गुजरात असेंबली चुनाव से पहले बड़ा सवाल, कौन होगा कांग्रेस का कैप्‍टन?

रूठे शंकर सिंह वाघेला को कांग्रेस की ओर से मनाने की कोशिश की जा रही है.

जनक दवे | News18Hindi
Updated: June 14, 2017, 4:24 PM IST
गुजरात असेंबली चुनाव से पहले बड़ा सवाल, कौन होगा कांग्रेस का कैप्‍टन?
शंकरसिंह वाघेला
जनक दवे
जनक दवे | News18Hindi
Updated: June 14, 2017, 4:24 PM IST
इन दिनों क्रिकेट फीवर के बीच गुजरात में चुनावी फीवर भी चढ़ा हुआ है. बीजेपी और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बीच घमासान होने वाला है. लेकिन कांग्रेस का टीम कैप्‍टन कौन? इसको लेकर असमंजस है.

वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता शंकरसिंह वाघेला (बापू) कैप्‍टन बनने की चाह में गुगली पर गुगली डाल रहे हैं. बापू की कुछ गुगली से आला कमान भी भौंचक्के रह जाता है. लेकिन कुछ दिनों से बापू अपनी पारी खेलते हुए आलाकमान के खिलाफ क्लीन बोल्ड हुए हैं. ऐसे में वह अपनी अगली रणनीति को लेकर खामोश हैं.

हुआ यूं कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में इस बात ने जोर पकड़ा था कि कांग्रेस के विधायक स्थानीय बड़े नेताओं की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और वे बीजेपी का दामन थाम सकते हैं.

इस बात की पुष्टि तब हुई जब जामनगर ग्राम्‍य के विधायक और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राघवजी पटेल ने बगावती तेवर अपनाए. उन्हें साथ मिला पास ही के विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आ रहे जामनगर उत्तर के विधायक धर्मेंद्र सिंह जड़ेजा और जाम खंभालिया के मेरामन गोरिया का.

Congress, SHANKAR SINGH VAGHELA gujrat congress, aicc फाइल फोटो- प्रतीकात्मक.

इन तीनों ने मीडिया के सामने कहा कि वो नाराज हैं और उनकी बातों पर गौर नहीं किया गया तो उनके लिए आगे के रास्ते साफ हैं. मतलब भी साफ था कि वो बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं. दरअसल इन तीनों के पीछे राजनीतिक ताकत शंकर सिंह बाघेला की बताई जा रही थी.

मीडिया में यह खबर आई कि 12 और विधायक बीजेपी से जुड़ सकते हैं. इसके बाद कांग्रेस की स्थानीय इकाई में हड़कंप मच गया. इन में कई बापू के समर्थक हैं. आलाकमान की भी नींद उड़ी. बापू की रणनीति को काउंटर करने के लिए तय हुआ कि मीडिया के सामने  विधायकों की पहचान परेड कराई जाए.
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बापू के समर्थक विधायकों को मीडिया के सामने पेश किया गया. और कहा गया कि वो सब साथ साथ हैं (फिलहाल कांग्रेस के साथ). बापू की रणनीति के खिलाफ आलाकमान ने बड़ी चतुरता से यह कदम उठाया. हालांकि बापू के बेटे महेंद्र सिंह और 3 नाराज विधायक इस पहचान परेड़ में नहीं आए.

मुख्‍यमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनना चाहते हैं बाघेला

बापू चाहते हैं कि आलाकमान उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करें, इतना ही नहीं चुनाव प्रचार कमेटी की डोर भी उनके हाथ रहे. इसको लेकर वह आलाकमान के सामने दबाव की राजनीति करते रहे हैं, हालांकि आलाकमान है कि मानता नहीं.

इससे बापू नाराज हैं. बापू को मनाने की कोशिश के तौर पर उन्हें पार्टी में जो काम ऑफर किया जा रहा है उस पर वह राजी नहीं. उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार से नीचे कुछ चाहिए नहीं. ऐसे में पेच है. बापू शांत हैं. कोई राजनीतिक बयान भी नहीं दे रहे. उनकी यह शांति तूफान से पहले की है.

खबरें इस तरीके की भी हैं कि बापू खुद के लिए नहीं बल्‍कि अपने विधायक बेटे की राजनीति को संवारने की कोशिश में हैं. कांग्रेस में आने के बाद पिछले डेढ़ दशक से विपक्ष में रहते हुए उनके विधायक बेटे और कई उनके समर्थक सत्ता से बाहर रहे हैं.

SHANKAR SINGH VAGHELA gujrat congress, aicc एकता दिखाते गुजरात कांग्रेस के नेता एवं विधायक

कइयों की राजनीति ही दशक की होती है ऐसे में अब विपक्ष में रहना नुकसान का ही सौदा है. तभी तो बीजेपी में जाने के बाद कैबिनेट मंत्री या राज्यसभा से सांसद तक की कोशिशें की जा रही है. हालांकि बीजेपी आलाकमान इस पर कितना सहमत होगा यह एक बड़ा सवाल है.

पाटीदारों की नाराजगी के सामने बापू के समर्थक बीजेपी से जुड़ते हैं तो पाटीदारों से होने वाले नुकसान को कांग्रेस के वोटबैंक से कुछ हद तक भरा जा सकता है.

अब निगाहें बापू के अगले खेल और रणनीति पर है. तभी रूठे बापू को मनाने की कोशिश की जा रही हैं. जो भी है चुनाव से पहले पहले का कांग्रेस का अंदरूनी खेल बेहद दिलचस्प होता जा रहा है.
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