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फिर विवादों में शिंदे, लोकसभा में एक ही बयान दो बार पढ़े

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे गुरुवार को लोकसभा में श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले को लेकर अपना बयान दो बार पढ़ गए।

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे गुरुवार को लोकसभा में श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले को लेकर अपना बयान दो बार पढ़ गए।

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे गुरुवार को लोकसभा में श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले को लेकर अपना बयान दो बार पढ़ गए।

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    नई दिल्ली। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे गुरुवार को लोकसभा में श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले को लेकर अपना बयान दो बार पढ़ गए। संसद के सूत्रों के मुताबिक, जब एक अधिकारी के इस ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद शिंदे रुके। विपक्षी बीजेपी सदस्यों ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया।

    पुलिस अधिकारी से नेता बने और त्वरित तरक्की पाने वाले महाराष्ट्र के इस नेता के लिए विवाद कोई नया नहीं है। राजनीति में आने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बाद में केंद्रीय मंत्री तक का सफर शिंदे ने पूरा किया है।

    हाल ही में शिंदे को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंकवाद से जोड़ने संबंधी बयान पर माफी मांगनी पड़ी। हैदराबाद में हुए आतंकवादी हमले में खुफिया विफलता के कारण वे विपक्ष की नजर में आंख की किरकिरी बने। इस मुद्दे पर संसद में सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर रही, क्योंकि शिंदे ने कहा कि विस्फोट की खुफिया सूचना सरकार को मिली थी।

    संसद पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरु को नौ फरवरी को फांसी पर चढ़ाए जाने के मामले में उसके परिवार को सूचित करने में अपनाए गए तरीके और परिवार को बुनियादी मानवीय औपचारिकता निभाने में विफलता को लेकर भी शिंदे आलोचना के शिकार बने।

    पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक की यात्रा के दौरान मलिक के विवादास्पद बयान का माकूल उत्तर नहीं देने के लिए बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने शिंदे को निशाने पर लिया था। मलिक ने मुंबई पर 26/11 हमले के मुख्य सजिशकर्ता हाफिज सईद और बाबरी मस्जिद को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी। मलिक ने 2008 में मुंबई पर हुए हमले की तुलना 1992 के अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने से की थी।

    बाद में हालांकि मलिक ने यह कह कर सफाई दी कि उनके कहने का गलत अर्थ लगा लिया गया। शिंदे को अगस्त 2012 में गृह विभाग का भार पी चिदंबरम के वित्त मंत्री बनाए जाने के बाद दिया गया। प्रणब मुखर्जी के जुलाई महीने मंक राष्ट्रपति पद पर चुने जाने के बाद उन्हें लोकसभा में सदन का नेता भी बनाया गया।

    शिंदे को कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी की पसंद माना जाता है। माना जाता है कि पार्टी नेतृत्व के साथ वफादारी निभाने के ईनाम के रूप में उन्हें देश के गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाजा गया है।


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