चुनाव हारे या जीतें, लूजर नहीं नेशनल लीडर हैं अखिलेश..!

यूपी की चुनावी सियासत में अखिलेश यादव एक चमत्कारिक युवा लीडर के तौर पर उभरे हैं. चाचा शिवपाल जैसे धुरंधर नेता और पिता मुलायम जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ को साइड में लगाकर वे एक ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका प्रोग्रेस कार्ड ऐतिहासिक रूप से ग्रोथ पर है.

यूपी की चुनावी सियासत में अखिलेश यादव एक चमत्कारिक युवा लीडर के तौर पर उभरे हैं. चाचा शिवपाल जैसे धुरंधर नेता और पिता मुलायम जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ को साइड में लगाकर वे एक ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका प्रोग्रेस कार्ड ऐतिहासिक रूप से ग्रोथ पर है.

यूपी की चुनावी सियासत में अखिलेश यादव एक चमत्कारिक युवा लीडर के तौर पर उभरे हैं. चाचा शिवपाल जैसे धुरंधर नेता और पिता मुलायम जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ को साइड में लगाकर वे एक ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका प्रोग्रेस कार्ड ऐतिहासिक रूप से ग्रोथ पर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 11, 2017, 12:01 PM IST
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यूपी की चुनावी सियासत में अखिलेश यादव एक चमत्कारिक युवा लीडर के तौर पर उभरे हैं. वे एक लंबी चली नाटकीय और संदेहास्पद परिवारिक कलह के अद्भुत विजेता रहे हैं.

चाचा शिवपाल जैसे धुरंधर नेता और पिता मुलायम सिंह यादव जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ को साइड में लगाकर वे एक ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका प्रोग्रेस कार्ड ऐतिहासिक रूप से ग्रोथ पर है.

नये 'नेता जी' और समाजवाद का राष्ट्रीय चेहरा



अखिलेश यादव चुनाव हारें या जीतें, वे देश में मुलायम सिंह यादव की जगह समाजवादी राजनीति का नया चेहरा हैं. कांग्रेस से गठबंधन करना, सीधे पीएम नरेंद्र मोदी को चुनौती और इलेक्शन को मोदी बनाम अखिलेश पर फोकस कर देना उनकी बड़ी कूटनीतिक जीत है.बतौर सीएम पांच साल यूपी जैसे पॉलिटिकली हॉट स्टेेट की कमान संभालना, पार्टी में शक्ति प्रदर्शन कर राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाना, उन्हें सियासत का नया 'नेता जी' बनाता है.
नए विकासवादी पुरुष की छवि

इन चुनावों अखिलेश की सबसे बड़ी जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी छवि के बरक्स खुदको खड़ा करना है. वे बेतुके बयानों और जुमलों से वे लगातार दूर रहना और काम के ज्‍यादा प्रचार का मंत्र बुदबुदाना सीख गए हैं.

चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले लगातार योजनाओं का उद्घाटन, मीडिया में सरकारी नीतियों की ब्रैंडिंग, सोशल-मीडिया पर लगातार एक्टि्व होना और सेंटीमेंटल होकर पर्सलन रिलेशन बनाने की कला ने उन्हें लगातार चर्चा में बनाए रखा है. सोच-समझकर विरोधियों को दिए जाने वाले उनके जवाब, उन्हें बेहद परिपक्व राजनेताओं की श्रेणी में ला खड़ा करते हैं.

बैगेज से बाहर आने में सफल

अखिलेश समाजवादी राजनीति का नया विकासवादी चेहरा हैं. पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल सिंह पुराने नेताओं की जगह खुदको लाकर उन्होंने बहुत कुछ ऐसा पुराना छोड़ दिया है, जो उनकी सियासी उड़ान में रोड़ा था और पार्टी के लिए भी. क्रिमिनल, करप्ट और परिवारवाद का जमघट कहलाने वाली सपा से वे दूर आ चुके हैं. पुराने बैगेज से मुक्ति पाने में वे सफल रहे हैं .

मोदी की तुलना में कहां खड़े हैं अखिलेश?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुलना अखिलेश यादव की सबसे अहम चुनावी उपलब्धि  है. आइए जानते हैं मोदी की तुलना में कहां खड़े हैं अखिलेश

अखिलेश की ताकत

साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त छवि
बेहतर और सधे हुए वक्ता
विकास पर फोकस और ब्रैंडिंग में सफलता
विकास पुरुष की नई छवि
सोशल मीडिया में एक्टिव
कम्युनल पॉलिटिक्स से दूरी और धर्मनिरपेक्ष नेता की छवि
विदेश में शिक्षा और भारतीय समाज की बेहतर समझ

कमजोरी
परिवारवाद की राजनीति का आरोप
गुंडों, भ्रष्टाचारियों से घिरे रहने के आरोप
अनुभव की कमी

तुलना में मोदी
मोदी की अपार लोकप्रियता उनकी बड़ी ताकत है
साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त छवि
बेहतरीन वक्ता और पब्लिक से सीधा जुड़ाव
सोशल मीडिया पर एक्टिव, हर वर्ग के नेता
विकासवादी पुरुष की छवि, फैसला लेने में तेजी
पॉलिटिकली एक्टिव और काम की ब्रैंडिंग
कूटनीतिज्ञ, बेहद अनुभवी, कद्दावर और मजबूत लीडर

कमजोरी
गुजरात दंगों का दाग
अब भी कम्युनल नेता की छवि
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