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सतपाल के BJP में आने पर कहीं खुशी-कहीं गम

आईएएनएस
Updated: March 1, 2015, 2:04 PM IST
सतपाल के BJP में आने पर कहीं खुशी-कहीं गम
पौड़ी संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद सतपाल महाराज के बीजेपी में शामिल होने पर प्रदेश के बीजेपी नेता जहां बहुत खुश हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में चिंता के बादल छा गए हैं।

पौड़ी संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद सतपाल महाराज के बीजेपी में शामिल होने पर प्रदेश के बीजेपी नेता जहां बहुत खुश हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में चिंता के बादल छा गए हैं।

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देहरादून। पौड़ी संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद सतपाल महाराज के बीजेपी में शामिल होने पर प्रदेश के बीजेपी नेता जहां बहुत खुश हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में चिंता के बादल छा गए हैं। नई दिल्ली में कांग्रेस सांसद सतपाल महाराज के बीजेपी की सदस्यता लेने की खबर जैसे ही न्यूज चैनलों और सोशल साइट पर नुमाया हुई, आम और खास दोनों तरह के लोग अचंभित हो गए। सतपाल कांग्रेस के टिकट पर पौड़ी से सांसद चुने गए थे। उनकी पत्नी अमृता रावत प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

साल 2012 में जब विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार बनाने की जुगत में थी तब मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सतपाल महाराज भी शामिल थे। उसी बीच टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा को पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री पद पर काबिज कर दिया। तभी से ही सतपाल पार्टी हाईकमान से खफा चल रहे थे। राजनैतिक प्रेक्षकों के मुताबिक, सतपाल ने बहुगुणा के मुख्यमंत्रित्व काल में हमेशा विरोधी गुटों को हवा देने का काम किया, जब्कि उनकी पत्नी अमृता रावत विधायक होने के कारण कैबिनेट मंत्री पद पर काबिज थीं।

जून में केदारघाटी आपदा के बाद जब बहुगुणा के खिलाफ फैले असंतोष से आजिज आकर कांग्रेस आलाकमान ने उनके स्थान पर हरिद्वार से सांसद और केन्द्र में मंत्री पद पर आसीन हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाने की कवायद की तो भी सतपाल ने उस पद के लिए खुद की दावेदारी पेश की। मगर आलाकमान ने उनकी दावेदारी पर कोई तवज्जो नहीं दी। इससे सतपाल की नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई।

सोलहवीं लोकसभा के आम चुनावों की घोषणा के बाद टिकट वितरण में लगातार मुख्यमंत्री हरीश रावत को केन्द्रीय नेतृत्व ने जिस तरह तवज्जो देना शुरू किया, उससे सतपाल महाराज को अपना अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा। जिसकी परिणति उनके भाजपा में शामिल होकर हुई। जैसे ही यह खबर समाचार चैनलों और सोशल साइटस पर प्रसारित हुई, उत्तराखंड के तमाम आम और खास लोग अचंभित हो गए। यहां तक कि कांग्रेस और बीजेपी के राज्य स्तरीय नेताओं में खलबली जैसी मच गई। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता शिल्पी अरोरा ने कहा कि सतपाल महाराज का बीजेपी में शामिल होने का फैसला उनका निजी है। उनकी पत्नी कांग्रेस की राज्य सरकार में मंत्री हैं, यह अलग बात है।



अरोरा ने कहा कि एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग पार्टियों में होते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि सतपाल के शामिल होने से पार्टी को उत्तराखंड ही नहीं ब्लकि देश भर में फायदा पहुंचेगा क्योंकि वह आध्यात्मिक गुरु भी हैं और देशभर में उनके असंख्य भक्त हैं। इसके साथ ही बीजेपी के गढवाल संयोजक और पूर्व विधायक महेन्द्र भट्ट ने गढवाल सांसद सतपाल महाराज द्वारा अपने हजारों समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता लेने के निर्णय को देर से लिया गया उचित कदम बताया है।

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First published: March 22, 2014, 4:22 AM IST
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