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कोल ब्लॉक आवंटन में तोड़े गए नियम-कानूनःसुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन को मंगलवार को अवैध ठहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला मनमाना मालूम पड़ता है और इसके लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह कानून-सम्मत नहीं लगती।

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन को मंगलवार को अवैध ठहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला मनमाना मालूम पड़ता है और इसके लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह कानून-सम्मत नहीं लगती।

कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटले की जांच से संबंधित जानकारी केंद्र सरकार के साथ साझा न करने का निर्देश देते हुए कहा कि जिस प्रक्रिया के बारे में केंद्र सरकार बता रही है, प्रथम दृष्टया वह उचित व कानून-सम्मत नहीं लगती।

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2006 से लेकर 2009 के बीच 68 कंपनियों को देश भर में 151 कोयला खदानें आवंटित की गईं। ज्यादातर आवंटन तर्कहीन नजर आते हैं। कंपनियों को बिना उनका पिछला रिकॉर्ड देखे ही खदान दे दी गईं। ये भी नहीं देखा गया कि कंपनियां कोयला निकालने में सक्षम हैं या नहीं। कई कंपनियों ने अपने बारे में गलत जानकारी दी, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया।



कोर्ट ने सीबीआई को इस बाबत एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से ये भी पूछा है कि क्यों कुछ ही खास कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटन के लिए चुना गया। कोर्ट ने कहा कि आवंटन में किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
वकील एमएल शर्मा ने कहा कि सीबीआई ने ये बात मानी है कि आवंटन में अनियमितताएं हैं और इसका कोई मापदंड नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपने ये किसी राजनेता या अथॉरिटी से शेयर की है। इसके जवाब में सीबीआई ने कहा कि नहीं, उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है। तब कोर्ट ने कहा कि ये सभी रिपोर्ट सीक्रेट रहेंगी और सील बंद लिफाफे में ही कोर्ट को दी जाएंगी। इसके बाद कोर्ट यह तय करेगा कि यह आवंटन किसी आधार पर हुआ है या नहीं। अगर ऐसा पता चलता है कि किसी आधार पर यह आवंटन नहीं हुआ तो इसपर कड़े कदम उठाए जाएंगे।





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