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बीएचयू में मोदी के कार्यक्रम में छात्र ने लगाए नारे

बीएचयू में मोदी के कार्यक्रम में छात्र ने लगाए नारे

मोदी रविवार रात ही वाराणसी पहुंच गए थे और आज सुबह रविदास मंदिर पहुंचे। हालांकि यहां कुछ लोगों ने मोदी का विरोध करने की भी कोशिश की।

    वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में हैं। मोदी रविवार रात ही वाराणसी पहुंच गए थे और आज सुबह 15वीं सदी के दलित कवि श्री रविदास के जयंती समारोहों के अवसर पर रविदास मंदिर पहुंचे। यहां मोदी ने दूसरे लोगों के साथ सामूहिक रसोई में बना भोजन भी किया।

    बता दें कि इस आध्यात्मिक मंदिर का दलितों के दिल में विशेष स्थान है। यहां से वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में शिरकत करने चले गए और भाषण दिया।

    मंदिर के बाहर कुछ लोगों ने मोदी का विरोध करने की भी कोशिश की। मोदी का फ्लीट गुजरने के बाद कुछ लोगों ने रविदास मंदिर के पास पीएम का विरोध जताया। इस दौरान पीएम मंदिर में ही थे।

    उधर, बीएचयू गेट पर भी दो छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया। ये दोनों काले कपड़े लेकर पीएम का विरोध करने जा रहे थे। हालांकि उस वक़्त पीएम या उनका काफ़िला वहां नहीं था। पुलिस ने ऐहतियात के तौर पर इन्हें हिरासत में लिया।

    वहीं बीएचयू में मोदी जैसे ही भाषण शुरू करने वाले थे, एक छात्र ने छात्र संघ की बहाली के लिए नारे लगाने शुरू कर दिए। पुलिस तुरंत इस छात्र को वहां से लेकर गई। छात्र बीए द्वतीय वर्ष का है।

    अपना भाषण खत्म करने के प्रधानमंत्री फिर माइक पर लौटे और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की मानद उपाधि लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार किया। मोदी ने इसकी वजह उनकी खुद की नीति बताई।

    विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से विभूषित करने की इच्छा जताई थी। लेकिन मोदी ने कहा कि इस तरह की डिग्री हासिल करने की उनकी कोई नीति नहीं है।

    मोदी का भाषण

    मोदी ने शताब्दी दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय की दूररदर्शिता की सराहना की। इस विश्वविद्यालय का निर्माण उनकी दूरदर्शिता का साक्षात प्रमाण है। वाराणसी से सांसद मोदी ने कहा कि अंग्रेज भी पूरे भारत में विश्वविद्यालय खोल रहे थे, लेकिन उन्होंने केवल अपनी प्रेसीडेंसी में ही काम करवाए, लेकिन महामना ने इस स्थान को चुना। मोदी ने महामना द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय के विकास में योगदान निभाने वाले लोगों को नमन किया।

    उन्होंने दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महामना और उनके बाद उन महापुरुषों की अथक मेहनत का ही परिणाम है कि दुनिया के कोने-कोने में इस विश्वविद्यालय के छात्र इसका नाम रोशन कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि बीएचयू भारत की विरासत है। मालवीय जी ने 100 साल पहले जो बीज बोया था, आज उसका फल देश को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मिल रहा है।
    उन्होंने योग विधा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में योग नई चीज नहीं है। पहले भारत के योग को कोई तवज्जो नहीं देता था, लेकिन पिछले साल जब संयुक्त राष्ट्र ने योग दिवस को मान्यता दी, तब पूरी दुनिया को इसकी ताकत का पता चला।

    उपाधि वितरण करने के बाद विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह है और आपको कभी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि यह शिक्षांत समारोह है। मुझे तो लगता है कि दीक्षांत के बाद ही असली शिक्षा की शुरुआत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि डिग्री लेने के बाद दुनिया को संवारने के काम की शुरुआत होती है।

     

    Tags: Arvind kejriwal, Narendra modi

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