कांग्रेस ने इशरत को लेकर पिल्लै के बयान पर उठाए सवाल, बीजेपी ने की तारीफ

पूर्व गृह सचिव जी. के. पिल्लै का इशरत जहां के लश्कर ए तैयबा से जुड़े होने पर हलफनामे को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। कांग्रेस ने उनके दावे के समय को लेकर सवाल उठाया है और आरोप लगाया है कि वह केवल बीजेपी के शब्दों को दोहरा रहे हैं।
पूर्व गृह सचिव जी. के. पिल्लै का इशरत जहां के लश्कर ए तैयबा से जुड़े होने पर हलफनामे को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। कांग्रेस ने उनके दावे के समय को लेकर सवाल उठाया है और आरोप लगाया है कि वह केवल बीजेपी के शब्दों को दोहरा रहे हैं।

पूर्व गृह सचिव जी. के. पिल्लै का इशरत जहां के लश्कर ए तैयबा से जुड़े होने पर हलफनामे को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। कांग्रेस ने उनके दावे के समय को लेकर सवाल उठाया है और आरोप लगाया है कि वह केवल बीजेपी के शब्दों को दोहरा रहे हैं।

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नई दिल्ली। पूर्व गृह सचिव जी. के. पिल्लै का इशरत जहां के लश्कर ए तैयबा से जुड़े होने पर हलफनामे को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। कांग्रेस ने उनके दावे के समय को लेकर सवाल उठाया है और आरोप लगाया है कि वह केवल बीजेपी के शब्दों को दोहरा रहे हैं। मुद्दे पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए बीजेपी ने ‘‘साहस के लिए’’ पिल्लै की प्रशंसा की।

पिल्लै ने गुरुवार को दावा किया था कि वर्ष 2009 में केंद्र में यूपीए सरकार के शासनकाल के दौरान गुजरात हाईकोर्ट में इशरत जहां तथा अन्य सहयोगियों के लश्कर से संबंध के बारे में दिया गया हलफनामा ‘‘राजनीतिक स्तर’’ पर बदल दिया गया। इशरत एवं अन्य को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में 2004 में मार गिराया गया था। बयान देने के समय पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने पूछा कि पिल्लै ये दावे अब क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव कैसे बनाया जा सकता है..यह दुर्भाग्यपूर्ण है.. आज क्यों कह रहे हैं। कांग्रेस के एक अन्य नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि अगर पूर्व गृह सचिव ने तब यह बयान दिया होता तो इसकी ज्यादा विश्वसनीयता होती।

उन्होंने कहा कि अब वह बीजेपी के शब्दों को दोहरा रहे हैं। कौन उन पर विश्वास करेगा। यूपीए सरकार ने दो हलफनामे दिए थे-एक में कहा गया कि जो चार लोग कथित मुठभेड़ में मारे गए थे वे आतंकवादी थे और दूसरे में कहा गया कि कोई साक्ष्य नहीं है।
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