अखिलेश ने इवांका के बहाने मोदी पर किया तंज,पूछा क्यों कर रहे अब वंशवाद का समर्थन

वंशवाद की राजनीति पर मोदी केे लगातार प्रहार के जवाब में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने अंदाज में निशाना साधा है.

News18Hindi
Updated: November 29, 2017, 8:05 AM IST
अखिलेश ने इवांका के बहाने मोदी पर किया तंज,पूछा क्यों कर रहे अब वंशवाद का समर्थन
वंशवाद की राजनीति पर मोदी केे लगातार प्रहार के जवाब में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने अंदाज में निशाना साधा है.
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Updated: November 29, 2017, 8:05 AM IST
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने राजनीतिक भाषणों में वंशवाद और भाई भतीजावाद जैसी प्रवृतियों को अपने निशानों पर रखते हैं.

हाल में गुजरात में विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार के दौरान भी पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि ,'गुजरात चुनाव विकास पर विश्वास और वंशवाद की राजनीति के बीच हो रहा है और प्रदेश की जनता गुजरात के बेटे के खिलाफ झूठ फैलाने की कांग्रेस पार्टी की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी.'

मोदी के विरोधाभास पर तंज

वंशवाद की राजनीति पर मोदी केे लगातार प्रहार के जवाब में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने अंदाज में निशाना साधा है.

अखिलेश ने अमरीकी राष्ट्रपति की बेटी इवां​का के स्वागत में मोदी और भारत सरकार तत्परता पर तंज करते हुए ट्ववीट किया है कि,'' विदेशी मेहमान का स्वागत है! वंशवाद का विरोध करनेवाले आज किसी विदेशी वंशज के स्वागत में हाथ बांधे खड़े हैं. ये विरोध का कैसा विरोधाभास है.''



अखिलेश के इस तंज के क्या हैं अर्थ
अखिलेश के इस तंज के कई अर्थ निकाले जा सकते हैं.
पहला अर्थ:शायद अखिलेश ने दरअसल इवांका के बहाने मोदी को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि वंशवाद की समस्या भारतीय नहीं अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर फैल चुकी है.
दूसरा अर्थ: वह मोदी ​की कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की आलोचनाओं का जवाब दे रहे हैं.

इस वक्त क्यों?
जानकारों का मानना है कि अखिलेश, इस तंज के बहाने एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं. मोदी की आलोचना के साथ साथ वह मोदी ट्रंप की बढ़ती दोस्ती को भी अपने निशाने पर ले रहे हैं.

जानकारों के अनुसार अखिलेश, मोदी की इस सियासी कमजोरी का फायदा उठाना चाहते हैं जोकि राजनीति के लिहाज सेे वाजिब ही है.

एक वक्‍त था जब मोदी और अखिलेश के बीच मधुर संबंध थे लेकिन उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनावाें के दौरान मोदी के दौरान इनके बीच दूरी बढ़ी जो अब तक कम नहीं हुई है.

 
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