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अमेठी से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना रिश्ता

अमेठी संसदीय क्षेत्रों से नेहरू परिवार का पुराना रिश्ता है। नेहरू फूलपुर सांसद बने लेकिन उनके दामाद फिरोज गांधी ने रायबरेली को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना।

अमेठी संसदीय क्षेत्रों से नेहरू परिवार का पुराना रिश्ता है। नेहरू फूलपुर सांसद बने लेकिन उनके दामाद फिरोज गांधी ने रायबरेली को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना।

अमेठी संसदीय क्षेत्रों से नेहरू परिवार का पुराना रिश्ता है। नेहरू फूलपुर सांसद बने लेकिन उनके दामाद फिरोज गांधी ने रायबरेली को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना।

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    लखनऊ। अमेठी और रायबरेली संसदीय क्षेत्रों से नेहरू गांधी परिवार का बहुत पुराना रिश्ता है। पंडित नेहरू खुद तो फूलपुर से सांसद बने, लेकिन उनके दामाद फिरोज गांधी ने रायबरेली को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना। फिरोज गांधी ऐसे सांसद थे जो अपने गढ़ और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आधारित प्रश्नों और वाक पटुता से संसद में अपनी ही पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर देते थे।

    वहीं फिरोज गांधी के निधन के बाद रायबरेली की खाली पड़ी सीट पर इंदिरा गांधी ने चुनाव लड़ने के लिए स्वीकृति दी और आजीवन (1977 से 1980 को छोड़कर) वह संसद में रायबरेली का प्रतिनिधित्व करती रहीं। संजय गांधी के अमेठी में सक्रिय होने के साथ ही देश में आपातकाल घोषित हो चुका था। इसके बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनावों में संजय गांधी और इंदिरा गांधी की बुरी तरह हार हुई थी। इसके साथ ही उत्तर भारत में कांग्रेस बुरी तरह से पराजित हुई। यूपी, और बिहार में खाता ही नहीं खुला।


    पार्टी की आपसी खींचतान और वैचारिक मतभेद के कारण इस सरकार का जल्द ही पतन हो गया और 1980 में संपन्न मध्यावधि चुनाव में इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस की वापसी हुई। इंदिरा रायबरेली से फिर निर्वाचित हुईं, जबकि संजय गांधी अमेठी के सांसद बने, लेकिन एक विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत हो गई। गांधी परिवार ने कुछ समय बाद विभिन्न नेताओं के प्रयास के बाद राजीव गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारा और वह 1981 में अमेठी से सांसद बने और अपने जीवन के अंतिम समय (20 मई 1991) तक संसद में अमेठी की रहनुमाई करते रहे।

    31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही महीनों के बाद हुए लोकसभा चुनाव में सहानुभूति लहर का बेहद प्रभाव रहा और कांग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाने की वजह से विपक्ष में बैठी। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के ही समर्थन से विश्वनाथ प्रताप सिंह जनता दल की अगुवाई वाली सरकार में प्रधानमंत्री बने।

    आखिरकार देश फिर एक और चुनाव की ओर बढ़ ही रहा था कि इसी दौरान 1991 में चुनाव अभियान के दौरान ही राजीव गांधी की नृशंस हत्या कर दी गई। गांधी परिवार के लिए ये अब तक का सबसे बड़ा झटका था, क्योंकि अकेली सोनिया के साथ उनके छोटे बच्चे राहुल और प्रियंका भी थे। संयोगवश शीघ्र ही संसदीय चुनाव घोषित हुए और इस बार सोनिया गांधी ने अपने पति की पूर्व संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस बीच रायबरेली की विशिष्ट सीट भी उनके अपनों के ही कब्जे में रही।

    गांधी परिवार ने इसके बाद सियासत को खुलकर अपनाया और बाद में सोनिया गांधी ने जहां अपनी सास इंदिरा गांधी की संसदीय सीट रही रायबरेली को अपनाया वहीं उनके बेटे राहुल गांधी ने पिता की सियासत का गढ़ रहे अमेठी का नेतृत्व किया। राहुल गांधी 2004 के आम चुनाव में पहली बार अमेठी से सांसद बने और उनके प्रतिनिधियों ने क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी संभाली।

    आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुमार विश्वास अब गांव-गांव जाकर इसी का सियासी फायदा उठाना चाह रहे हैं। वह खुलकर कह रहे हैं कि राहुल गांधी युवराज हैं अमेठी की जनता उनसे मिलने को तरस जाती है, लेकिन अगर वह जीते तो हर वक्त जनता के लिए उपलब्ध रहेंगे। कांग्रेस दिखावे के तौर पर भले ही कुछ भी कहती रहे, लेकिन जिस तरीके से उसे पार्टी के अंदर और बाहर विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वह कहीं न कहीं लोगों की उपेक्षा और क्षेत्रीय लोगों से दूरी का नतीजा है।

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