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क्या पवार के पावर से टूटे महाराष्ट्र के गठबंधन?

News18India.com
Updated: October 2, 2014, 2:23 PM IST
क्या पवार के पावर से टूटे महाराष्ट्र के गठबंधन?
हाल में ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कार्यालय मुंबई से गुजरात स्थानांतरित कर दिया गए। कोस्टल एकेडमी को भी मुंबई से गुजरात स्थानांतरित करने के प्रयास हुए थे।

हाल में ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कार्यालय मुंबई से गुजरात स्थानांतरित कर दिया गए। कोस्टल एकेडमी को भी मुंबई से गुजरात स्थानांतरित करने के प्रयास हुए थे।

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संजीव उन्हाले
मुंबई। महाराष्ट्र के तुलजापुर(तुलजा भवानी मंदिर) से कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार शुरू करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने आरोप लगाया कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की बीजेपी नेताओं से साठगांठ है। चव्हाण के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही महाराष्ट्र सरकार गिर गई और बिना समय गंवाए ही सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।


चव्हाण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे मुंबई से देश की वित्तीय राजधानी का दर्जा छीनने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि हाल में ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के कार्यालय मुंबई से गुजरात स्थानांतरित कर दिया गए। कोस्टल एकेडमी को भी मुंबई से गुजरात स्थानांतरित करने के प्रयास हुए थे। चव्हाण ने कृष्णा बेसिन से 25 टीएमसी फीट पानी मराठवाड़ा को न मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने एनसीपी नेताओं पर अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाया और गठबंधन में दरार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।



कांग्रेस के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी नेता शरद पवार बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में दरार के मास्टरमाइंड थे। संयोग से राज ठाकरे ने भी बुधवार को विदर्भ क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए यही आरोप लगाया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक ऐसा लगता है कि 24 सितंबर को विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की पहली लिस्ट की घोषणा कर चव्हाण ने जल्दबाजी कर दी। चव्हाण के इस कदम ने रामदास अठावले को नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन जाने के लिए प्रेरित किया।



अठावले महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं से मिले और खबरों के मुताबिक शरद पवार का संदेश पहुंचाया। इससे बीजेपी नेताओं के रवैये में एकाएक तब्दीली आ गई। सूबे के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने घोषणा की कि वो उनके साथ महायुती में रहे अपने गठबंधन मित्रों जैसे रामदास अठावले (आरपीआई-ए), राजू शेट्टी (स्वाभिमानी संगठन) और महादेव जानकार (एनएसपी) के साथ बने रहने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इससे पहले बीजेपी कोर कमेटी की आपात बैठक हुई और 25 साल पुराना गठबंधन समाप्त हो गया। ये घटना एनसीपी के कांग्रेस से रिश्ता तोड़ने की घोषणा के ठीक पहले हुई।


हालांकि, बीजेपी और एनसीपी दोनों ही चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना से इनकार कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के नेता सार्वजनिक रूप से आरोप लगा रहे हैं कि शरद पवार सबसे गैरभरोसेमंद राजनीतिज्ञ बन गए हैं।

एनसीपी के इनकार के बाद भी सच्चाई यही है कि वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल में उसकी भी भागीदारी रही थी। कांग्रेस नेता हर्षवर्धन पाटिल ने एनसीपी पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि एनसीपी ने अंतिम समय में हालात का फायदा उठाने के लिए फाइलों को पास कराने के लिए दबाव डाला।

अब बीजेपी-एनसीपी के बीच एक गठबंधन होना, बस वक्त की बात रह गया है। कांग्रेस खुलकर आरोप लगा रही है कि शरद पवार केंद्र की बीजेपी सरकार में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं।शरद पवार का राजनीतिक हालात के हिसाब से निष्ठाएं बदलने का इतिहास रहा है। प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट जिसमें सभी राइट और लेफ्ट ताकतें एक साथ आ गई थीं, की तरह राजनीतिक जानकारों के मुताबिक संभवत: शरद पवार इस समय भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
(संजीव उन्हाले, मराठी अखबार लोकमत, औरंगाबाद के एक्जीक्यूटिव एडिटर रहे हैं)

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First published: October 2, 2014, 2:23 PM IST
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