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जेएनयू विवाद: राष्ट्रपति से मिले राहुल, हस्तक्षेप की मांग की

जेएनयू विवाद: राष्ट्रपति से मिले राहुल, हस्तक्षेप की मांग की

लोकतांत्रिक अधिकारों की समाप्ति’ को रोकने को लेकर फौरन कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हस्तक्षेप की मांग की।

लोकतांत्रिक अधिकारों की समाप्ति’ को रोकने को लेकर फौरन कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हस्तक्षेप की मांग की।

लोकतांत्रिक अधिकारों की समाप्ति’ को रोकने को लेकर फौरन कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हस्तक्षेप की मांग की।

    नई दिल्लीजेएनयू विवाद और पटियाला हाउस अदालत परिसर हिंसा का विरोध तेज करते हुए आज राहुल गांधी ने इसे भारत की छवि पर एक ‘धब्बा’ करार दिया और ‘अराजकता की स्थिति और लोकतांत्रिक अधिकारों की समाप्ति’ को रोकने को लेकर फौरन कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हस्तक्षेप की मांग की।

    उन्होंने यहां कहा है कि यह सरकार का काम नहीं है कि वह हमारे शैक्षणिक संस्थानों को नष्ट करे और सभी छात्रों की अभिव्यक्ति का दमन करे। आरएसएस देश में छात्रों पर एक विकृत विचारधारा थोपने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने उपर किए गए राष्ट्रविरोधी कटाक्ष को लेकर बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है कि राष्ट्रवाद मेरे खून में है।

    मैंने इस राष्ट्र के लिए अपने परिवार का बलिदान बार..बार देखा है। राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश एक गंभीर संकट में फंसा हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी के बीचों बीच स्थित अदालत परिसर में अत्यधिक अराजकता के दृश्य दिख रहे हैं जो देश के लोकतांत्रिक आदशरें का तिरस्कार है।

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के अलावा प्रतिनिधमंडल में लोकसभा में पार्टी नेता मल्लिकाजरुन खड़गे, राज्य सभा में उप नेता आनंद शर्मा सहित पार्टी की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित, रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन और मनीष तिवारी भी शामिल थे।

    उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि पटियाला हाउस परिसर के बाहर पर्याप्त सुरक्षा करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार ने पत्रकारों और छात्रों पर हमले को नहीं रोका। हालात का आंकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति को भी गाली गलौच और हमले का सामना करना पड़ा।

    ज्ञापन में राष्ट्रपति से कहा गया है कि शीर्ष न्यायालय के निर्देश की दो मौकों पर एक ही समूह के लोगों द्वारा अवज्ञा किया जाना तरकीबी सहयोग और प्रोत्साहन के बगैर नहीं हुआ होगा। उनमें से कुछ लोग मौजूदा शासन के नेताओं के साथ विभिन्न मंचों पर पहचाने गए हैं।

    Tags: Rahul gandhi

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