस के खिलाफ हमलावर होगी। यानी संसद के शीतकालीन सत्र में एफडीआई जैसे मुद्दों पर समाजवादी पार्टी का समर्थन पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

    Tags: Family members, Samajwadi party

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