क्या शिंदे के बयान का फायदा उठाना चाहती है BJP?

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान देकर जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है कि आरएसएस और बीजेपी के ट्रेनिंग कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान देकर जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है कि आरएसएस और बीजेपी के ट्रेनिंग कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है।

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान देकर जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है कि आरएसएस और बीजेपी के ट्रेनिंग कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है।

  • News18India
  • Last Updated: January 22, 2013, 5:05 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान देकर जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है कि आरएसएस और बीजेपी के ट्रेनिंग कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है। सोमवार दिन भर संघ और बीजेपी का पारा चढ़ा रहा, बुरी तरह तिलमिलाए संघ ने शिंदे को आतंकवादियों का डार्लिंग बता डाला, वहीं बीजेपी ने इनके इस्तीफे की मांग पर आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया। वहीं, सरहद पार से आतंकवादियों का मुखिया हाफिज सईद भारत में आतंकवाद के मजहब पर छिड़ी इस सियासत पर गदगद नजर आया। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी कांग्रेस और सरकार, शिंदे के साथ मजबूती से खड़ी है।
बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के मुताबिक 24 जनवरी को बीजेपी का देशव्यापी आन्दोलन होगा। बीजेपी मांग करती है कि सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बयान के लिए माफी मांगे और शिंदे को उनके पद से बर्खास्त किया जाए। शिंदे ने ये आरोप मालेगांव धमाके, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और हैदराबाद के मक्का मस्जिद विस्फोट जैसे केस की जांच के आधार पर लगाए। जांच में कई ऐसी शक्लें सामने आईं जो किसी न किसी रूप में भगवा ताकतों के साथ खड़ी नजर आ रही थीं। शिंदे ये कहना चाहते थे कि इस्लामिक आतंकवाद ही नहीं हिंदू आतंकवाद भी देश को जख्म दे रहा है और जिस तरह इस्लामिक आतंकवाद सरहद पार पनप रहा है, वहीं हिंदू आतंकवाद देश की सरजमीं पर ही पनपाया जा रहा है।
दूसरी तरफ भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा का सियासी चेहरा जमात-उद-दावा का प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद शिंदे को बधाई देते हुए उनके बयान की आड़ में खून से सना अपना दामन धोने की कोशिश में दिखा। वो खुश दिखा कि भारत में आतंकवाद को मजहब में बांट कर देखा जो जा रहा है।
जमात-उद-दावा का प्रमुख हाफिज़ सईद का कहना है कि अल्लाह के करम से यह एक बहुत बड़ी बात है कि भारत के गृह मंत्री ने साफ मान लिया है कि भारत में ही दहशतगर्द पनप रहे हैं। साफ दिख रहा है कि हमपर जबरदस्ती इल्जाम लगाया जाता है।
जाहिर है संघ के कानों में ये बयान जैसे शीशा उड़ेल गया। तिलमिला कर उसने पाकिस्तान की गोद में बैठे सईद के बयान के लिए भी शिंदे को ही जिम्मेदार करार दिया। शिंदे को आतंकवादियों का डार्लिंग कहा गया। आरएसएस प्रवक्ता राम माधव के मुताबिक शिंदे आतंकवादियों के डार्लिंग हैं। लश्कर-ए-तैय्यबा और जमात-उद-दावा जैसे प्रतिबंधित संगठन गृह मंत्री की वाहवाही कर रहे हैं। देश के गृह मंत्री जैसे ऊंचे पद पर बैठकर हिंदुओं को आतंकवादी घोषित करने का निंदनीय काम किया है।
लेकिन सोनिया और मनमोहन की मौजूदगी में शिंदे की जुबान फिसली नहीं थी कि सरकार बैकफुट पर जाती, सो बवाल के बावजूद सरकार और पार्टी शिंदे के साथ खड़ी हो गई। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ के मुताबिक हम सब जानते हैं कि बीजेपी, आरएसएस का हिस्सा है। बीजेपी और आरएसएस की बीच जो विवाद की परिस्थितियां सामने आईं हैं, उससे ध्यान हटाने की ये कोशिश है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के मुताबिक आरएसएस के लोग आतंकी गतिविधि में शामिल हैं।
जाहिर है, दोनों ओर से पेशबंदी हो चुकी है। लेकिन इन सबके बीच कई सवाल भी हैं। सुशील शिंदे के इस बयान का आखिर मतलब क्या है? क्या कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर नए ध्रुवीकरण की कोशिश में है? क्या कांग्रेस का इरादा एनडीए में बीजेपी के सहयोगियों पर दवाब बनाने का है?क्या आतंकवाद को मजहब में बांटने से देश के बाहर बैठे आतंकी गुटों को फायदा नहीं मिलता? सियासी गलियारे में गूंज रहे इन सवालों का रिश्ता सीधे, अगले आम चुनाव से है, जिसकी तैयारी में कांग्रेस और बीजेपी दोनों जुट गई हैं।



अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज