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कांग्रेस की रैली, खाली सीटें और हुंकार भरते नेता!

कांग्रेस की रैली, खाली सीटें और हुंकार भरते नेता!

मंच पर कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन उन्हें सुनने के लिए संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी। हालत ये थी कि मंच पर नेता ज्यादा और नीचे सुनने वाले कम थे।

मंच पर कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन उन्हें सुनने के लिए संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी। हालत ये थी कि मंच पर नेता ज्यादा और नीचे सुनने वाले कम थे।

मंच पर कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन उन्हें सुनने के लिए संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी। हालत ये थी कि मंच पर नेता ज्यादा और नीचे सुनने वाले कम थे।

    नई दिल्ली। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस ने सरकार को सड़क पर घेरने की कोशिश तो की, लेकिन उसकी ये कोशिश उम्मीदों के मुताबिक परवान चढ़ती नहीं दिखी। दरअसल, कांग्रेस ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अनुपस्थिति में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अध्यादेश के विरोध में प्रदर्शन किया। मंच सजा था। मंच पर कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन उन्हें सुनने के लिए संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखी। हालत ये थी कि अलीगढ़ से आए स्थानीय किसान नेता के कुछ समर्थकों की गिनती कम कर दें, तो मंच पर नेता ज्यादा और नीचे सुनने वाले कम थे।

    कांग्रेस की रैली 12 बजे से प्रस्तावित थी। मंच 11.30 बजे ही सजकर तैयार हो गया था। जयराम रमेश जैसे नेता 11.30 बजे से ही मंच पर पहुंच चुके थे। लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसद उनके साथ बैठे थे। लेकिन सामने सुनने वाला कोई नहीं था। सिवाय मंच से सटकर बैठे 25-30 लोगों के। कांग्रेस के बड़े नेता जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह, राज बब्बर, प्रदीप सरकार, अहमद पटेल, बी के हरिप्रसाद, दीपेंद्र हुड्डा, किशोर उपाध्याय जैसे लोग मंच पर थे, और आपस में चर्चा कर रहे थे।

    मंच के सामने भीड़ न दिखने पर कांग्रेसी नेताओं की सांसें अटक रही थीं। हालत ये हो गई थी, कि 12.45 बजे तक किसी भी नेता ने रैली को संबोधित ही नहीं किया। संबोधित करते भी तो किसे? भीड़ नदारद थी, वो भी फोटो खिंचाने में व्यस्त थी। मीडिया की ओबी वैन खड़ी थीं, और मीडियाकर्मी पीटीसी करने के लिए भीड़ तलाश रहे थे।

    कांग्रेसी नेताओं ने लगभग 12.45 बजे मंच से बोलना शुरू किया। सबसे पहले उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने हुंकार भरी। लेकिन लोगों को कोई फर्क ही नहीं पड़ा। जो थे, वो भी उठकर जा रहे थे। वहां का नजारा उस समय जिस किसी ने भी देखा, वो हैरान था। राज बब्बर और पीएल पुनिया जैसे नेता केंद्र सरकार को ललकारते रहे, लेकिन नारेबाजी का नाम नहीं था। वो तो भला हो युवा कांग्रेस का। जिसके कुछ कार्यकर्ता लगभग 1 बजे दोपहर में धरनास्थल पर पहुंचे, वर्ना धरने में शामिल लोगों से दो गुनी से भी अधिक संख्या सुरक्षाकर्मियों की दिख रही थी।

    कांग्रेस की रैली देखकर साफ पता लग रहा था कि हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में उसे 00 सीट क्यों मिलीं। भीड़ में शामिल तमाम कांग्रेसी ही रैली की स्थिति को देखकर चुटकियां ले रहे थे। संख्याबल में कांग्रेस की रैली से 10 गुना ज्य़ादा लोग पास ही हो रही बीएसएनएल कर्मियों की रैली में दिख रहे थे। बीएसएनएल कर्मी कल यूपीए सरकार के समय धरना करते थे, अब एनडीए सरकार के सामने भी डटे हुए हैं।

    Tags: Digvijay singh, Jantar mantar

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