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चर्चा: क्या पूर्व कोल सचिव के बयानों पर पीएम को बोलना चाहिए?

पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख ने सीबीआई जांच के तौर-तरीके पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि अगर एफआईआर में मेरा नाम है तो प्रधानमंत्री का क्यों नहीं।

  • News18India
  • Last Updated: October 16, 2013, 4:32 PM IST
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक बार फिर कोयले की कोठरी में घिरते दिख रहे हैं। पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख ने सीबीआई जांच के तौर-तरीके पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि अगर एफआईआर में मेरा नाम है तो प्रधानमंत्री का क्यों नहीं। दरअसल हिंडाल्को को हुए एक कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में सीबीआई ने पारख और कुमार मंगलम बिड़ला को आरोपी बनाया है। दोनों का नाम सीबीआई की एफआईआर में है। अब पूर्व कोयला सचिव पारख पूछ रहे हैं कि अगर मेरा नाम एफआईआर में है तो प्रधानमंत्री का नाम क्यों नहीं। क्योंकि 2005 में हुए आबंटन के वक्त कोयला मंत्रालय मनमोहन के ही पास था, और फाइल पर आखिरी दस्तखत प्रधानमंत्री के ही हैं।

दरअसल कोयला घोटाले की आंच एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक पहुंच रही है। कोयला घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने 2005 में हिंडाल्को को हुए एक आवंटन के मामले मे कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख को आरोपी बना लिया है। दोनो के नाम बाकायदा एफआईआर में हैं। लेकिन पी सी पारख का कहना है कि बिड़ला को हुआ ये आवंटन प्रधानमंत्री की दस्तखत से हुआ था जो कोयला मंत्री भी थे।

पारख की मानें तो पहले कोल ब्लॉक का आबंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नैवेली को हुआ था। लेकिन इस बाबत आदेश जारी नहीं हुआ थे। इस बीच पारख से मिलने कुमार मंगलम बिड़ला आए। उन्होंने उनके ऑफिस में बाकायदा प्रेजेंटेशन देकर समझाया कि इस कोल ब्लॉक के आवंटन में उन्हें वरीयता मिलनी चाहिए। पारख के मुताबिक मेरिट के आधार पर उन्होंने नैवेली के साथ बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को भी साझा आबंटन की फाइल पीएमओ भेज दी। लेकिन सरकार के मंत्री पीएम का नाम उठाने पर ऐतराज जता रहे हैं।
कोयला घोटाले के मामले में कांग्रेस को हमेशा विपक्ष की मांग के आगे बैकफुट पर जाना पड़ा है। विपक्ष प्रधानमंत्री को संसद के भीतर इस मामले में जवाब देने पर भी मजबूर कर चुका है। ऐसे में एक बार फिर सरकार सांसत में दिख रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई तक सरकार और कांग्रेस की सांस अटकी ही रहेगी। इस मामले पर आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख से बातचीत की। पारख ने इस मसले पर बहुत खुल कर अपना पक्ष रखा। वहीं एजेंडा में इसी मुद्दे पर चर्चा में शामिल थे लखनऊ से कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह, बीजेपी के प्रकाश जावडेकर और पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम। (वीडियो देखें)
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