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कोलगेट: चार्जशीट में देरी के लिए CBI को फटकार

आईएएनएस
Updated: March 1, 2015, 1:10 PM IST
कोलगेट: चार्जशीट में  देरी के लिए CBI को फटकार
सीबीआई ने कोल स्केम में नवभारत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड और इसके दो निदेशकों के खिलाफ पहली चार्ज शीट दाखिल की है। वहीं चार्जशीट में देरी के लिए SC ने CBI फटकार लगाई।

सीबीआई ने कोल स्केम में नवभारत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड और इसके दो निदेशकों के खिलाफ पहली चार्ज शीट दाखिल की है। वहीं चार्जशीट में देरी के लिए SC ने CBI फटकार लगाई।

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नई दिल्ली। सीबीआई ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में नवभारत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड और इसके दो निदेशकों के खिलाफ सोमवार को अपना पहला आरोप-पत्र दाखिल किया। सीबीआई ने इस मामले में कंपनी तथा इसके दो निदेशकों, पी. त्रिविक्रम प्रसाद और वाई. हरीशचंद्र प्रसाद के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत की न्यायाधीश मधु जैन की अदालत में चार्ज-शीट दाखिल कर दी है। वहीं सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई।
पहली चार्ज-शीट में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने अपने आरोप-पत्र में कहा है कि नवभारत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड ने 'छलपूर्वक' दावा किया कि उसके पास कोयला खदानें पाने के लिए जरूरी शुद्ध संपत्ति है।
सीबीआई के मुताबिक, जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत जानबूझकर इस संबंध में कंपनी की ओर से दिए गए दस्तावेजों की जांच नहीं की। नवभारत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड का 2010 में एस्सार समूह ने अधिग्रहण किया था और कंपनी को रामपिया और दीप साइड कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे। गौरतलब है कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि सरकार ने गलत तरीके से कोल ब्लॉक आबंटित किए थे, जिससे सरकार को 1.86 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आबंटन 2005 से लेकर 2010 के बीच किए गए थे। इस दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अधीन था और वे भी इस जांच के घेरे में हैं।
चार्जशीट में देरी के लिए CBI को फटकार



कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से संबंधित पांच मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने में हुई देरी के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को सीबीआई को फटकार लगाई।
सीबीआई की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र सरन ने आरोप पत्र दाखिल करने के लिए जब चार सप्ताह का समय मांगा तो न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की पीठ ने कहा, "यह अति है। आप ऐसा नहीं कर सकते। सरन ने न्यायालय से कहा कि आरोप पत्र की जांच की जरूरत है और इसमें चार सप्ताह लगेगा। इस पर न्यायालय ने पूछा कि आप ने मोहलत मांगी, हमने आपको मोहलत दी। आपने ने वकील मांगे, हमने आपको दिए। आपने जो मांगा हमने आपको दिया, फिर भी यह विलंब क्यों।



अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने न्यायालय को याद दिलाया कि मामले की पिछली सुनवाई के दौरान 10 फरवरी को सीबीआई ने कहा था कि छह आरोप पत्र तैयार हैं और जल्द ही उन्हें दाखिल कर दिया जाएगा। इस पर न्यायालय ने कहा कि यदि आप वादा करते हैं, तो उसे पूरा कीजिए।
न्यायालय ने यह बात अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज द्वारा दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कही। याचिकाओं में केंद्र सरकार द्वारा अनियमितता के साथ आवंटित कोयला ब्लॉकों को रद्द करने की मांग की गई है। भूषण ने कहा कि आरोप पत्र में देरी जानबूझ कर की गई है।

न्यायमूर्ति लोढ़ा ने हालांकि सीबीआई को 28 मार्च तक यानी दो सप्ताह की मोहलत दे दी, लेकिन यदि सीबीआई ने ठीक से काम नहीं किया तो रिपोर्ट की जांच के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त से कहा जाएगा।

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First published: March 10, 2014, 10:55 AM IST
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