आदर्शः दागी अफसरों पर एक्शन, नेताओं को छूट!

सरकार ने ये मानने से इनकार किया है कि इस मामले में किसी नेता या मंत्री पर आपराधिक मामला बनता है यानी गाज अफसरों पर ही गिरेगी।

  • News18India
  • Last Updated: January 2, 2014, 2:28 PM IST
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नई दिल्ली। सोनिया और राहुल गांधी के सख्त एतराज के बाद महाराष्ट्र सरकार ने आदर्श जांच रिपोर्ट पर यू-टर्न ले लिया। सरकार ने अब इस सिलसिले में जस्टिस पाटिल की रिपोर्ट को काफी हद तक स्वीकार कर लिया। हालांकि सरकार ने ये मानने से इनकार किया है कि इस मामले में किसी नेता या मंत्री पर आपराधिक मामला बनता है यानी गाज अफसरों पर ही गिरेगी। उधर, बीजेपी ने आरोप लगाया है कि सरकार नेताओं को बचाने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले सरकार ने इस रिपोर्ट के उस हिस्से को खारिज कर दिया था जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों और नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाया गया था। इस फैसले का विपक्ष ने भारी विरोध किया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी फैसले पर पुनर्विचार की बात कही थी। आखिरकार गुरुवार को लगभग छह घंटे चली कैबिनेट की बैठक में रिपोर्ट पर पुनर्विचार हुआ और उसे मंजूर कर लिया गया। अब खुद मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

चव्हाण ने कहा कि पर्यावरण विभाग, नगर विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जो सिफारिश कमेटी ने की है उसमें अगर अनियमितता है, तो उसपर भी कार्रवाई की जाएगी। जो भी व्यक्ति इस संस्था का सदस्य नहीं हो सकता, फिर भी बन गया, ऐसे मामले निकाले जाएंगे। 25 ऐसे सदस्य हैं जो पात्र नहीं थे फिर भी उनको बनाया गया है। इन 25 अपात्र लोगों के खिलाफ सरकार और राजस्व विभाग कार्रवाई करेगा। जमीन के उपयोग पर भी धांधली हुई है। उसकी भी जांच की जाएगी। एमएसजेडए की जमीन का गलत इस्तेमाल किया गया है। पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं ये देखा जाएगा। आदर्श सोसायटी का ये निर्माण अनधिकृत है और इसे गिरा देना चाहिए, ये सेंट्रल अथॉरिटीज का कहना है।



लेकिन इस यूटर्न में एक छिपा हुआ टर्न भी है। रिपोर्ट में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजीराव निलंगेकर पाटिल की भूमिका पर उंगली उठाई गई थी। लेकिन सरकार की नजर में उनकी गलतियां अपराध की श्रेणी में नहीं आतीं यानी गाज सिर्फ अधिकारियों पर गिरेगी। चव्हाण ने कहा कि किसी भी राजनेता पर संरक्षण के लिए कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि कोई भी अपराध साबित नहीं हुआ है। सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख, निलंगेकर, राजेश टोपे और सुनील तटकरे पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।



पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ कर दिया है कि अब कोई नई एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी। उनका कहना है कि इस मामले में पहले से ही एफआईआर और चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। नेताओं और अफसरों की बेनामी संपत्ति की जांच सीबीआई जारी रखेगी। फिलहाल लगभग 12 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है। उधर, सरकार के बदले रुख के बावजूद बीजेपी ने उसपर भ्रष्टाचारियों को बचाने का आरोप लगाया है।

बीजेपी नेता एकनाथ खड़से ने कहा कि मंत्रियों को छूट देने की कोशिश की गई है। मंत्रियों को बचाने और अफसरों को फंसाने की कोशिश की गई है। राहुल गांधी के दबाव में ये मीटिंग हुई है। महाराष्ट्र का मंत्रिमंडल दबाव में काम करता लगता है। यही नहीं, विपक्ष ने इस मामले में कोर्ट में जाने की बात कही है। साफ है कि सरकार के यू टर्न के बावजूद आदर्श को लेकर उसकी परेशानी जल्द कम नहीं होगी।

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