सशस्त्र बल प्रधानमंत्री के नेतृत्व की तारीफ करते हैं: स्मृति ईरानी

राजनीति में उनका सबसे ज्यादा नाम जब वे मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनी तब हुआ. लेकिन इसके बाद 2004 में दिल्ली के चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव लड़ते समय स्मृति ईरानी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (पत्राचार) से 1996 में बीए की डिग्री होने की बात की थी. लेकिन, 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ते समय उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निग (पत्राचार) से 1994 बीकॉम पार्ट-1 तक की पढ़ाई की जानकारी दी. इसको लेकर खासा विवाद रहा.

राजनीति में उनका सबसे ज्यादा नाम जब वे मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनी तब हुआ. लेकिन इसके बाद 2004 में दिल्ली के चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव लड़ते समय स्मृति ईरानी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (पत्राचार) से 1996 में बीए की डिग्री होने की बात की थी. लेकिन, 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ते समय उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निग (पत्राचार) से 1994 बीकॉम पार्ट-1 तक की पढ़ाई की जानकारी दी. इसको लेकर खासा विवाद रहा.

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को कहा कि सशस्त्र बल प्रधानमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा करते हैं जिन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ (ओआरओपी) सहित उनकी कई लंबित मांगों को पूरा किया.

  • Last Updated: January 26, 2017, 8:24 AM IST
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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को कहा कि सशस्त्र बल प्रधानमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा करते हैं जिन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ (ओआरओपी) सहित उनकी कई लंबित मांगों को पूरा किया. स्मृति ने यहां के परनेम निर्वाचन क्षेत्र में महिलाओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुवार को गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान आप हमारे सैनिकों को गर्व के साथ मार्च करते देखेंगे. उनके चेहरे पर दिखने वाली चमक का कारण मोदी सरकार द्वारा लगातार दिया जा रहा समर्थन है.



स्मृति ईरानी ने कहा कि सभी अधिकारी और सैनिक अपनी मांगें पूरी करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व की प्रशंसा करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह विडंबनापूर्ण है कि जहां हमारे सैनिक देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं, कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों ने करीब चार दशकों तक ओआरओपी की उनकी मांगों को दरकिनार किया. स्मृति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने उनका 40 सालों का संघर्ष खत्म कर दिया. उन्होंने कहा कि संप्रग (यूपीए) के शासनकाल में सशस्त्र बलों पर हमला किया गया जबकि प्रधानमंत्री ने चुप्पी साधे रखी.



केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब मुंबई में हमला हुआ, (तत्कालीन) केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने कपड़े बदलने में ज्यादा समय गुजारा और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) को समय पर नहीं भेजा गया. उन्होंने कहा कि देश के लोगों को पता था कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों पर लक्षित हमला (सर्जिकल स्ट्राइक) मोदी और पर्रिकर के नेतृत्व में ही संभव है.
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