क्या तरुण गोगोई की विदाई का वक्त आ गया है?

क्या तरुण गोगोई की विदाई का वक्त आ गया है?
असम की राजनीति में तरुण गोगोई एक बड़ा नाम है। 80 साल की उम्र में भी लोगों की पहली पसंद है। पिछले 3 चुनावों से जीत का परचम लहरा रहे हैं।

असम की राजनीति में तरुण गोगोई एक बड़ा नाम है। 80 साल की उम्र में भी लोगों की पहली पसंद है। पिछले 3 चुनावों से जीत का परचम लहरा रहे हैं।

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नई दिल्ली।   पिछले 15 सालों से असम के मुख्यमंत्री रह चुके  तरुण गोगोई को इस चुनाव में  बड़ा झटका लगा है।  पिछले 3 चुनावों से जीत का परचम लहरा रहे गोगोई का विजय रथ रुक गया है।  उनकी अगुवाई में कांग्रेस की करारी हार हुई है और पार्टी 24 सीटों पर सिमट गई है।  पहली बार असम में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।  गोगोई की पहचान कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ-साथ जमीन से जुड़े नेताओं में होती है।

गोगोई पिछले 15 सालों से तिताबार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं और जीत रहे हैं। इस बार भी गोगोई ने इस सीट से दर्ज की है, लेकिन उनका पार्टी की करारी हार हुई है।

गोगोई 2001 से लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। गोगोई का जन्म 1 अप्रैल 1936 असम के शिवसागर जिले में हुआ था। उनके पिता कमलेश्वर गोगोई एक डॉक्टर थे। गोगोई ने जगन्नाथ बरुआ से ग्रेजुएशन किया, जबकि कानून की पढ़ाई गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से की। गोगोई ने राजनीति की शुरुआत जमीन स्तर से की है। सबसे पहले 1968 में ये नगर निगम के मेंबर बने।



गोगोई 6 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं, उन्होंने पहली बार जोरहट लोकसभा से 1971 में जीत दर्ज की, इसके बाद दो बार ये कालियाबोर सीट से चुने गए। जहां से अभी इनके बेटे गौरव गोगोई सांसद हैं। 1971 में गोगोई कांग्रेस के ज्वाइंट सेक्रेटरी चुने गए थे और उस वक्त इंदिरा गांधी के ये बेहद करीबी थे।
कांग्रेस आलाकमान से करीबी होने का फायदा गोगोई को 1991 में मिला जब इन्हें केंद्रीय मंत्री पद से नवाजा गया। 90 के दशक से पहले गोगोई असम की राजनीति में अपनी गहरी पैठ बना चुके थे।

साल 1986–90 तक ये असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहने के बाद फिर 1996 में अध्यक्ष चुने गए। गोगाई चार विधानसभा चुनाव भी जीत चुके हैं पहली बार 1996 में ये मार्गेरिटा निर्वाचन क्षेत्र जीत कर आए, उसके बाद 2001 में ये तिताबोर विधानसभा से चुने गए थे।

तरुण गोगोई ने 1972 में डोली गोगाई से शादी की थी। उनके दो बच्चे गौरव गोगोई और चंद्रिमा गोगोई हैं। गौरव गोगोई सांसद हैं, तरुण गोगोई की मानें तो वो इस बार चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन असम की जनता से लगाव ने उन्हें आखिरी बार चुनावी मैदान में उतार दिया है।

 
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