शिवसेना की गीदड़ भभकी, बाघ फिर पिंजरे में वापस

संदीप सोनवलकर | News18India
Updated: June 21, 2017, 8:22 PM IST
शिवसेना की गीदड़ भभकी, बाघ फिर पिंजरे में वापस
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संदीप सोनवलकर
संदीप सोनवलकर | News18India
Updated: June 21, 2017, 8:22 PM IST
सरकार को हर बात पर कोसने वाली शिवसेना दो दिन से इतनी नरम है कि हर बात पर सिर हिला रही है. शिवसेना को अब हर बात पसंद है चाहे वो राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद का नाम हो या फिर कर्ज माफी पर फार्मूला. इतनी तक बात बन गई कि सरकार के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार बुधवार को उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री वृक्षारोपण करने गये.

ऐसा क्या हो गया कि कल तक हर बात पर नाराज होने वाली शिवसेना मान गई. सूत्रों की मानें तो रविवार को मुलाकात में बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने उद्धव को साफ कर दिया था कि सरकार केन्द्र और राज्य दोनों में बीजेपी की है. अब शिवसेना को तय करना है कि साथ में रहना है या नही. अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये ऐलान भी कर दिया कि बीजेपी मध्यावधि के लिए तैयार है.

बीजेपी का क़डा रुख देखकर शिवसेना की हालत पतली हो गयी. बात-बात पर धमकी देने वाले सिपहसालारों खासकर संजय राउत और अरविंद सावंत को लगा कि अब गलती की तो अकेले पड़ जाएंगे. खासकर रामनाथ कोविंद के मसले पर शिवसेना को लगा कि अलग चले तो कोई नहीं पूछेगा. ऊपर से ठप्पा लग जायेगा कि

कांग्रेस के साथ जा रहे हैं. शिवसेना को बीजेपी ने ये भी बता दिया था कि अगर राष्ट्रपति के चुनाव में साथ नहीं दिया तो उनके रास्ते अलग होंगे.

साफ है उद्धव और शिवसेना ना तो सरकार से बाहर जाना चाहते हैं और ना ही मध्यावधि चुनाव लड़ने की हालात में हैं. शिवसेना को डर है कि अगर सरकार से अलग हुए तो कई विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ जा सकते हैं. इसी डर के चलते उद्धव ने समय रहते कदम पीछे खींच लिए और शिवसेना का बाघ फिर पिंजरे में वापस लौट गया.
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