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क्या राहुल को रोक पाएंगे स्मृति और विश्वास?

कहीं भावनात्मक रिश्तों की दुहाई तो कहीं विकास के मुद्दे पर सांसद राहुल गांधी की खिंचाई। वीआईपी सीट के तौर पर गिनी जाने वाली अमेठी की ताजी तस्वीर कुछ ऐसी ही है।

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    अमेठी। कहीं भावनात्मक रिश्तों की दुहाई तो कहीं विकास के मुद्दे पर सांसद राहुल गांधी की खिंचाई। वीआईपी सीट के तौर पर गिनी जाने वाली अमेठी की ताजी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। यहां सात मई को मतदान है। राहुल को लगातार तीसरी बार संसद पहुंचाने के लिए गांधी परिवार ने एक बार फिर ताकत झोंक दी है। लेकिन राहुल का रास्ता रोक रहे हैं बीजेपी की स्मृति ईरानी और आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास।

    राहुल गांधी अपनी रैलियों में अमेठी को इंग्लैंड बनाने का वादा कर रहे हैं। दो बार के लगातार सांसद राहुल तीसरी बार मैदान में हैं। लेकिन उनकी राह इस बार थोड़ी मुश्किल दिख रही है। पहली बार अमेठी में राहुल को पुरजोर विरोध देखने को मिल रहा है। लोग विकास और रोजगार के मुद्दे पर खुलकर उनसे सवाल जवाब कर रहे हैं। माहौल भांप कर बहन प्रियंका ने अमेठी में डेरा डाल दिया है। वो लोगों की नाराजगी झेल रही हैं। मुस्कुराते हुए, रिश्तों की दुहाई देते हुए। राहुल भी इसी राह पर हैं।

    लेकिन विरोधी मौके की ताक में हैं। अमेठी की खराब सड़कें, बिजली पानी की कमी, राहुल का यहां कम आना मुद्दा बन गया है। अमेठी में गांधी परिवार को मिल रहे समर्थन पर सवाल नहीं है, लेकिन अब विरोध करने वाले चुप नहीं रहते।

    अमेठी से जुड़ी सुल्तानपुर सीट पर बीजेपी ने वरुण गांधी को उतारा है। ये सोच कर कि गांधी परिवार में वरुण, राहुल से ज्यादा लोकप्रिय होंगे। पहले अमेठी और सुल्तानपुर एक ही जिले का हिस्सा थे। राहुल और प्रियंका वरुण के खिलाफ प्रचार भी कर रहे हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि 2009 में करीब पौने चार लाख वोटों से चुनाव जीतने वाले राहुल हारेंगे तो नहीं पर उनकी जीत का अंतर बेहद कम होगा।

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