Home /News /politics /

'कश्मीरी पंडित लौट आएं पर अलग बस्ती न बसाएं'

'कश्मीरी पंडित लौट आएं पर अलग बस्ती न बसाएं'

कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को दोबारा अलग जगह पर बसाए जाने की खबर पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। घाटी में अलगाववादी नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।

    नई दिल्ली। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को दोबारा अलग जगह पर बसाए जाने की खबर पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। घाटी में अलगाववादी नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। वहीं बीजेपी ने कश्मीरी पंडितों का साथ देने का वादा दोहराया है।

    कल सीएम मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद जारी की गई प्रेस रिलीज में बताया गया कि राज्य सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए जमीन देने के लिए तैयार है, ताकि विस्थापित कश्मीरी पंडितों को दोबारा वहां बसाया जा सके। इसी को लेकर अब घमासान की जमीन तैयार हो गई है।

    आज निर्दलीय विधायक रशीद ने विधानसभा के भीतर कशमीरी पंडितों को अलग टाउनशिप देकर बसाने की सरकार की योजना का विरोध किया। रशीद ने कहा कि ऐसा होने से आपसी सदभाव खत्म होगा। हम चाहते हैं कि पंडित भाई यहां पर आए, लेकिन अपने अपने गांवों और घरों में आएं, न कि अलग टाउनशिप में। कश्मीरी पंडितों को अलग से बसाने की योजना ठीक नहीं है।


    वहीं जेकेएलएफ के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने कहा कि यहां चुनाव शुरू होने से पहले ही आरएसएस ने कश्मीरी पंडितों के हवाले से कहना शुरू कर दिया कि हमें अलग शहर बसाना है। ये हमारा सियासी नहीं मजहबी अक़ीदा है, जितना हक़ हमें यहां रहने का है उतना ही उनका भी है। उनको हर एक किस्म का हक़ है यहां रहने का। कश्मीरी लोगों का अपना एक मिजाज है, ये पांच हजार साल पुरानी सभ्यता है।

    आज आप एक नया शहर बनाने की बात कर रहे हैं। ये वही जुमला है जिसके आधार पर इजराएल बना। आरएसएस कश्मीर में नफ़रत की आग फैलाना चाहता है। यहां इस समय दस हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडित रहते हैं। आरएसएस और मुफ़्ती मोहम्मद सईद कश्मीर में कौन सी आग लगाना चाहते हैं? यहां जो अल्पसंख्यकों के मंदिर और दुकानें हैं, इन्हें क्या आप खत्म करके अलग शहर मे बसाना चाहते हैं? ये जो मंसूबे हैं, इन्हें हम सफल नहीं होने देंगे। मुफ़्ती ने हमेशा मीडिया के जरिए गंदा रोल अदा किया है।

    वहीं बीजेपी विधायक रविंद्र रैना ने कहा कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को बंदूक की नोक पर हटाया गया था। आज 25 साल हो गए हैं। कश्मीरी पंडित दर दर की ठोकर खा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पहल की है कि हम मान सम्मान के साथ वापस बसाएंगे। हम पॉलिसी तैयार कर रहे हैं। लेकिन कश्मीर की पार्टियां विरोध कर रही हैं, इसका मतलब है कि उनकी नियत ठीक नहीं है। दोबारा उनको ऐसे हालत न देखने पड़े, उनके गांवों में या श्रीनगर मे कॉलोनी बनानी पड़ेगी तो बनाएंगे। उनको पाकिस्तान के सामने भीख मांगने के लिए नहीं छोड़ेंगे।

    Tags: BJP, Srinagar, Yasin malik

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर