MCD Election Results 2017: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का आज क्‍या होगा?

अगर एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी की बहुत बुरी तरह से हार होती है तो उसके अस्‍तित्‍व पर सवाल उठने लगेंगे.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 26, 2017, 2:06 AM IST
MCD Election Results 2017: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का आज क्‍या होगा?
देखना यह है कि विपश्यना से मानसिक शांति लेकर आने के बाद अरविंद केजरीवाल क्या करते हैं.
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 26, 2017, 2:06 AM IST
दिल्‍ली नगर निगम चुनावों में लोगों की नजर बीजेपी से ज्‍यादा आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदर्शन पर लगी हुई है. सबके मन में सवाल है कि इस चुनाव परिणाम के बाद ‘आप’ का क्‍या होगा?

सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी (सीएसडीएस) के निदेशक संजय कुमार कहते हैं कि अगर एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी की बहुत बुरी तरह से हार होती है, यानि वो 270 में से 50 सीटों के आसपास ही सिमट जाती है, तो उसके अस्‍तित्‍व पर सवाल उठने लगेंगे.

सरकार पर उतना असर नहीं पड़ेगा लेकिन पार्टी के अंदर कांग्रेस की तरह ही अंतर्विरोध बढ़ जाएगा. वो नौबत आ सकती है जैसे अब कांग्रेस में है. इतना ही नहीं, पार्टी के कुछ नेता बीजेपी में भाग सकते हैं.

‘आप’ के जिन 21 विधायकों पर चुनाव आयोग में केस चल रहा है, उस पर भी असर पड़ेगा. हार-जीत तो चुनाव में लगी रहती है लेकिन एक होती है सम्‍मान जनक हार. अगर पार्टी 100 सीटों पर जीत जाती है तो स्‍थिति पक्ष में होगी, वरना कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा और इसका असर ‘आप’ के भविष्‍य पर पड़ेगा.

Photo: PTI आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि गोवा, पंजाब और राजौरी गार्डन में आम आदमी पार्टी की हार ने पार्टी नेताओं के मनोबल को गिराया है. इसलिए ये चुनाव उसके लिए काफी महत्‍वपूर्ण है. ये चुनाव उसके लिए जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा सकता है.

‘आप’ ने वर्ष 2015 में उम्मीद से बड़ी जीत दर्ज की थी इसलिए उसे अपना अस्‍तित्‍व बचाने की बड़ी लड़ाई भी लड़नी है.
हालांकि आम आदमी पार्टी की स्‍थिति इतनी कमजोर नहीं दिखती है. ऐसा माना जा रहा है कि झुग्‍गी-झोपड़ी, कॉलोनियों और मुस्‍लिम बहुल क्षेत्रों में उसकी पकड़ अभी बनी हुई है.

बिजली-पानी के रेट में कमी, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में किए गए सरकार के काम से दिल्लीवाले प्रभावित हैं. लेकिन देखना होगा कि ये काम वोटों में बदलेगा या नहीं.
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