स्वीकारता हूं, मोदी BJP के सबसे लोकप्रिय नेता: राजनाथ

इलाहबाद में विश्व हिंदू परिषद की मार्गदर्शक बैठक में पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह से आईबीएन7 के पॉलिटिकल एडिटर सुकेश रंजन के खास सवाल जवाब।

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  • Last Updated: February 6, 2013, 1:00 PM IST
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नई दिल्ली। इलाहबाद में विश्व हिंदू परिषद की मार्गदर्शक बैठक में पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राम मंदिर मुद्दे पर अपनी आस्था प्रकट की। राजनाथ के विहिप की बैठक में पहुंचने से बैठक में पॉलिटिक्ल टच भी देखा गया। राम मंदिर मुद्दे को लेकर बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से आईबीएन7 के पॉलिटिकल एडिटर सुकेश रंजन के खास सवाल जवाब।

सुकेश रंजन: विहिप की बैठक तो होती है। जिस तरह से चुनाव नजदीक आ रहे है और विहिप राम मंदिर मुद्दे को पूरा जोर लगा रही है। ऐसे में आप विहिप की बैठक में जाते हैं, इससे यह मामला अहम हो जाता है, क्या आपको ऐसा लगता है।

राजनाथ सिंह: मैं संगम स्नान करने आया था। मैं पिछली बार भी आया था। यहां सभी साधू-महात्मा एकत्रित थे, इसलिए मैं सिर्फ आशीर्वाद लेने गया था। आपने भी देखा है।



सुकेश रंजन: पिछली बार जब महाकुंभ हुआ था तब आप मुख्यमंत्री थे। लेकिन इस बार आप पार्टी के अध्यक्ष हैं। उस बैठक में सिर्फ संत महात्मा ही नहीं थे, उसमें वीएचपी के लोग भी मौजूद थे जो आपके साथ जुड़े रहे हैं। जिनके साथ आपकी बैठकें होती हैं और वे राम मंदिर के मुद्दे को दौबारा तेजी से उठा रहे हैं।
राजनाथ सिंह: विश्व हिंदू परिषद के लोग संत महात्माओं के संपर्क में तो रहते ही हैं। जहां भी संत समागम होता है वहां पर वे सभी लोग जाते हैं। इसलिए वे सब वहां पर उपस्थित थे और कुछ नहीं।

सुकेश रंजन: जैसा अभी माहौल है, 2014 में चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी 2004 और 2009 में परास्त हुई। उसके बाद कहा जा रहा है कि बीजेपी ने जिस मुद्दे को छोड़ा है, उसे छोड़ने के बाद बीजेपी को कुछ मिला नहीं है। हर बार चुनाव में उसकी सीटें घटी हैं। ऐसे में क्या बीजेपी वापस उस मुद्दे पर लौट रही है।

राजनाथ सिंह: भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनैतिक यात्रा जिस विचार धारा के साथ शुरू की, उस विचार धारा पर पार्टी आज भी है और आगे भी रहेगी। विचार धारा को छोड़ना या वापस लौट रही है, कहना गलत होगा।

सुकेश रंजन: वीएचपी के नेता अशोक सिंघल ने कहा है कि बीजेपी ने धारा 370 को छोड़ दिया, राम मंदिर को छोड़ दिया। ऐसे में आप अपने सहयोगियों को क्या कहेंगे।

राजनाथ सिंह: कुछ ऐसे मुद्दे है जैसे धारा 370 हुई, गौरक्षा या राम मंदिर मुद्दा हुआ, इनमें संसद को ही कानून बनाना है। संसद को कानून बनाने के लिए किसी भी दल का स्पष्ट बहुमत न हो, तब तक उसे कानून बना पाना मुश्किल होगा। लेकिन जहां तक सवाल मुद्दों की प्रतिबद्धता का है, राम मंदिर का प्रश्न तो यह तब खड़ा होगा जब हमें बहुमत हासिल हो।

सुकेश रंजन: लोगों का कहना है जब से बीजेपी ने राम मंदिर मुद्दे को पीछे छोड़ा है, तभी से बीजेपी की सीटें घटी हैं। ऐसे में क्या बीजेपी फिर से हिंदुत्व या राम मंदिर मुद्दे की ओर लौट रही है।

राजनाथ सिंह: राम मंदिर भूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। इस पर हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी प्रतिबद्धता रहेगी भी जब तक भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता है क्योंकि हम लोग भगवान राम को अपना आराध्य देव मानते हैं। हाई कोर्ट ने भी अपना फैसला देते हुए भूमि को राम जन्मभूमि माना है।

सुकेश रंजन: क्या आप चाहेंगे कि संसद कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण कराए।

राजनाथ सिंह: संसद कानून बना सकती है और कोई नहीं बना सकता। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने को है। अगर भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिले और मंदिर निर्माण में कानून बनाने की जरूरत हुई तो हम कानून भी बनाएंगे। लेकिन इसके लिए स्पष्ट बहुमत की जरूरत है। अगर स्पष्ट बहुमत मिला तो हम राम मंदिर कानून बनाकर काम पूरा करेंगे।

सुकेश रंजन: विश्व हिंदू परिषद के बड़े नेता अशोक सिंघल कह रहे हैं कि एक जमाने में जैसी छवि नेहरू की होती थी आज वैसी ही मोदी की है। वो कह रहे हैं कि बीजेपी को मोदी को आगे बढ़ाना चाहिए। क्या आपको भी ऐसा लगता है।

राजनाथ सिंह: मैं किसी के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता हूं। विश्व हिंदू परिषद एक बड़ी संस्था है। वह अपने विचार प्रकट कर सकती है और भी संस्था अपने विचार प्रकट करती है। लेकिन जहां तक मोदी का सवाल है, मोदी बीजेपी के सबसे अधिक लोक प्रिय नेता है और मैं इसे स्वीकार करता हूं।

सुकेश रंजन: आप बार-बार कहते हैं कि बीजेपी अपने प्रधानमंत्री की घोषणा पार्लियामेंट की बोर्ड में घोषित करेगी। लेकिन जिस संस्थाओं को आप मानते हैं जैसे साधू संत, वीएचपी जब मोदी को पीएम पद की दावेदारी की बात करते हैं तो आपको क्या लगता है, इसमें कोई तथ्य होगा।

राजनाथ सिंह: मैं किसी के स्टेटमेंट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता हूं। एक बात कहना चाहता हूं कि हम लोग पार्लियामेंट की बोर्ड में तय करते हैं कि किसे कौन सी जिम्मेदारी देनी चाहिए।
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