स्वामी ने ऐसे दिया आपातकाल में इंदिरा सरकार को गच्चा!

आपातकाल के समय दिल्ली हवाई अड्डे पर जहाज से उतरने वाले लोगों की लिस्ट प्रशासन के पास होती थी। जिसपर प्रशासन उन्हें पकड़ने या छोड़ने का फैसला करता था।

आपातकाल के समय दिल्ली हवाई अड्डे पर जहाज से उतरने वाले लोगों की लिस्ट प्रशासन के पास होती थी। जिसपर प्रशासन उन्हें पकड़ने या छोड़ने का फैसला करता था।

आपातकाल के समय दिल्ली हवाई अड्डे पर जहाज से उतरने वाले लोगों की लिस्ट प्रशासन के पास होती थी। जिसपर प्रशासन उन्हें पकड़ने या छोड़ने का फैसला करता था।

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नई दिल्ली। 40 साल पहले देश ने आज ही के दिन आपातकाल का दंश झेला था। नागरिक अधिकारों पर सबसे बड़े कुठाराघात के वो 19 महीने देश की जनता ने बेहद मुश्किल और संघर्ष के साथ बिताए। विपक्ष की आवाज पूरी तरह से बंद कर देने की सरकारी मुहिम ने तमाम नेताओं को जेलों में ठूंस दिया। लेकिन एक नेता ऐसा भी था जिसने इंदिरा सरकार को गच्चा देते हुए इमरजेंसी के खिलाफ राज्यसभा में आवाज उठाई। आज जब पूरा देश उस राजनीतिक त्रासदी की सालगिरह मना रहा है तब आईबीएनखबर ने उसी राजनीतिक हस्ती बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी से बातचीत की। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के संपादित अंश उन्हीं की जुबानी।



एक बात जो खासतौर पर साझा करना चाहूंगा वो ये कि जनसंघ की सरकारों के बाद 1980 में जब इंदिरा चुनाव जीतकर फिर से सत्ता में आईं तो उस समय मेरी राजीव गांधी से मित्रता हो गई। इस बीच बातों-बातों में मैंने एक दिन इंदिरा से पूछा कि आपने क्या सोचकर इमरजेंसी हटाकर चुनाव कराए? इंदिरा गांधी ने जवाब दिया कि मेरे साथी लोग कहते थे कि देश मेरी मुट्ठी में है और लगता था कि मेरे कहने पर ही यहां पत्ता हिलता है। इसके बावजूद हम आपको (स्वामी को) नहीं पकड़ पाए। आप अमेरिका से आए, संसद में घुसे और फिर सफलतापूर्वक फरार हो गए। इसके बाद मुझे लगा कि वाकई सबकुछ मेरी मुट्ठी में नहीं है। इस दौरान आपने विदेश में जाकर भारतीयों को एकत्र किया। काफी दबाव पड़ रहा था और फिर मुझे लगा कि मैं अच्छी स्थिति में हूं और चुनाव जीत जाऊंगी तो मैंने आपातकाल हटाकर चुनाव कराने का फैसला कर लिया।



इस दौरान इंदिरा ने मुझसे पूछा कि सरकार ने आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया था। पूरी मशीनरी आरएसएस नेताओं के पीछे लगा दी गई, फिर भी आरएसएस के काफी नेताओं तक प्रशासन पहुंच नहीं पाया। इसकी क्या वजह थी? इंदिरा के इस सवाल पर मैंने कहा कि आरएसएस पर प्रतिबंध और आपातकाल की घोषणा का समय सुबह 6 बजे के आसपास था। उस समय संघ के नेता शाखा में होते हैं। आपके फैसलों की खबर उन्हें हो चुकी थी। पुलिस उनके घरों पर उन्हें पकड़ने गई पर वो घर ही नहीं गए। यही वजह रही कि आरएसएस के काफी बड़े नेता पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।





मैंने पहले ही जेपी को 'कुछ बड़ा' होने की जानकारी दी थी। पर किसी को यकीन नहीं था कि इंदिरा इतना बड़ा कदम उठाएंगी। मैंने जब जोर देकर कहा तो उन्होंने मुझे विदेश जाने की सलाह दी। उनकी ही सलाह पर मैं हॉर्वर्ड गया और फिर वहां रह रहे भारतीयों को एकत्र किया। सुब्रमण्यम स्वामी से जब पूछा गया कि उन्होंने संसद आने का फैसला क्यों किया तो उनका कहना था कि, 'मैं संसद इसलिए आया, ताकि इंदिरा गांधी को बता सकूं कि वो सर्वशक्तिमान नहीं हैं। देश उनकी मुट्ठी में नहीं है। मैं सिर्फ इंदिरा गांधी को गलत ठहराना चाहता था और मैंने ऐसा किया भी।
आपातकाल के समय दिल्ली हवाई अड्डे पर जहाज से उतरने वाले लोगों की लिस्ट प्रशासन के पास होती थी। जिसपर प्रशासन उन्हें पकड़ने या छोड़ने का फैसला करता था। फिर उस समय न्यूयॉर्क से दिल्ली सीधी हवाई सेवा नहीं थी। हवाई जहाज न्यूयॉर्क से उड़कर लंदन, पेरिस, अंकारा(तुर्की), कराची से होकर दिल्ली और फिर बैंकॉक जाता था। मैंने बैंकॉक का टिकट लिया हुआ था, इसीलिए मेरी सूचना प्रशासन के पास नहीं थी। स्वामी उस समय को याद करते हुए कहते हैं कि मैं हवाई जहाज से उतरा और राज्यसभा का पास दिखाकर बाहर आ गया। पुलिसवालों ने मुझे कोई युवा कांग्रेसी नेता समझा था। और फिर मैं संसद आया। आगे की कहानी आप सबको पता ही है।



 
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