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महाराष्ट्र में ठाकरे बनाम ठाकरे की नई जंग?

महाराष्ट्र की सियासत में जल्द ही दो युवराजों में टक्कर दिखाई दे सकती है। हो सकता है कि एमएनएस मुखिया राज ठाकरे अपने बेटे अमित ठाकरे को सियासत में उतारने का ऐलान कर दें।

महाराष्ट्र की सियासत में जल्द ही दो युवराजों में टक्कर दिखाई दे सकती है। हो सकता है कि एमएनएस मुखिया राज ठाकरे अपने बेटे अमित ठाकरे को सियासत में उतारने का ऐलान कर दें।

महाराष्ट्र की सियासत में जल्द ही दो युवराजों में टक्कर दिखाई दे सकती है। हो सकता है कि एमएनएस मुखिया राज ठाकरे अपने बेटे अमित ठाकरे को सियासत में उतारने का ऐलान कर दें।

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    मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में जल्द ही दो युवराजों में टक्कर दिखाई दे सकती है। हो सकता है कि कल एमएनएस मुखिया राज ठाकरे अपने बेटे अमित ठाकरे को सियासत में उतारने का ऐलान कर दें। अमित ठाकरे को शिवसेना के युवराज आदित्य ठाकरे का जवाब माना जा रहा है। आदित्य ने हाल के दिनों में युवाओं में अपनी अच्छी खासी पहचान बनाई है। परेशान एमएनएस अब इससे निपटने के लिए आदित्य को तैयार कर रही है।

    आदित्य ठाकरे को तो आप अच्छी तरह से पहचानते हैं। अपने पिता शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ ये राजनीति में सक्रिय हैं। सभाओं में, बैठकों में सक्रिय रुप से भाग लेते हैं। लेकिन दुसरे चेहरे के बारे में हमें थोड़ा आपको बताना पड़ेगा।

    अमित ठाकरे, ये सियासी युवराज हैं एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के बेटे और सियासी सूत्रों की माने तो इन्हें आदित्य ठाकरे के जवाब के तौर पर जल्द ही सियासत में उतारा जा सकता है और इसके लिए मराठी अस्मिता की सियासी बिसात एक बार फिर बिछाई जा रही है।

    हाल के कुछ दिनों में अमित ठाकरे ने मुंबई से जुड़े मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया है। यही नहीं एमएनएस ने मुंबई के सभी दुकानदारों और प्राइवेट संस्थानों को अपने बोर्ड लगाने की चेतावनी दे दी है। साथ ही सभी मोबाइल कंपनियों को कॉल सेंटर में सिर्फ मराठी भाषी लोगों को ही नियुक्त करने के लिए कहा है। साथ ही उन्हें दस दिनों का अल्टिमेटम भी दे दिया गया है।

    लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एमएनएस ने बुरी मात खाई। कहा जा रहा है कि मराठी मुद्दे के जरिए ही फिर से अपनी सियासी जमीन खोजने और राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे की राजनीति में धमाकेदार एंट्री करना चाहती है। राज ठाकरे शनिवार को अपने सभी नेताओं को संबोधित करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है उसी दौरान वो अमित के सियासत में उतरने का ऐलान कर सकते हैं।

    लेकिन सवाल ये है कि क्या अमित ठाकरे आदित्य ठाकरे को टक्कर दे पाएंगे? महाराष्ट्र में अब अगला बड़ा चुनाव बीएमसी का है जो 2017 में होने वाला है, शिवसेना सूत्रों की माने तो अभी से इसकी जिम्मेदारी आदित्य ठाकरे को दे दी गई है। आदित्य ने भी मुंबई से जुड़े मुद्दों को जोर शोर से उठाना शुरू कर दिया है। मेट्रो थङी प्रोजेक्ट के लिए गिरगांव में रहने वाले लोगों के विस्थापन को आदित्य ठाकरे बड़ा मुद्दा बनाने में जुटे हुए हैं। गिरगांव मराठी बहुल इलाका है इस इलाके में शिवसेना की भी अच्छी पकड़ है। विस्थापन को लेकर आदित्य फणड़वीस सरकार को चेतावनी भी दे चुके हैं।

    सियासी जानकारों की माने तो आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र की सियासत में काफी कम वक्त में ही अपनी पहचान बना ली है। मुंबई की नाइट लाइफ को फिर से जिंदा करने की उनकी कोशिशों ने उनका क्रेज युवाओं में काफी बढ़ा दिया है। सियासी जानकारों के मुताबिक एमएनएस के मुखिया राज ठाकरे को अपने आदित्य का तोड़ अपने बेटे अमित ठाकरे में ही नजर आ रहा है।

    मराठी अस्मिता के मुद्दे पर नए सिरे अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहें एमएनएस के लिए अब अमित ठाकरे ही सबसे बड़ी उम्मीद है। पिछले दो चुनाव में विकास और बदलाव के मुद्दे पर वोट करने वाले मराठी मतदाताओं पर इसबार भाषा और अस्मिता की राजनीति को कितना तवज्जो देंगे यह कहना फिलहाल मुश्किल है, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता की दो युवराजों की इस लड़ाई में आदित्य ठाकरे का पलड़ा बहुत भारी है।

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