होम /न्यूज /politics /

महाराष्ट्र में ओबीसी नेता को कमान दे सकती है बीजेपी, जातियों के समीकरण सुलझाने पर है जोर

महाराष्ट्र में ओबीसी नेता को कमान दे सकती है बीजेपी, जातियों के समीकरण सुलझाने पर है जोर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस. (फाइल फोटो)

Maharashtra News: ओबीसी आरक्षण पर बांठिया पैनल की रिपोर्ट को शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को स्वीकार करते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत ओबीसी कोटा की अनुमति दी थी.

हाइलाइट्स

महाराष्ट्र राज्य का 70 प्रतिशत मतदाता मराठा और पिछड़ा वर्ग से
स्थानीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा रहा गर्म
ओबीसी को कमान देकर जातियों के समीकरण सुलझाले में जुटी बीजेपी

मुंबई. महाराष्ट्र में पिछड़े वर्ग को लुभाने के लिए BJP राज्य में किसी OBC (पिछड़ा वर्ग) नेता को पार्टी की कमान सौंप सकती है. राज्यों के पिछड़े वर्ग के वोटरों को अपने पाले में खींचने के लिए बीजेपी कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के मंत्रिमंडल में शामिल होते ही भाजपा के पास पिछड़े वर्ग के नेता को राज्य में कमान देने का अवसर दिख रहा है. बता दें कि मुख्यमंत्री और शिवसेना के बागी नेता शिंदे खुद मजबूत मराठा समुदाय से आते हैं, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ब्राह्मण हैं. ऐसे में OBC को प्रदेश की कमान सौंप कर पार्टी राज्य में जातियों के गणित को सुलझाना चाहती है.

दरअसल महाराष्ट्र में मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा ओबीसी वर्ग से है. महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुसार राज्य में ओबीसी की आबादी 38 से 40 फीसदी है, जबकि मराठा समुदाय की आबादी 33 फीसदी है. ऐसे में बीजेपी की नजर आगामी चुनावों पर है. पिछले कई वर्षों में भाजपा ने मराठा समुदाय, विशेषकर मराठवाड़ा क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई है. भाजपा 2019 के विधानसभा चुनावों में कुल 288 सीटों में से 106 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने राज्य की कुल 48 सीटों में से 23 पर जीत हासिल की थी.

स्थानीय चुनावों में OBC आरक्षण का मुद्दा गर्म
पिछले साल की शुरुआत में, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के कार्यकाल के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के स्थानीय निकायों में ‘ट्रिपल टेस्ट’ मानदंडों को पूरा नहीं करने के लिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया था. तब से राज्य में एक राजनीतिक विवाद चल रहा था, जिसके बाद से राज्य में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्म है और सभी पार्टियां अपने हित देख रही हैं.

राज्य में शिंदे-भाजपा सरकार के कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद ही बांठिया आयोग ने 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंपी. ओबीसी आरक्षण पर बांठिया पैनल की रिपोर्ट को शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को स्वीकार करते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत ओबीसी कोटा की अनुमति दी थी.

Tags: BJP, Devendra Fadnavis, Eknath Shinde, OBC Reservation

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर