‘आप’ में घमासान से दुविधा में दिल्ली के वोटर!

‘आप’ में घमासान से दुविधा में दिल्ली के वोटर!
वोटर इस घमासान के देखकर ये सोचने लगा है कि जिस पार्टी को उसने एक महीने पहले ऐतिहासिक बहुमत देकर सत्ता सौंपी क्या वो निजी महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ जाएगी।

वोटर इस घमासान के देखकर ये सोचने लगा है कि जिस पार्टी को उसने एक महीने पहले ऐतिहासिक बहुमत देकर सत्ता सौंपी क्या वो निजी महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ जाएगी।

  • Last Updated: October 15, 2015, 8:02 PM IST
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी खांसी के इलाज के लिए बैंगलुरू में हैं, वहीं दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं में सिर फुटौव्वल मची हुई है। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पीएसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और दिल्ली का आम वोटर इस घमासान के देखकर ये सोचने लगा है कि जिस पार्टी को उसने एक महीने पहले ऐतिहासिक बहुमत देकर सत्ता सौंपी क्या वो निजी महत्वाकांक्षाओं और अंतर्विरोधों की भेंट चढ़ जाएगी। आईबीएनखबर ने दिल्ली के वोटरों का मूड टटोलने के लिए उनसे बात की।
कंप्यूटर प्रोफेशनल योगेंद्र कुमार का कहना है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से हटाने का लोगों में गलत संदेश गया है। ऐसा लगता है जैसे केजरीवाल अपनी तानाशाही चला रहे हैं। योगेंद्र पूछते हैं कि क्या सिर्फ दिल्ली में ही भ्रष्टाचार है? अगर ऐसा नहीं है तो योगेंद्र यादव ने आम आदमी पार्टी के पूरे देश में विस्तार की जो बात कही, उसमें बुरा क्या है? अगर पार्टी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ती, तो उसे पंजाब जैसे राज्य में संभावनाएं कहां से दिखतीं? योगेंद्र यादव राजनीति के मंझे खिलाड़ी हैं। वहीं, प्रशांत भूषण के मामले पर योगेंद्र कुमार ने कहा कि प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने आम आदमी पार्टी के लिए जितना कुछ किया, उसका अरविंद केजरीवाल को शुक्रगुजार होना चाहिए। योगेंद्र ने कहा कि अगर प्रशांत भूषण नहीं होते, तो आम आदमी पार्टी आती ही नहीं। क्योंकि प्रशांत के केसों के दम पर आप ने जो खुलासे किए, वो होते ही नहीं। उन्हें पीएसी में वापस जोड़ना चाहिए।

मीडिया की छात्रा इफ्राह कायम का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सफलता उसकी एकता में है। अगर वो टूट गई, तो दिल्ली की तरह अन्य राज्यों में आम आदमी पार्टी कतई प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। दोनों नेताओं को पीएसी से हटाए जाने से लोगों में गलत संदेश गया है। ऐसा लगता है कि केजरीवाल सिर्फ उनकी सुनने वालों की ही सुनते हैं। दो अनुभवी लोगों को पीएसी से हटाने को वे गलत बताती हैं।

एशिया के सबसे बड़े कंप्यूटर मार्केट में से एक नेहरू प्लेस में चाय और पान मसाले की दुकान चलाने वाले राजीव का कहना है कि आम आदमी पार्टी को उन्होंने सिर्फ केजरीवाल के लिए वोट दिया था। वो तो प्रशांत भूषण का सिर्फ नाम जानते हैं, बाकि कुछ नहीं। ऐसे में पार्टी से हटाए जाने पर उस जैसे आम लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वो भ्रष्टाचार के खिलाफ अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के साथ खड़े रहेंगे।



दिल्ली में ऑटो रिक्शा चलाने वाले दिनेश शास्त्री का कहना है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को सहयोग दिया। आगे भी देते रहेंगे। लेकिन योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से अलग करना उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा। हालांकि दिनेश इस बात से आशस्त दिखे कि दोनों को पार्टी से नहीं निकाला गया, और जल्द ही उन्हें किसी और भूमिका में वो देख सकेंगे। दिनेश ने तो धमकिया लहजे में यहां तक कह दिया कि अगर ये सब चलता रहेगा, तो वे अगले चुनाव में किसी अन्य पार्टी पर विचार करेंगे।



सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे और दिल्ली के हालिया चुनावों पर नजर रखने वाले कुमार एम जे. का कहना है कि आम आदमी पार्टी किस दिशा में जा रही है। ये बात समझ से परे है। वो आम आदमी पार्टी को भी अन्य पार्टियों की तरह व्यक्ति केंद्रित बताते हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी के प्रति वो थोड़ा नरम रुख रखते हैं। कुमार एम जे का कहना है कि अरविंद केजरीवाल को पहले नरेंद्र मोदी की तरह खुद को साबित करना होगा वर्ना ये तानाशाही देख जनता उन्हें जमीन पर ला देगी। उन्होंने कहा कि निचले तबके के लोगों को योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के जाने से फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन समझदार लोग अब आम आदमी पार्टी से दूरी बनाकर चलेंगे।
मदनपुर खादर के रहने वाले राजेश कुमार ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की तरह व्यक्ति केंद्रित हो गई है। उन्हें नहीं लगता कि अरविंद केजरीवाल अकेले दम पर पार्टी को चला लेंगे। वहीं सुभाष सिंह ने कहा कि पहले लगा था कि आम लोग भी अब किसी पार्टी में जाकर राजनीति कर सकते हैं। लेकिन अब उन्हें या तो अरविंद केजरीवाल की हां में हां मिलाना होगा, या फिर पहले की तरह दूर बैठकर तमाशा देखना होगा। उन्होंने आम आदमी पार्टी को भी अन्य पार्टियों की तरह व्यक्तिकेंद्रित बताते हुए आड़े हाथों लिया।
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